भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ और यह उम्मीद जताई जाने लगी कि यूरोपीय देशों से आने वाली शराब सस्ती हो जाएगी. कागजों पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत शराब पर लगने वाला आयात शुल्क 150% से घटकर 40% हो गया. हालांकि शराब प्रेमियों की इस 'खुशी' पर आधिकारिक मुहर लगना अभी बाकी है. उससे पहले सरकार ने झटका दे दिया है. आम बजट 2026 में सरकार ने हर तरह की शराब के लिए TCS दर 2% तय कर दी है. अब तक यह दर 1% थी.
Budget 2026: FTA से विदेशी शराब जब सस्ती होगी तब होगी, अभी तो सरकार ने झटका दे दिया
Budget 2026: TCS यानी ‘टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स’ वह टैक्स है, जो विक्रेता सामान बेचते समय खरीदार से वसूलता है और सरकार के पास जमा करता है. यह सामान की कीमत के ऊपर 'एक्स्ट्रा' जोड़ा जाता है.
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TCS यानी ‘टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स’ वह टैक्स है, जो विक्रेता सामान बेचते समय खरीदार से वसूलता है और सरकार के पास जमा करता है. यह सामान की कीमत के ऊपर 'एक्स्ट्रा' जोड़ा जाता है. पहले शराब, स्क्रैप और मिनरल्स पर TCS की दरें अलग-अलग हो सकती थीं. अब सरकार ने इन तीनों कैटेगरी के लिए एक समान 2% दर तय कर दी है.
इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं. अगर आप 100 रुपये की शराब खरीदते हैं और उस पर TCS दर 2% है, तो दुकानदार आपसे 102 रुपये लेगा.
बीती 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ. दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत स्प्रिट्स जैसे व्हिस्की, वोदका, रम और जिन पर लगने वाला भारी-भरकम आयात शुल्क 150% से घटकर 40% हो गया. इस समझौते के बाद उम्मीद जताई जाने लगी कि यूरोप की वाइन, बियर और व्हिस्की भारत में सस्ती हो सकती है. खासतौर से फ्रांस, इटली, स्पेन और जर्मन में बनी वाइन.
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यूरोपीय देशों से आने वाली शराब अब भी बहुत महंगी नहीं होगी, क्योंकि आयात शुल्क 150% से घटकर 40% हुआ है, जबकि TCS दर 1% से बढ़कर 2% ही हुई है. लेकिन भारत में बनने वाली शराब पर इसका असर जरूर पड़ेगा.
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