नैनीताल में फ्लैट ग्राउंड पर बकरीद की नमाज पढ़ने से रोक लगाने के जिला प्रशासन के फैसले को हाई कोर्ट ने पलट दिया. अंजुमन-ए-इस्लामिया नाम की संस्था ने मामले को लेकर कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. कहा था कि सालों से पहले नैनीताल के डीएसए फ्लैट मैदान में बकरीद की नमाज अदा की जाती रही है. पहली बार जिला प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी है. यह धार्मिक और पुरानी परंपरा को कायम रखने की आजादी के खिलाफ है. कोर्ट ने अपील करने वालों की अर्जी मान ली और आदेश दिया कि सालों से चली आ रही परंपरा को रोकना ठीक नहीं है.
नैनीताल फ्लैट ग्राउंड पर ही पढ़ी जाएगी बकरीद की नमाज, HC ने प्रशासन की लगाई रोक हटा दी
नैनीताल के डीएसए फ्लैट मैदान में बकरीद की नमाज पर रोक के जिला प्रशासन के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि सालों से चली आ रही परंपरा को अचानक रोकना ठीक नहीं है.


कोर्ट के आदेश के बाद फ्लैट मैदान में गुरुवार, 28 मई को बकरीद की सामूहिक नमाज का रास्ता साफ हो गया है. असल में 22 मई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि नमाज पढ़ने का काम मस्जिद और ईदगाहों में ही होना चाहिए. सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर सख्त रुख अपनाने वाली प्रदेश सरकार को फॉलो करते हुए नैनीताल जिला प्रशासन ने फैसला किया कि इस बार डीएसए फ्लैट मैदान में बकरीद की नमाज अदा करने नहीं दी जाएगी. प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वो मस्जिदों, घरों और अपने निजी परिसरों में ही नमाज अदा करें.
इजाजत देकर भी वापस ले लियाइसे लेकर मंगलवार, 26 मई को पूरे दिन प्रशासनिक हलके में गहमागहमी बनी रही. नैनीताल की मल्लीताल कोतवाली में इसे लेकर दिन भर मीटिंग चली. अंजुमन इस्लामिया ने मांग की कि हर साल की तरह इस साल भी फ्लैट मैदान में नमाज अदा करने की इजाजत दी जाए. एसडीएम ने कहा कि संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल जाने के बाद ही फैसला लिया जाएगा. बताया गया कि पहले तो डीएसए के महासचिव ने मैदान में नमाज की इजाजत दे दी लेकिन बाद में ये इजाजत रद्द करके दूसरा आदेश जारी कर दिया गया.
इसके बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और पुलिस अधिकारी मंजूनाथ टीसी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मैदान में नमाज नहीं पढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी. लोग घरों में या मस्जिद में ही नमाज पढ़ें.
जिला प्रशासन के आदेश का विरोधइंडिया टुडे से जुड़े लीला सिंह बिष्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन के इस आदेश का अंजुमन-ए-इस्लामिया ने विरोध किया. उसने नैनीताल हाईकोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर दी. याचिका में कहा गया कि दशकों से ईद की नमाज फ्लैट मैदान में आयोजित की जाती रही है. ऐसा पहली बार है जब जिला प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. यह धार्मिक आजादी के खिलाफ है. पूरा मामला जानने के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन के फैसले को पलट दिया.
कोर्ट ने कहा कि फ्लैट मैदान में ईद की नमाज अदा करने का काम दशकों से हो रहा है. ऐसी पुरानी परंपरा को अचानक से रोकना उचित नहीं माना जा सकता.
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