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EPF में पैसा डालते हैं और VPF का नहीं पता तो 2 करोड़ रुपये मिस कर देंगे?

VPF का फुल फॉर्म है Voluntary Provident Fund. अगर आप रिटायरमेंट के वक्त इतना पैसा चाहते हैं कि बुढ़ापे पर मौज उठा सकें तो VPF बहुत अच्छा ही नहीं जोखिम रहित विकल्प भी है.

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EPF की तरह VPF पर सालाना 8.25 परसेंट का ब्याज मिलता है. (फोटो क्रेडिट: Business Today)

अगर आप प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं तो आपको EPF के बारे में पता ही होगा. नहीं पता है तो चलिए एक बार और बता देते हैं. EPF यानी Employees Provident Fund. हिंदी में कर्मचारी भविष्य निधि कहते हैं. कुछ लोग संक्षेप में इसे सिर्फ पीएफ बोलते हैं. 

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सरकारी नियमों के तहत जो भी लोग प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं वे Employees Provident Fund Organization (EPFO) के दायरे में आते हैं. इनका पीएफ जमा होना जरूरी है. नियमों के मुताबिक कर्मचारी की सैलरी (बेसिक और DA) का 12% कटता है और कंपनी भी उतना ही डालती है. ये पैसा सुरक्षित रहता है और अच्छा ब्याज मिलता है. 

ये तो हो गई EPF की बात. इसके अलावा एक VPF होता है. कई जानकार इसे 'छुपा रुस्तम' बताते हैं. तो चलिए जानते कि VPF क्या है. कौन लोग इसमें पैसा जमा कर सकते हैं. ब्याज वगैरा कितना है और कब पैसा निकाला जा सकता है?

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VPF क्या है?

VPF का फुल फॉर्म है Voluntary Provident Fund. अगर आप रिटायरमेंट के वक्त इतना पैसा चाहते हैं कि बुढ़ापे पर मौज उठा सकें तो VPF बहुत अच्छा ही नहीं जोखिम रहित विकल्प भी है. वीपीएफ में पैसा जमा करवाने से आपका रिटायरमेंट कॉर्पस बहुत बड़ा हो सकता है. रिटायरमेंट ही नहीं नौकरी जाने पर या कई जरूरतों के समय भी ये पैसा काफी काम आ सकता है. बिजनेस टुडे की एक खबर के मुताबिक EPF की तरह ही VPF पर सालाना 8.25 पर्सेंट का ब्याज मिलता है.

VPF में कितना पैसा जमा कर सकते हैं?

 मिंट की पत्रकार अपराजिता शर्मा की एक रिपोर्ट बताती है कि VPF में आप अपनी मर्जी से EPF के 12% के अलावा अतिरिक्त रकम जमा कर सकते हैं.  फिलहाल VPF के नियमों के अनुसार, अपनी बेसिक सैलरी का 100% तक VPF में जमा कर सकते हैं. 

इसकी सबसे खास बात ये है कि सब कुछ आपके मौजूदा EPF अकाउंट में ही जमा होगा. कोई नया अकाउंट नहीं खोलना पड़ता. इसे आप EPF का ही एक्सटेंशन कह सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर आपका EPF में अंशदान 5000 रुपये है तो आप इसके अलावा वीपीएफ में भी 5000 या 10 हजार रुपये अतिरिक्त हर महीने जमा करा सकते हैं. इस पर EPF वाला ब्याज तो मिलता है लेकिन सरकार अपना अंशदान नहीं करती है.

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VPF में पैसा जमा करने के लिए क्या करना होगा?

अगर आप VPF में ज्यादा पैसा खर्च करना चाहते हैं तो आपको बहुत ज्यादा माथापच्ची करने की जरूरत नहीं हैं और न ही भागदौड़ करनी पड़ेगी. बस अपनी कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को ये बताने भर की जरूरत है कि आप VPF में योगदान करना चाहते हैं. हो सकता है आपको एचआर डिपार्टमेंट कहे कि आप जितना पैसा कटवाना चाहते हैं उसके बारे में मेल भेजें. आप जितना पैसा वीपीएफ में जमा कराना चाहते हैं उसके बारे में अपने एचआर डिपार्टमेंट को सूचित करें. 

एचआर डिपार्टमेंट आपकी सैलरी से उक्त रकम हर महीने काट लेगा और आपके वीपीएफ में जमा करता रहेगा. आमतौर पर आपकी कंपनी या एंप्लॉयर ने वीपीएफ कितना काटा है इस बारे में आपकी सैलरी स्लिप में साफ लिखा रहता है. इसके अलावा आप ‘उमंग ऐप’' पर भी इसकी डिटेल देख सकते हैं. EPF खाते में ही ये रकम जुड़ी दिखाई देगी.

