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DU के 91 कॉलेज, हॉस्टल सिर्फ 20 में, सत्य निकेतन हादसे ने सबकी पोल खोल दी

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के 91 कॉलेजों में सिर्फ 20 कॉलेजों में हॉस्टल सुविधा बताई जाती है. इनमें भी कई कॉलेजों में हॉस्टल सीटें कॉलेज के छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले बेहद कम हैं, जिसके चलते बाहर से आने वाले छात्रों को प्राइवेट PG या किराए के कमरों का सहारा लेना पड़ता है. आइए DU के हॉस्टल्स का हाल जानते हैं.

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डीयू के कॉलेजों में स्टूडेंट्स की संख्या अधिक है, जबकि हॉस्टल न के बराबर (PHOTO- India Today)

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  • दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने कॉलेजों से नए हॉस्टल बनाने के लिए संभावनाएं तलाशने और योजना तैयार करने को कहा है, ताकि छात्रों के लिए आवास सुविधा बढ़ाई जा सके।
  • दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकांश कॉलेजों में हॉस्टल की कमी है, जिसके कारण छात्र प्राइवेट PG में रहने को मजबूर हैं, यह स्थिति सत्य निकेतन में हुई दुर्घटना के बाद अधिक सुर्खियों में आई।
  • दिल्ली सरकार ने UGC से हॉस्टल व्यवस्था की समीक्षा के लिए रिपोर्ट मांगी है और दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

दिल्ली के सत्य निकेतन (Satya Niketan PG) में हुए पेइंग गेस्ट (PG) हादसे ने स्टूडेंट सेफ्टी और सुविधाओं पर सवाल खड़े किए हैं. सत्य निकेतन हादसे में ज‍िन 7 स्टूडेंट्स की मौत हुई, उनमें कुछ छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में पढ़ते थे. लेक‍िन कॉलेज में हॉस्टल फैसिलिटी नहीं मिलने के कारण वो कैंपस के पास ही प्राइवेट पीजी में रहते थे. ऐसे में ये सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल कम क्यों है, और इस समस्या को ठीक करने के लिए क्या किया जा सकता है?

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सभी कॉलेजों में हॉस्टल फैसिलिटी नहीं

दिल्ली यूनिवर्सिटी में टोटल 91 कॉलेज हैं. पर इनमें से सिर्फ 20 कॉलेज में हॉस्टल की फैसिलिटी है. यानी 71 कॉलेज ऐसे हैं, जहां स्टूडेंट के लिए कॉलेज लेवल पर हॉस्टल फैसिलिटी ही नहीं है. यूनिवर्सिटी के नॉर्थ और साउथ कैंपस में हॉस्टल की फैसिलिटी मौजूद है, लेकिन कुल मिलाकर करीब 7000 ही हॉस्टल सीटें हैं. ये नंबर डीयू में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले बहुत कम है.

DU के कॉलेजों की सच्चाई ने हिला दिया!

साउथ कैंपस में मैत्रेयी कॉलेज ने 2022 में अपने हॉस्टल का उद्घाटन किया. इसकी क्षमता केवल 103 स्टूडेंट्स की है. जबकि कॉलेज में टोटल 4,000 से अधिक छात्राएं हैं. साउथ कैंपस के ही आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में करीब 5000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. कॉलेज में करीब 18 कोर्सेज की पढ़ाई होती है. पर कॉलेज के पास न तो बॉयज हॉस्टल है और न ही गर्ल्स हॉस्टल. सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के हादसे में जिन छात्रों की मौत हुई, उनमें अर्पित और आदित्य आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज के छात्र ही थे.

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साउथ कैंपस के ही श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में बॉयज और गर्ल्स, दोनों के लिए हॉस्टल फैसिलिटी मौजूद है. लेकिन यहां भी हॉस्टल की संख्या, छात्रों की संख्या के मुकाबले बेहद कम है. कॉलेज में करीब 4346 छात्र पढ़ते हैं और 21 कोर्स हैं. वहीं दोनों हॉस्टल की कुल क्षमता सिर्फ 150 सीटों की बताई जाती है. यानी हजारों छात्रों के लिए सिर्फ 150 हॉस्टल सीटें. छात्रों के मुताबिक साउथ कैंपस के जिन कॉलेज में हॉस्टल फैसिलिटी नहीं है, उसमें मोतीलाल नेहरू कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, डी.सी.ए.सी. कॉलेज, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज आते हैं.

