बजट के बाद RBI भी मिडिल क्लास को निराश करेगा? EMI कम होने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा?
Budget 2026 के बाद RBI भी बुधवार 4 फरवरी से एक बैठक करने जा रहा है. आज से भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटेरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक शुरू हुई है. यह बैठक तीन दिन चलेगी
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1 फरवरी को आम बजट पेश हुआ है. कई जानकारों ने इसे ग्रोथ ओरिएंटेड बजट कहा तो कईयों का मानना है कि इस बार के बजट में मिडिल क्लास की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है. बजट के बाद आरबीआई बुधवार 4 फरवरी से एक अहम बैठक करने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटेरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 4 फरवरी को शुरू हो चुकी है. यह बैठक तीन दिन चलेगी. 6 फरवरी को आरबीआई इस बैठक की प्रमुख बातें बताएगा. लेकिन जानकारों का कहना है कि आरबीआई प्रमुख नीतिगत दरों यानी रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा.
RBI की MPC क्या है?MPC को अंग्रेजी में Monetary Policy Committee और हिंदी में मौद्रिक नीति समिति कहते हैं. आरबीआई की एमपीसी के हाथ में यह फैसला होता है कि देश में ब्याज दरें कम होंगी या बढ़ेंगी या उन्हें स्थिर रखा जाए. एमपीसी ये फैसले महंगाई को काबू करने और आर्थिक विकास को बैलेंस्ड रखते हुए लेती है. MPC में कुल 6 सदस्य होते हैं. तीन RBI से (RBI गवर्नर सहित) और तीन केंद्र सरकार नियुक्त करती है. MPC साल में छह बार बैठक करती है . MPC के फैसले का सीधा असर आम लोगों की ज़िंदगी पर पड़ता है. इसी के आधार पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें तय होती हैं. अगर MPC रेपो रेट घटाती है तो EMI कम हो सकती है और अगर दरें बढ़ाई जाती हैं तो लोन महंगे हो जाते हैं.
MPC के फैसलों का EMI पर क्या असर होता है ?अगर आरबीआई Repo Rate घटाता है तो बैंक भी अपना कर्ज सस्ता कर देते हैं. इसके चलते होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन सस्ते हो सकते हैं. वहीं, अगर आरबीआई Repo Rate स्थिर रखता है तो EMI में बदलाव नहीं होता है.
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MPC की इस बैठक से क्या उम्मीदें हैं?इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मॉनेटेरी पॉलिसी कमेटी (MPC) अपनी नीति को लेकर न्यूट्रल रुख बनाए रख सकती है. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस ने कहा, "इस महीने खुदरा महंगाई दर और आर्थिक विकास दर (जीडीपी) की नई सीरीज के हिसाब से महंगाई दर और जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी होंगे. इन आंकड़ों में महंगाई दर और जीडीपी मौजूदा स्तरों से ज्यादा रहने का अनुमान है. ऐसा लगता है कि एमपीसी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगी." दिसंबर में हुई आरबीआई की बैठक में रेपो दर को 25 बेसिस प्वाइंट्स घटाकर 5.25 परसेंट कर दिया था. पूरे साल की बात करें तो साल 2025 में आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की है.
नुवामा रिसर्च का क्या कहना है?अर्थशास्त्रियों के अलावा नुवामा रिसर्च ने भी कहा है कि इस बार की एमपीसी की मीटिंग में आरबीआई रेपो रेट को अपरिवर्तित रख सकता है और अपना ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखेगा. न्यूज एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट में नुवामा रिसर्च के हवाले से ये बातें कही गई हैं.
नुवामा रिसर्च भारत की एक प्रमुख ब्रोकरेज और इन्वेस्टमेंट सर्विस कंपनी है. यह कंपनी शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर एनालिसिस रिपोर्ट जारी करती है. इसके अलावा RBI की मौद्रिक नीति, ब्याज दर, महंगाई और ग्रोथ पर अनुमान देती है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल आरबीआई ने कर्ज सस्ता किया है इस कटौती का लाभ अभी भी बैंक अपने ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं. कर्ज सस्ता हुआ है. बॉन्ड यील्ड्स अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं. इस स्थिति को देखते हुए RBI फिलहाल ब्याज दरों में और बदलाव करने के बजाय लिक्विडिटी मैनेजमेंट (बैंकिंग सिस्टम में पैसे की उपलब्धता को संतुलित रखना) पर अधिक ध्यान दे सकता है.
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत-अमेरिका के हालिया ट्रेड डील से विदेशी निवेश भारत में आने की संभावना बढ़ी है. इससे भारतीय रुपये को मजबूती मिल सकती है. इससे RBI को घरेलू स्तर पर लिक्विडिटी को बेहतर ढंग से संभालने की कुछ गुंजाइश मिलती है. मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर रिपोर्ट का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब निचले स्तर से उबरती हुई दिखाई दे रही है. हालांकि यह रिकवरी अभी व्यापक नहीं हुई है. अलग-अलग सेक्टरों में विकास की स्थिति असमान बनी हुई है. वहीं, वैश्विक स्तर पर हालात अब भी अनिश्चित बने हुए हैं. बाज़ारों में भारी उठापटक दिख रही है. इन सभी कारकों को देखते हुए नुवामा रिसर्च का मानना है कि RBI निकट भविष्य में सतर्क और ‘वेट एंड वॉच’ (रुको और देखो) की नीति अपनाए रखेगा.
क्या आरबीआई GDP और महंगाई दर में संशोधन करेगा?अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई की तरफ से विकास और महंगाई दर के अपने पूर्वानुमानों में बदलाव करने की संभावना नहीं है. दिसंबर में जारी नीतिगत घोषणा में, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए अपने जीडीपी के अनुमान को 50 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 6.8% से 7.3% कर दिया. सरकार के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में देश की वास्तविक जीडीपी 7.4% रहने का अनुमान है. वही, अपनी पिछली नीति में, आरबीआई ने 2025-26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (रिटेल महंगाई दर) के अपने अनुमान को 2.6% से घटाकर 2% कर दिया था.
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