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सरकारी बैंकों ने आपके 35 हजार करोड़ RBI को दे दिए, जानिए क्यों?

जिन अकाउंट्स पर कोई दावा नहीं करता, उनके पैसों का क्या होता है?

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10 सालों तक लेन-देन नहीं होने पर अकाउंट निष्क्रिय घोषित हो जाते हैं (फाइल फोटो- PTI)

देश के 12 सरकारी बैंकों ने 35 हजार करोड़ रुपये भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सौंप दिये. ये पैसे आम लोगों के थे, लेकिन पिछले 10 सालों में इन बैंक खातों से किसी ने लेन-देन नहीं किया था. इसे ऐसे भी समझिये कि इन खातों में जमा पैसों पर 10 सालों में किसी ने दावा नहीं किया. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भागवत कराद ने 3 अप्रैल को लोकसभा में ये जानकारी दी. जानकारी RBI की रिपोर्ट के हवाले से दी गई है. RBI के मुताबिक ऐसे अकाउंट्स की संख्या 10 करोड़ 24 लाख से ज्यादा है जिनमें रखे पैसों पर किसी ने दावा नहीं किया. बैंक ऐसे खातों को निष्क्रिय की श्रेणी में डाल देते हैं.

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ये आंकड़े फरवरी 2023 तक के हैं. वित्त राज्य मंत्री ने जो रिपोर्ट पेश की है, उसके मुताबिक सबसे ज्यादा SBI ने 8 हजार करोड़ रुपये आरबीआई को सौंपे, जिस पर लोगों ने 10 सालों में दावा नहीं किया था. बैंक में ऐसे अकाउंट्स की संख्या 2 करोड़ 17 लाख से ज्यादा थी. इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 5,340 करोड़ और कैनेरा बैंक ने साढ़े चार करोड़ आरबीआई को दे दिये.

RBI ने सभी बैंकों को एक मास्टर सर्कुलर जारी किया हुआ है. इसके तहत बैंकों के लिए उन खातों की वार्षिक समीक्षा जरूरी है जिनमें एक साल से ज्यादा समय तक कोई लेन-देन नहीं हुआ हो. बैंक ऐसे ग्राहकों से संपर्क कर लेन-देन नहीं होने के कारण को जानने की कोशिश करता है. वहीं अगर दो साल में अगर कोई लेन-देने नहीं हुआ हो तो बैंकों को नॉमिनी का पता लगाने की सलाह दी गई है. अगर, 10 सालों तक बैंक खाते से कोई ट्रांजैक्शन नहीं होता है तो ऐसे अकाउंट की लिस्ट बनाने का नियम है.

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अनक्लेम्ड डिपोजिट का क्या होता है?

इस तरह के खातों में ट्रांजैक्शन बंद होने के कई कारण हैं. ज्यादातर मामलों में ग्राहकों की मौत वजह होती है. कोई ग्राहक बिना नॉमिनी की जानकारी दिए अकाउंट खुलवाता है, तो उसकी मौत के बाद पैसे अनक्लेम्ड रहते हैं. इसके अलावा भी अलग-अलग कारण हो सकते हैं. 10 सालों के बाद इन अनक्लेम्‍ड पैसों को RBI के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में डाल दिया जाता है. साल 2014 में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन के बाद RBI ने DEAF बनाया था.

सरकारी बैंकों ने जो अन्क्लेम्ड पैसे जमा किये (सोर्स- लोकसभा)

इस डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में उन्हीं अकाउंट के पैसे होते हैं जिन्हें बैंकों ने अनक्लेम्ड घोषित कर दिया हो. इसमें सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, करेंट डिपॉजिट या दूसरे डिपॉजिट अकाउंट भी हो सकते हैं. 2 फरवरी, 2015 को RBI ने एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें बैंकों के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि वे अपनी वेबसाइट पर ऐसे निष्क्रिय अकाउंट को डिस्प्ले करें.

अगर ग्राहक ने बाद में दावा किया तो?

DEAF स्कीम में ये प्रावधान है कि ग्राहक इस फंड में पैसे जमा होने के बाद भी अपने पैसों पर दावा कर सकते हैं. बैंक उन्हें ब्याज के साथ उनके पैसे लौटाएंगे. ग्राहक निष्क्रिय खातों और अन्क्लेम्ड पैसों को अपने बैंक की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं. दावा करने वाले को बैंक ब्रांच में जाकर 'अन्क्लेम्ड डिपोजिट क्लेम फॉर्म' भरना होता है. उन्हें अपने KYC की जानकारी देनी होती है, जिसके बाद वे पैसों पर दावा कर सकते हैं. वेरिफिकेशन के बाद बैंक ग्राहक को पैसे दे देता है. और फिर उस पैसे का रिफंड RBI से लेता है.

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क्या SBI मृतकों के परिवार की मदद नहीं करता?

सरकार ने अनक्लेम्ड खातों पर ये जवाब बीजेपी सांसद कनकमल कटारा के पूछे गए सवालों पर दिया. बीजेपी सांसद कटारा ने सरकार से ये भी पूछा कि क्या SBI के अधिकारी मृतक के परिवार की कोई सहायता नहीं करते और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करने वाले परिवार से संपर्क नहीं करते? इस पर सरकार ने SBI के हवाले से बताया कि बैंक मृतक ग्राहकों के खातों का सेटलमेंट प्राथमिकता के आधार पर करता है.

वीडियो: खर्चा पानी: RBI ने भारत को लेकर ये क्या बोल दिया?

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