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रियल एस्टेट में बरस रहा पैसा, घर खरीदारों को क्या फायदा?

2026 की पहली तिमाही में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी निवेश में पिछले साल (2025) की तुलना में लगभग 66% ज्यादा है. साल 2026 की शुरुआत में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में करीब 1.2 अरब डॉलर (करीब 11 हजार करोड़ रुपये) का प्राइवेट इक्विटी निवेश आया है.

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भारत में बुनियादी ढांचा काफी बेहतर हो रहा है जिसका फायदा रियल एस्टेट सेक्टर को मिल रहा है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

देश में रियल एस्टेट मार्केट में बूम देखने को मिल रहा है. बड़े शहर ही नहीं छोटे शहर (टियर-2, टियर -3) भी रियल एस्टेट के हॉटस्पॉट बनकर उभर रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर में सैविल्स इंडिया की ताजा रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि साल 2026 की शुरुआत में निजी क्षेत्र की तरफ से इस सेक्टर में भारी निवेश आया है.

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रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश पिछले साल (2025) की तुलना में लगभग 66% ज्यादा है. साल 2026 की शुरुआत में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में करीब 1.2 अरब डॉलर (करीब 11 हजार करोड़ रुपये) का प्राइवेट इक्विटी निवेश आया है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लंदन की प्रमुख निवेश कंपनी पर्मिरा ने भारत में अपना पहला निवेश किया है. कंपनी ने व्यावसायिक सेवाओं और रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म SILA में 925 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है.

रियल एस्टेट में PE निवेशक कौन होते हैं?

रियल एस्टेट में PE यानी प्राइवेट इक्विटी निवेशक आम लोगों की तरह छोटे निवेशक नहीं होते, बल्कि ये बड़ी निवेशक होते हैं. इनमें ग्लोबल फंड, पेंशन फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और बड़े इन्वेस्टमेंट हाउस जैसे ब्लैकस्टोन (Blackstone) और पर्मिरा (Permira) वगैरा शामिल होते हैं. ये निवेशक दुनिया भर में रियल एस्टेट में बड़े स्तर पर निवेश करते हैं. 

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रियल एस्टेट सेक्टर में ये प्राइवेट इक्विटी फंड कई तरह से काम करते हैं. ये बड़े प्रोजेक्ट्स, मसलन मॉल, ऑफिस स्पेस और रेजिडेंशियल टाउनशिप में सीधा पैसा लगाते हैं. इससे डेवलपर्स को फंडिंग मिलती है और प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हो पाते हैं. इसके अलावा, ये पहले से तैयार प्रॉपर्टी को खरीदकर उसे किराए पर देते हैं और नियमित रेंटल इनकम कमाते हैं.

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रियल एस्टेट में निवेश क्यों बढ़ा रहा?

काफी समय से चल रहा ट्रेड वॉर और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से दुनियाभर की ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्थाएं भारी अनिश्चितता से जूझ रही हैं. लोगों की कमाई, बचत और निवेश पर असर पड़ा है. शेयर बाजार में उठापटक है. इस सबके बीच रियल एस्टेट सेक्टर फिलहाल निवेश के सबसे पसंदीदा सेक्टर्स में से एक बना हुआ है. जानकार इसकी कई वजहें बताते हैं.

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बूट्स रियलटी के एमडी दीपक राय लल्लनटॉप से बातचीत में बताते हैं, “भारत में बुनियादी ढांचा काफी बेहतर हो रहा है. सरकार का फोकस अब मेट्रो, एक्सप्रेसवे, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और स्मार्ट सिटीज पर है, जिसका सीधा फायदा प्रॉपर्टी सेक्टर को मिल रहा है. टियर-2 और टियर-3 शहरों अब पहले जैसे नहीं रहे. छोटे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे विकास के चलते इन नए शहरों में रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश तेजी से बढ़ रहा है.” 

दीपक का मानना है कि RERA जैसे रेगुलेशन बढ़ने से प्रॉपर्टी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है. पहले इस सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या थी पारदर्शिता की कमी. लेकिन RERA जैसे रेगुलेशन और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम आने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर काफी ऑर्गनाइज्ड हुआ है.

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शेयर बाजार की अनिश्चितता बनाम प्रॉपर्टी की स्थिरता

जानकारों का कहना है कि जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तब निवेशक दूसरे विकल्पों जैसे कि रियल एस्टेट वगैरा की तरफ निवेश बढ़ाते हैं. निवेश सलाहकार विनोद रावल का कहना है कि पिछले कुछ सालों का ट्रेंड देखें तो रियल एस्टेट में लंबी अवधि का निवेश करना फायदा दे रहा है. वहीं, बूट्स के एमडी दीपक राय का कहना है कि शहरी नौकरीपेशा वर्ग आमतौर पर ब्याज दरों को देखकर घर खरीदने का फैसला करता है. फिलहाल ब्याज दरें काफी स्थिर होने से घर खरीदार आगे आ रहे हैं और बिल्डर भी नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं.

बिल्डर, घर खरीदार दोनों की मौज

बूट्स रियलटी के एमडी दीपक राय का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े निवेशकों की एंट्री का फायदा सिर्फ डेवलपर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि आम घर खरीदारों को भी इसका लाभ मिलता है. उन्हें और बेहतर विकल्प मिलते हैं. जब बड़े प्राइवेट इक्विटी निवेशक इस सेक्टर में पैसा लगाते हैं, तो डेवलपर्स के पास पैसे की कमी नहीं रहती. इसका असर यह होता है कि बाजार में नए-नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च होते हैं. बेहतर डिजाइन, आधुनिक सुविधाएं और क्वॉलिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. कुल मिलाकर अब खरीदारों के पास अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से ज्यादा और बेहतर विकल्प मौजूद हैं.

प्राइवेट इक्विटी निवेश का एक बड़ा फायदा यह भी है कि प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है. पहले जहां घर मिलने में सालों लग जाते थे, अब यह जोखिम घटा है. इसके अलावा Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (RERA) के लागू होने से प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन तय होती है. प्रॉपर्टी खरीदारों को कानूनी सुरक्षा मिलती है. इससे रियल एस्टेट में निवेश पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित हो गया है. 

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ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ी

ऑफिस स्पेस रियल एस्टेट में निवेश का सबसे पसंदीदा क्षेत्र बनकर उभर रहा है. नोएडा के कमर्शियल प्रोजेक्ट ग्लोबल बिजनेस स्कवायर के सीईओ के मुताबिक ऑफिस प्रॉपर्टीज सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेगमेंट रहा. पहले जहां वर्क फ्रॉम होम के कारण ऑफिस स्पेस को लेकर अनिश्चितता थी, वहीं अब कंपनियां तेजी से कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुला रही हैं. इससे ऑफिस स्पेस की डिमांड बढ़ गई है. उनका कहना है कि इस सेगमेंट में निवेशकों को स्थिर रेंटल इनकम और लंबी अवधि की ग्रोथ दोनों मिल रही हैं. 

इसके अलावा ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग का असर भी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर साफ दिखाई दे रहा है. जब कंपनियां अपने ऑफिस का विस्तार करती हैं या नए ऑफिस खोलती हैं, तो उस इलाके में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और लोगों की आवाजाही भी बढ़ती है. इससे आसपास के क्षेत्रों में घरों की मांग बढ़ती है, जिससे प्रॉपर्टी की कीमत और किराए दोनों में बढ़ोतरी होती है.

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