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तमिलनाडु में विजय की आंधी 'सन टीवी' के लिए बनी बड़ी मुसीबत, एक झटके में डूबे करोड़ों स्वाहा!

अभिनेता से राजनेता बने सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) शुरुआती चुनावी रुझानों में बहुमत के काफी करीब है

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सन टीवी, सन ग्रुप का हिस्सा है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

अभिनेता से  नेता बने सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) शुरुआती चुनावी रुझानों में बहुमत के काफी करीब है. चुनाव नतीजों में टीवीके की आंधी में डीएमके (DMK) को भारी नुकसान हुआ है. इसका असर सन टीवी के कारोबार पर भी पड़ता दिख रहा है, 4 मई को नतीजों वाले दिन कारोबार के दौरान सन टीवी नेटवर्क के शेयर औंधे मुंह गिर गए. 

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इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में बंबई शेयर बाजार (बीएसई) पर सन टीवी नेटवर्क के शेयर करीब 9.5% तक गिरकर 547.55 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गए. शुरुआती मतगणना के रुझानों से संकेत मिला कि अभिनेता से राजनेता बने सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है. यह प्रदेश की राजनीति में डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को करारा झटका दे सकती है.

सन टीवी, सन ग्रुप का हिस्सा है. इस कंपनी के सर्वेसर्वा मीडिया कारोबारी कलानिधि मारन हैं. कलानिधि मारन तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के पोते और वर्तमान मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के भतीजे हैं. 

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करीब 50 साल से ज्यादा समय से तमिलनाडु की राजनीति में दो द्रविड़ पार्टियों का कब्जा रहा है. एक डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) और दूसरी एआईएडीएमके (आल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कड़गम). डीएमके की स्थापना सीएन अन्नादुरई ने 1949 में की थी. एआईएडीएमके की स्थापना एमजी रामचंद्रन ने डीएमके से अलग होकर साल 1972 में की थी. साल 1967 से राज्य में मुख्य रूप से इन्हीं दोनों पार्टियों का वर्चस्व रहा है.

1990 के दशक से, दोनों में से किसी भी पार्टी ने आम तौर पर स्वतंत्र रूप से चुनाव नहीं लड़ा है. दोनों ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ पीएमके, विदुथलाई चिरुथाइगल कत्ची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन पर भरोसा किया है. 

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बाल कलाकार से लेकर 'थलपति' तक

जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें थलपति विजय के नाम से जाना जाता है , एक बाल कलाकार से दक्षिण भारत के सबसे अधिक कमाई करने वाले सितारों में से एक बन गए हैं. तीन दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर फिल्में कीं. अपने पिता फिल्म निर्माता एस.ए. चंद्रशेखर के शुरुआती मार्गदर्शन में विजय ने सिनेमा में धीरे-धीरे जगह बनाई. उन्होंने 1984 में आई फिल्म 'वेट्री' से 10 साल की उम्र में अभिनय की शुरुआत की थी.

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