नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 1 सितंबर को एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी से जुड़े अपने 25 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी है. NCLT की पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने तीन सदस्यीय बेंच के फैसले पर स्टे लगा दिया. स्पेशल बेंच ने सुभाष चंद्रा को गारंटर के तौर पर डायरेक्टली या इनडायरेक्टली अपनी किसी भी प्रॉपर्टी को बेचने या किसी को सौंपने से रोक दिया है.
सुभाष चंद्रा प्रॉपर्टी नहीं बेच सकते और 6.25 करोड़ वाला प्लान भी... NCLT ने दे दिया तगड़ा झटका
पूर्व राज्यसभा सांसद Subhash Chandra ने 22,006.57 करोड़ रुपये के मंजूर दावे के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का प्रपोजल दिया. ये दावे उन पर्सनल गारंटी से जुड़े हैं, जो उन्होंने कई कंपनियों द्वारा लिए गए लोन के लिए दी थीं. अब NCLT का नया फैसला आया है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, NCLT की स्पेशल बेंच में प्रेसिडेंट जस्टिस (रिटायर्ड) अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल, ज्यूडिशियल मेंबर बच्चू वेंकट बलराम दास और महेंद्र खंडेलवाल, और टेक्निकल मेंबर अतुल चतुर्वेदी और रवींद्र चतुर्वेदी शामिल थे. बेंच ने कहा कि पिछले फैसले को लेकर कोई स्पष्ट बहुमत वाली राय नहीं है. इसलिए, बेंच ने मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का फैसला किया. बेंच ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है.
क्या है पूरा मामला?यह विवाद जी मीडिया ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के एक रिपेमेंट प्लान से जुड़ा है. इंडियाबुल्स फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 95 के तहत सुभाष चंद्रा के खिलाफ पर्सनल इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू की थी. इसी मामले में चंद्रा ने 22,006.57 रुपये करोड़ के क्लेम के बदले 6.25 करोड़ चुकाने का प्रस्ताव दिया.
3 सितंबर 2025 को NCLT की दो सदस्यीय बेंच में इस रिपेमेंट प्लान पर फैसला नहीं हो पाया. बेंच में ज्यूडिशियल मेंबर अनिल कुमार भारद्वाज और टेक्निकल मेंबर रीना सिन्हा पुरी शामिल थीं. स्प्लिट ऑर्डर रहा.
अनिल कुमार ने प्लान मंजूर तो किया, लेकिन सिर्फ उन क्रेडिटर्स के लिए, जो इस प्लान से सहमत थे. रीना सिन्हा ने पूरा प्लान ही खारिज कर दिया. मामला तीसरे मेंबर- ज्यूडिशियल मेंबर नीलेश शर्मा के पास पहुंचा. 25 अगस्त 2026 को उन्होंने सभी क्रेडिटर्स के लिए पूरे प्लान को मंजूरी दे दी.
31 अगस्त 2026 को मामला वापस दोनों मेंबर तक पहुंचा. उन्होंने कहा कि तीसरे मेंबर की राय से भी बहुमत राय नहीं निकली. तीनों फैसले अलग-अलग थे, तो मामला NCLT प्रेसिडेंट के पास भेज दिया गया. अब NCLT ने तीनों सदस्यीय बेंच के फैसले पर रोक लगा दी है.
पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा ने 22,006.57 करोड़ रुपये के मंजूर दावे के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का प्रपोजल दिया. ये दावे उन पर्सनल गारंटी से जुड़े हैं, जो उन्होंने कई कंपनियों द्वारा लिए गए लोन के लिए दिए थे.
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सुभाष चंद्रा ने दावा किया कि उन्होंने खुद सीधे तौर पर कोई उधार नहीं लिया. केवल, कंपनियों के कर्ज पर अपनी गारंटी दी. कुछ लेनदार इस प्लान के खिलाफ हैं, क्योंकि मंजूर किए गए दावे के बदले, जो रकम मिलेगी, वो दावों का महज 0.03 फीसदी है.
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