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क्या आपको भी लग्जरी घर पहले से ज्यादा दिखने लगे हैं? वजह जान लें

साल 2025 की पहली छमाही में 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाली संपत्तियों का आवासीय बिक्री में कुल 62% हिस्सा रहा. आमतौर पर एक करोड़ से ऊपर कीमत वाली संपत्तियों को लग्जरी सेगमेंट में गिना जाता है.

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साल 2025 में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी घटकर 38% रह गई. (फोटो क्रेडिट: Unsplash.com)

भारत के बड़े शहरों में रियल एस्टेट कंपनियों का फोकस काफी रफ्तार से लग्जरी और हाई-एंड प्रोजेक्ट्स की तरफ शिफ्ट हो रहा है. बिल्डर्स अब उन ग्राहकों को टारगेट कर रहे हैं जो लोग लग्जरी घर खरीदने की तलाश में हैं. वजह ये कि इस सेगमेंट में बिल्डर्स की कमाई ज्यादा है और इसकी मांग भी मजबूत बनी हुई है. 

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इसका असर यह हुआ है कि नए लॉन्च होने वाले प्रोजेक्ट्स में किफायती घरों की हिस्सेदारी लगातार घट रही है. क्या इस ट्रेंड का मिडिल क्लास पर बुरा असर पड़ रहा है? क्या भारत में मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है? क्या प्रॉपर्टी अमीरों के लिए निवेश का नया जरिया बनता जा रहा है? समझने की कोशिश करते हैं.

रियल एस्टेट कंपनियां लग्जरी घर क्यों बना रही हैं?

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में रियल एस्टेट सेवाएं देने वाली कंपनी JLL के हवाले से बताया गया है कि साल 2025 की पहली छमाही में 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाली संपत्तियों का आवासीय बिक्री में कुल 62% हिस्सा रहा. आमतौर पर एक करोड़ से ऊपर कीमत वाली संपत्तियों को लग्जरी सेगमेंट में गिना जाता है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी घटकर 38% रह गई. साल 2024 में एक करोड़ से कम कीमत वाले घरों की मांग 49% थी.

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बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक खबर के मुताबिक प्रमुख रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी एनारॉक ने बताया है कि जनवरी-मार्च 2024 के बीच 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले लग्जरी घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री का 21% रही. वहीं अफोर्डेबल (लगभग सस्ते) घर कुल बिक्री का 20% रहे. एनारॉक का कहना है कि 50 लाख से कम कीमत वाले घर लगातार कम हो रहे हैं.

एनारॉक का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक लग्जरी घरों की बिक्री से बिल्डर्स 25-35% तक मुनाफा कमाते हैं. किफायती घरों के मामलों में कमाई 8-12% तक सिमट सकती है. रिपोर्ट बताती है कि जिस तरह शहरों में जमीन महंगी हो रही है, उसे देखते हुए रियल एस्टेट कंपनियां अपना मार्जिन बचाने के लिए प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस बढ़ा रही हैं.

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मिडिल क्लास का घर का सपना फंसा?

बूट्स इंडिया के एमडी दीपक राय लल्लनटॉप से बताते हैं कि मसला सिर्फ कीमत का नहीं है. भारत के बड़े शहरों, में ईएमआई-टू -इनकम रेशियो (EMI-to-income ratio) खतरनाक स्तर पर है. EMI-to-income ratio का मतलब है आपकी हर महीने की इनकम का कितना हिस्सा लोन की EMI भरने में जा रहा है. मुंबई जैसी जगहों में लोगों की कमाई का 65-70% हिस्सा होम लोन की EMI भरने में चला जाता है. यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुकाबले काफी ज्यादा है. दुनिया के बड़े शहरों में यह रेशियो 35-40% के बीच है.

दीपक राय का कहना है, 

“इस समस्या के समाधान में तीन रास्ते दिखते हैं. सरकार प्रधानमंत्री आवासीय योजना (PMAY) जैसी योजनाओं का विस्तार करे. लोकल अथॉरिटीज FSI (Floor Space Index) बढ़ाएं ताकि छोटे शहरों में डेनसिटी बढ़े. FSI का मतलब है कि आप किसी जमीन (प्लॉट) पर कुल कितना निर्माण (बिल्डिंग) कर सकते हैं. केन्द्र और राज्य सरकारें आवासीय प्रॉपर्टी के हित में नीतियां बनाएं. सिंगापुर और जर्मनी मॉडल की तरह भारत में भी रेंटल मार्केट को बढ़ावा मिलना चाहिए. इन देशों में किराए पर रहना सम्मानजनक और सुरक्षित विकल्प माना जाता है.”

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सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट में अर्बन प्लानर एवं मैनेजिंग प्रिंसिपल दिक्षु सी. कुकरेजा ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा,

“भारत के बड़े शहरों में रियल एस्टेट का लग्जरी और हाई-एंड सेगमेंट की ओर झुकाव केवल मार्केट की रणनीति नहीं, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप का संकेत है. अमीर लोगों की बढ़ती कमाई और बेहतर लाइफस्टाइल की चाह के कारण महंगे घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है. लेकिन यह भी जरूरी है कि शहरों का विकास सबके लिए हो. शहर सिर्फ अमीरों के महंगे इलाकों तक सीमित नहीं होने चाहिए. मिडिल क्लास और सस्ते घरों पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, तभी शहर लंबे समय तक संतुलित और टिकाऊ बन पाएंगे."

इंडिया टुडे में छपे एक लेख में रियल एस्टेट विशेषज्ञ और रियल एस्टेट कंपनी ‘राघवा’ के फाउंडर और एमडी हर्षा रेड्डी पोंगुलेटी लिखते हैं, “जैसे-जैसे अमीर लोगों की पूंजी बढ़ रही है, वे जोखिम कम लेने लगे हैं और अपने निवेश को लंबे समय तक सुरक्षित रखने पर ध्यान दे रहे हैं. इसी वजह से लग्जरी घर और प्रीमियम प्रॉपर्टी को अब मजबूत और स्थिर निवेश के रूप में देखा जा रहा है. इनमें स्थिरता, महंगाई से बचाव और अपने काबू में रहने वाली संपत्ति होने का फायदा मिलता है. दूसरे निवेश विकल्पों में ये सब मिलना मुश्किल होता है. आज के अमीर निवेशकों के लिए लग्जरी घर सिर्फ स्टेटस नहीं, बल्कि निवेश में संतुलन बनाने का जरिया बन गए हैं. यही कारण है कि लग्जरी रियल एस्टेट में अब बड़े निवेश पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं.”

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प्लॉट पर घर बनवाने का चलन बढ़ा

बूट्स इंडिया के एमडी दीपक राय कहते हैं कि बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं. लग्जरी प्रोजेक्ट्स का विस्तार हो रहा है. मिडिल क्लास के लिए घर खरीदना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है. यह है अपनी जमीन पर खुद का घर बनवाने का. ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से डिजाइन तैयार करवाकर कंस्ट्रक्शन करवा सकते हैं. महंगे फ्लैट्स के मुकाबले यह विकल्प ज्यादा किफायती है.

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