VPF क्यों खास है? 

यह नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF की तरह सुरक्षित होता है. अगर आप बिना दिमाग लगाए लंबी अवधि में अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं तो यह काफी बढ़िया तरीका माना जाता है. EPF की सबसे खास बात ये है कि इस पैसे की गारंटी सरकार की है. इसलिए पैसा डूबने का खतरा बहुत कम है. इसके अलावा इस पर आम सेविंग स्कीम्स और फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी के मुकाबले ज्यादा ब्याज भी मिलता है. एक अच्छी बात ये भी है कि वीपीएफ की राशि आपकी सैलरी से सीधे कटेगी इसलिए अलग से निवेश का झंझट नहीं है.

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ऐसे दो करोड़ रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं?

टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल ने लल्लनटॉप को बताया कि अगर 50 हजार रुपये प्रति महीना वेतन उठाने वाला 25 वर्षीय व्यक्ति 10 हजार रुपये VPF में जमा कराता है तो रिटायरमेंट के वक्त करीब 2 करोड़ रुपये मिलेंगे. निजी क्षेत्र में रिटायरमेंट की उम्र 58 साल है. 25 साल की उम्र के हिसाब से नौकरी की अवधि 33 साल होगी. यह कैलुकेशन 8% की औसत सालाना ब्याज दर मानकर किया गया है. फिलहाल वीपीएफ पर 8.25 पर्सेंट ब्याज मिलता है. ऐसे में अगर ब्याज में घट-बढ़ होती है तो भी रिटायरमेंट के वक्त इतना फंड बन सकता है. 

अगर आपकी सैलरी सालाना औसतन 5 पर्सेंट बढ़ती है और आप वीवीएफ में योगदान की राशि बढ़ाते रहते हैं तो रिटायरमेंट के समय इससे भी काफी ज्यादा पैसा मिल सकता है. 

एक बात ध्यान रहे कि करीब 2 करोड़ की राशि वीपीएफ के रूप में मिलेगी. कंपाउंडिंग और ब्याज से इसमें रिटर्न काफी अच्छा हो जाता है. इसके अलावा EPF में जमा होनी वाली जो रकम मिलेगी वह अलग होगी. कुल मिलाकर आप जब रिटायर होंगे तो एकमुश्त काफी पैसा मिलेगा.

टैक्स में भी मिलती है छूट 

VPF टैक्स बचाने का भी एक शानदार तरीका है.  टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल का कहना है कि VPF में टैक्स के नियम लगभग EPF जैसे ही होते हैं. लेकिन कुछ जरूरी बातें समझना जरूरी है. VPF में जमा किया गया पैसा इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है. हालांकि 80C की कुल सालाना लिमिट 1.5 लाख है. 

वहीं अगर किसी कर्मचारी का EPF और VPF में कुल सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो इस अतिरिक्त हिस्से पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल माना जाता है. वहीं, ढाई लाख रुपये तक के योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री रहता है.

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पैसा कब निकाल सकते हैं?

VPF से भी जरूरत पड़ने पर पैसा निकाल सकते हैं. पैसे निकालने के नियम भी लगभग EPF जैसे ही हैं. यह EPF अकाउंट का ही हिस्सा होता है. इसलिए जरूरत पड़ने पर आंशिक निकासी संभव है, जैसा कि पीएफ में भी होता है. EPF नियमों के मुताबिक घर खरीदने, इलाज, शादी, पढ़ाई जैसी जरूरतों में आंशिक निकासी संभव है. इसी तरह से रिटायरमेंट पर पूरा अमाउंट निकाल सकते हैं. नौकरी छोड़ने पर भी पूरा पैसा निकाला जा सकता है. हालांकि कुछ शर्तों का पालन करना जरूरी होता है.

कुछ खामियां भी हैं

ऐसा भी नहीं है कि वीपीएफ में सब चंगा ही चंगा सी. कुछ खटके-झटके हैं. मसलन, 5 साल से पहले वीपीएफ से पूरा पैसा निकालने पर टैक्स लगता है. FD या म्यूचुअल फंड की तरह नहीं है कि जरूरत पड़ने पर पैसा निकाल लिया. वीपीएफ में 5 साल का इंतजार करना होगा या टैक्स भरने के लिए तैयार रहो. 

वीपीएफ में भी EPFO के नियम लागू होते हैं. इसके अलावा EPF की तरह कंपनी इसमें अलग से पैसा नहीं डालती, पूरा योगदान आपका ही होता है. EPF की तरह इस पर मिलने वाली ब्याज दर भी सरकार तय करती है.

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