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ITR भरने के बाद इनकम टैक्स नोटिस आ जाए तो क्या करें?

टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय गलतियां हो सकती हैं. अगर आपको अपना आयकर रिटर्न जमा करने के बाद कोई गलती नजर आती है तो इसका यह मतलब नहीं है कि आपको जांच नोटिस भेजा जाएगा. टैक्सपेयर्स के पास अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करके कुछ गलतियों को सुधारने का विकल्प होता है.

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इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

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  • इनकम टैक्स विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 जून को धारा 143(2) के तहत रिटर्न जांच नोटिस जारी करने की अंतिम तिथि तय की है, जिसके बाद टैक्स अधिकारियों द्वारा जांच की जा सकती है।
  • रिटर्न में घोषित आय और फॉर्म 26AS या AIS में विवरणों के अंतर, ज्यादा कटौतियां, या आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज बड़े लेन-देन की जानकारी न देने के कारण इनकम टैक्स नोटिस जारी किए जाते हैं।
  • यदि करदाता नोटिस का जवाब नहीं देते हैं तो धारा 272 A(2)(C) के तहत 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है और नियमों के उल्लंघन पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इनकम टैक्स रिटर्न भरने का सीजन जारी है. टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न भर रहे हैं और कुछ भरने की तैयारी में हैं. व्यक्तिगत करदाताओं के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है. लेकिन एक और तारीख काफी अहम है. वह है 30 जून. यह तारीख उन लोगों के लिए काफी मायने रखती है जिन्होंने अपना रिटर्न भर दिया है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उनकी जांच कर सकता है.

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आमतौर पर टैक्स नोटिस मिलना परेशानी बढ़ाने वाला माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपने कुछ गलत किया है. कई मामलों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न में बताई गई जानकारियों को सत्यापित करना चाहता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में सिलसिलेवार इन बातों को समझाया गया है कि इनकम टैक्स नोटिस का जवाब कैसे देना है.

30 जून की तारीख खास क्यों है?

आयकर विभाग की तरफ से वित्तीय वर्ष 2025-26 के रिटर्न के लिए धारा 143(2) के तहत जांच नोटिस जारी करने की अंतिम तिथि 30 जून है. इनकम टैक्स अधिकारी टैक्सपेयर्स के रिटर्न में खास विवरणों की जांच करते हैं. इनमें कमाई से जुड़े आंकड़े, कटौतियां, टैक्स पेमेंट या कुछ वित्तीय लेन-देन की जांच शामिल होती है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिटर्न में दी गई जानकारी सटीक और पूरी हो. 

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किसे Income Tax Notice मिलने की संभावना ज्यादा?

इनकम टैक्स नोटिस मिलने का सबसे आम कारण रिटर्न में बताई गई कमाई और फॉर्म 26AS या एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में उपलब्ध विवरणों में अंतर होना है. कुछ मामलों में, जीएसटी रिकॉर्ड में दर्ज कारोबार, टैक्स फाइलिंग में बताए गए आंकड़ों से मेल नहीं खाते हैं. ऐसे लोग जो अपनी आय के मुकाबले बहुत ज्यादा डिडक्शंस (कटौती) का दावा करते हैं, उन पर भी ध्यान दिया जा सकता है.

अगर आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज बड़े लेन-देन की जानकारी रिटर्न में नहीं दी गई है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सफाई मांग सकता है. इसी प्रकार रजिस्ट्री विभाग के पास दर्ज संपत्ति बिक्री के लेन-देन, जिनके बारे में इनकम टैक्स रिटर्न में जानकारी नहीं दी गई है, जांच का विषय बन सकते हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब इनकम टैक्स रिटर्न की स्क्रूटनी में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) की मदद भी ले रहा है. इसलिए टैक्स चोरी करना काफी मुश्किल हो गया है.

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वहीं, टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय गलतियां हो सकती हैं. अगर आपको अपना आयकर रिटर्न जमा करने के बाद कोई गलती नजर आती है तो इसका यह मतलब नहीं है कि आपको जांच नोटिस भेजा जाएगा. टैक्सपेयर्स के पास अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करके कुछ गलतियों को सुधारने का विकल्प होता है.

टैक्स एक्सपर्ट अक्सर यह सुझाव देते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा बाद में प्रश्न उठाने की प्रतीक्षा करने के बजाय वास्तविक गलतियों को स्वेच्छा से ठीक कर लेना चाहिए. 

नोटिस आए तो कैसे जवाब दे सकते हैं?

करदाता को आमतौर पर रजिस्टर्ड ईमेल पते पर जांच सूचना भेजी जाती है और इसे रजिस्टर्ड डाक पते पर भी भेजा जा सकता है. करदाता आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करके भी सूचना देख सकते हैं. लॉग इन करने के बाद, ई-कार्यवाही अनुभाग के माध्यम से नोटिस देखा जा सकता है. इसे पढ़कर ऑनलाइन जवाब पेश कर सकते हैं.

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यदि आप नोटिस को अनदेखा करते हैं तो क्या होगा?

बीएस श्रीधर एंड कंपनी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के टैक्स एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि धारा 133(6) के तहत जारी नोटिस का जवाब न देने पर गंभीर नतीजे हो सकते हैं. आयकर अधिनियम के तहत विभाग को टैक्सपेयर्स की तरफ से मांगी गई जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर जुर्माना लगाने का अधिकार है.

धारा 272 ए (2)(सी) के तहत, वैध कारण बताए बिना नोटिस का पालन न करने पर करदाता पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. अगर आगे भी नियम कायदों का ठीक से पालन नहीं किया गया तो अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

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