छात्र बोले- 'कॉलेज की बहुत जमीन है, फिर भी नहीं बनाते हॉस्टल'

मिरांडा हाउस में करीब 5,375 छात्र हैं, जबकि हॉस्टल में लगभग 370 छात्रों के रहने की क्षमता है. 2026-27 में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए सिर्फ करीब 90 हॉस्टल सीटें है. वही किरोड़ी मल कॉलेज, हिंदू कॉलेज, SRCC,  मिरांडा हाउस, और लेडी श्री राम कॉलेज को देखें तो करीब 24,350 छात्रों के मुकाबले हॉस्टल की कुल क्षमता 1,140 है. यानी इन कॉलेज में उनके हॉस्टल मिलाकर कुल छात्र संख्या के करीब 4.7 फीसदी को ही जगह दे पाते हैं. इन कॉलेजों में पढ़ने वाले कई ऐसे छात्र जो दिल्ली के बाहर से आते हैं. कैंपस हॉस्टल ना मिलने पर उन्हें PG या फिर किराए के कमरे में रहना पड़ता है. ऐसे कई छात्रों से लल्लनटॉप की टीम ने बात की. एक छात्र ने कहा,

‘मैं ARSD में पढ़ता हूं. हमारे कॉलेज में काफी जमीन खाली है. चट्टानें और झाड़ियां हैं. इतनी जगह है कि आराम से हॉस्टल बनाए जा सकते हैं. हम तो कमरा भी ले लेते हैं. लेकिन जिनके पास उतने पैसे नहीं हैं कि बाहर कमरा लें, उन्हें मजबूरी में PG में रहना पड़ता है.’

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एक ओर छात्र ने कैंपस में हॉस्टल ना मिलने की समस्या के बारे में बताया. 

वाइस चांसलर का पुराना वीडियो वायरल

इस बीच डीयू के वाइस चांसलर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें वो एक इंटरव्यू के दौरान हॉस्टल के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर कह रहे हैं कि सब छात्रों को हॉस्टल देना आवश्यक भी नहीं है और संभव भी नहीं है. हालांकि नए हॉस्टल बनाने का काम चल रहा है.

हादसे के बाद इसी सप्ताह के शुरुआत में डीयू के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने एक बैठक की. इसमें सभी कॉलेजों से हॉस्टल का स्टेटस पता किया. कॉलेजों ने अब छात्रों को स्टे और PG के बारे में जानकारी देने के निर्देश जारी किए हैं.

डीयू ने प्रिंसिपलों से अपने-अपने कॉलेजों में नए हॉस्टल के निर्माण की संभावनाएं तलाशने को कहा है. इसके लिए कॉलेजों को उपलब्ध जगह की पहचान करने के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन का आकलन करना होगा. इसके अलावा केंद्र और दिल्ली सरकार की उपलब्ध योजनाओं, वित्तीय मदद और अन्य संसाधनों की भी पड़ताल करने को कहा गया है. जिन कॉलेजों में हॉस्टल निर्माण की संभावना होगी, वहां आवश्यकताओं का आकलन कर योजना तैयार करने को कहा गया है.

(यह भी पढ़ें: दुकान बड़ी करने के चक्कर में गिरी बिल्डिंग... सत्य निकेतन हादसे में हुआ खुलासा)

दरअसल सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने UGC से डीयू के हॉस्टल सिस्टम को लेकर रिपोर्ट मांगी थी. वहीं हॉस्टल का मुद्दा हाईकोर्ट भी पहुंचा है. दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में भी डीयू के सभी कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाओं की मांग उठाई गई है. अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी से इस मामले में जवाब मांगा है. अब देखना होगा कि कागज में हॉस्टल बनाने की तेज होती कवायद, जमीन पर कब उतरती है. 

वीडियो: सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरी, सैटेलाइट स्टडी में क्या मिला?

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