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सुभाष चंद्रा का 6.5 करोड़ में लोन निपटाने का प्लान फंसा, NCLT ने अब ये फैसला ले लिया

Subhash Chandra Loan Settlement: सुभाष चंद्रा ने NCLT के सामने 22,006.57 करोड़ रुपये के दावे के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का रिपेमेंट प्लान दिया था. कुछ लेनदार इस प्लान के खिलाफ हैं, क्योंकि मंजूर किए गए दावे के बदले, जो रकम मिलेगी, वो दावों का महज 0.03 फीसदी है. वहीं सुभाष चंद्रा ने दावा किया कि खुद सीधे तौर पर कोई उधार नहीं लिया. केवल, कंपनियों के कर्ज पर अपनी गारंटी दी.

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एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा. (Sansad TV/Rajyasabha TV)

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  • नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सुभाष चंद्रा के 6.25 करोड़ रुपये में 22,006.57 करोड़ रुपये के दावों को चुकाने के रिपेमेंट प्लान को अमल में लाने की प्रक्रिया तय करने के लिए पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच गठित की।
  • सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को लेकर NCLT की दो सदस्यीय बेंच में मतभेद और तीन सदस्यीय बेंच की जांच के बाद भी अंतिम आदेश नहीं दिया जा सका, जबकि LIC हाउजिंग फाइनेंस ने NCLAT में इसकी चुनौती दी।
  • 5 सदस्यीय स्पेशल बेंच 1 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करेगी और उसके बाद इस विवादित रिपेमेंट प्लान पर अंतिम फैसला आने की संभावना है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होगी।

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा का 6.25 करोड़ रुपये में 22,006.57 करोड़ रुपये के दावे निपटाने का प्लान अटक गया है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सदस्य उनके प्लान को अमलीजामा पहनाने का तरीका तय नहीं कर सके. ऐसे में NCLT प्रेसिडेंट ने एक पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच गठित की है, जो सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी केस पर फैसला देगी.

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लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, NCLT के प्रेसिडेंट जस्टिस (रिटायर्ड) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने पांच सदस्यीय बेंच में खुद को रखा है. उनके अलावा ज्यूडिशियल मेंबर बचु वेंकट बलराम दास और महेंद्र खंडेलवाल, और टेक्निकल मेंबर अतुल चतुर्वेदी और रविंद्र चुतर्वेदी बेंच में शामिल हैं. स्पेशल बेंच 1 सितंबर को सुबह 10:15 बजे इस मामले पर सुनवाई करेगी.

क्या है पूरा मामला?

राज्यसभा के पूर्व सांसद सुभाष चंद्रा ने NCLT के सामने 22,006.57 करोड़ रुपये के दावे के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का रिपेमेंट प्लान दिया था. NCLT की दो सदस्यी बेंच- ज्यूडिशियल मेंबर अशोक कुमार भारद्वाज और टेक्निकल मेंबर रीना सिन्हा पुरी इस मामले को देख रही थी. दोनों सदस्यों ने एक-दूसरे के उलट फैसला दिया. अशोक कुमार भारद्वाज ने एक हद तक इस प्लान को मंजूरी दी, जबकि रीना सिन्हा पुरी ने प्लान पूरी तरह खारिज कर दिया.

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स्प्लिट वर्डिक्ट था, तो मामले में तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा की एंट्री हुई. 25 अगस्त 2025 को तीसरे मेंबर नीलेश ने राय दी कि प्लान को मंजूरी देनी चाहिए. NCLT से सुभाष चंद्रा के प्लान को मंजूरी मिल गई. मगर एक पेंच फंस गया. नीलेश की राय बाकी दोनों से अलग थी. कहा गया कि नीलेश ने एक स्वतंत्र आदेश पारित किया. 31 अगस्त को NCLT की तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि इसलिए रिपेमेंट प्लान पर फाइनल ऑर्डर नहीं दिया जा सकता.

इस बीच, LIC हाउजिंग फाइनेंस लिमिटेड ने रिपेमेंट प्लान को मिली मंजूरी को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी है. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने 31 अगस्त को तुरंत सुनवाई की मांग की. उनकी अपील पर भी 1 सितंबर को सुनवाई होगी.

सुभाष चंद्रा का रिपेमेंट प्लान क्या है?

पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा ने 22,006.57 करोड़ रुपये के मंजूर दावे के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का प्रपोजल दिया. ये दावे उन पर्सनल गारंटी से जुड़े हैं, जो उन्होंने कई कंपनियों द्वारा लिए गए लोन के लिए दी थीं.

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सुभाष चंद्रा ने दावा किया कि खुद सीधे तौर पर कोई उधार नहीं लिया. केवल, कंपनियों के कर्ज पर अपनी गारंटी दी. कुछ लेनदार इस प्लान के खिलाफ हैं, क्योंकि मंजूर किए गए दावे के बदले, जो रकम मिलेगी, वो दावों का महज 0.03 फीसदी है.

सुभाष चंद्रा की सफाई

सुभाष चंद्रा ने कहा कि 22,006.57 करोड़ रुपये के आंकड़े ने मामले के बारे में उनके बारे में 'गलत धारणा' पैदा की है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने बैंकों या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से निजी तौर पर पैसे उधार नहीं लिए थे. उन्होंने X पर एक बयान में कहा, "मेरा उधार 0 रुपये है."

उन्होंने कहा कि जब कंपनियों को लोन मिला था, तब लगभग 4,800 करोड़ रुपये की गारंटी दी गई थी. बाकी गारंटी उधार लेने वालों के डिफॉल्ट करने के बाद दी गई थीं.

सुभाष चंद्रा ने आंकड़े बताए

सुभाष चंद्रा ने कहा कि कंपनियों ने लेनदारों से 4,808 करोड़ रुपये उधार लिए थे और 3,803 करोड़ रुपये चुका दिए थे, जिससे लगभग 998 करोड़ रुपये का बकाया रह गया. मगर, लेंडर्स ने पर्सनल गारंटर के तौर पर उनके खिलाफ 5,311 करोड़ रुपये के क्लेम फाइल किए. उनके मुताबिक, इनमें से 1,049 करोड़ रुपये के क्लेम बाद में सेटल या भुगतान कर दिए गए, जिससे बाकी क्लेम घटकर 4,262 करोड़ रुपये रह गए.

यह भी पढ़ें: 22 हजार करोड़ के कर्ज में 6 करोड़ लौटाएंगे! सुभाष चंद्रा के 'रीपेमेंट प्लान' पर भड़क गए बैंक

सुभाष चंद्रा ने कहा कि क्लेम इसलिए ज्यादा थे, क्योंकि उनकी पर्सनल गारंटी में कई कंपनियों के लिए गए लोन शामिल थे. कुछ मामलों में एक ही लेंडर ने एक से ज्यादा कंपनियों को अलग-अलग लोन दिए थे, और चंद्रा ने हर लोन की गारंटी दी थी.

सुभाष चंद्रा की अपील

सुभाष चंद्रा ने कर्ज देने वालों से कहा कि जो भी रकम बाकी बची है, उसका हिसाब-किताब सीधे उन कंपनियों के साथ करें, जिन्होंने पैसा उधार लिया था. अब NCLT की पांच सदस्यीय बेंच रीपेमेंट प्लान और तीन अलग-अलग राय की जांच करेगी. उसके बाद सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान पर कुछ सामने आएगा.

वीडियो: NCLT विवाद को लेकर मुकेश अंबानी पर क्या बोल गए सुभाष चंद्रा

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