नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण अब तक 955 लोगों की जान जा चुकी है. हज़ारों लोग लापता हैं और कई घर मलबे में तब्दील हो गए. मगर इस बीच एक घर ऐसा भी है जो इतनी भीषण बाढ़ में भी टिका रहा. उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर अब खूब वायरल है. लल्लनटॉप के पत्रकार विकास वर्मा ने इस घर के मालिक से बात की. उन्होंने डिटेल में बताया कि 26 अगस्त को क्या-क्या हुआ था.
नेपाल का ये घर भयंकर बाढ़ में भी कैसे टिका रहा? मालिक ने खुद बताई पूरी कहानी
Nepal flash floods: सोशल मीडिया पर एक हरे रंग का घर वायरल है जो भीषण नेपाल बाढ़ के बाद भी खड़ा रहा. अब उस घर के मालिक ने लल्लनटॉप से बात करते हुए पूरी कहानी बताई है.

सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘हरे रंग वाला घर’ बता रहे हैं. ये नेपाल के नुवाकोट जिले में है और त्रिशूली नदी के किनारे है. घर के मालिक प्रकाश ने बताया कि मकान करीब 35-40 साल पुराना है. इसको बनाने में करोड़ों खर्च हुए थे. उन्होंने बताया कि बाढ़ के वक़्त परिवार के सभी लोग घर की छत पर चले गए थे. उनका केवल एक बेटा घर पर नहीं था. वो स्कूल गया हुआ था.
घर के मालिक ने क्या बताया?प्रकाश बताते हैं कि उस दिन परिवार के पांच लोग और एक पड़ोसी घर पर मौजूद थे. जब बाढ़ की जानकारी मिली तब प्रकाश अपनी दुकान पर थे. फिर वो भागते हुए अपने घर पहुंचे. घर आते ही उन्होंने पहले बाहर निकलने की कोशिश की. मगर उनके सामने एक गाड़ी पूरी पलट गई. फिर वो सबको लेकर घर के अंदर चले गए. और चौथे फ्लोर पर सबसे ऊपर वाली छत पर जा पहुंचे. बाढ़ के बाद पूरा परिवार सुरक्षित बच गया और अब वे काठमांडू में हैं.
उन्होंने बताया कि 1.5 घंटे बाद जब पानी थोड़ा थम गया गया तब एक पाइप के ज़रिए घर के सभी लोगों को बाहर निकाला गया. पाइप को एक दूसरे घर से जोड़ा गया था. प्रकाश के मुताबिक, बाढ़ में उनका करीब दो चार करोड़ का नुकसान हो गया है. घर में गाड़ी और बाइक भी थी, जो बाढ़ में बह गई. अब यहां रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है.
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घर कैसे बचा रहा?प्रकाश का कहना है कि चूंकि उनका घर बहुत पुराना है तो उसमें अच्छी क्वालिटी की सीमेंट इस्तेमाल हुई थी. नदी के किनारे घर होने के कारण नींव का खास ध्यान रखा गया था.
दूसरी तरफ Architecture Presentation नाम के एक X अकाउंट ने इस वीडियो का टेक्निकल एनालिसिस किया है. इसके मुताबिक, इस घर में रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट का मजबूत फ्रेम इस्तेमाल हुआ था. इसमें सरिये घर के कॉलम, बीम और नींव को आपस में जोड़ते हैं और पूरे घर को एक मजबूत ढांचे में बांध देते हैं. इसलिए जब बाढ़ आई तब पूरा ढांचा एक साथ दबाव झेल रहा था.
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