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शेयर बाजार में भूचाल! निवेशकों के डूबे 5 लाख करोड़, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर भारत के शेयर बाजार मार्केट पर भी पड़ा है. बुधवार को ओपनिंग के साथ ही मार्केट में भारी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 750 अंक की गिरावट देखने को मिली.

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शुरुआती कारोबार में इंफोसिस के शेयरों में करीब 3% की गिरावट आ गई (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • भारतीय शेयर बाजार में 2 सितंबर को सेंसेक्स 750 अंक गिरकर 76,200 के स्तर पर और निफ्टी 200 अंक से अधिक गिरकर 23,800 के नीचे आ गया।
  • मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, तेल की बढ़ती कीमतें और उभरती बॉन्ड यील्ड ने निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ाई।
  • शेयर बाजार में गिरावट से बीएसई के कुल मार्केट कैप में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जिससे निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी हो गया है।

मिडिल ईस्ट संकट का असर भारतीय शेयर मार्केट पर नजर आ रहा है. बुधवार, 2 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, तेल की बढ़ती कीमतों और दूसरी वजहों से से निवेशकों में घबराहट है. सेंसेक्स और निफ्टी में सुबह करीब 1% की गिरावट देखने को मिली.

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आज (2 सितंबर) शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (Sensex) 750 अंक से अधिक गिरकर 76,200 के निचले स्तर पर आ गया. इसी तरह निफ्टी (Nifty) 50 में 200 अंक से ज्यादा की टूटकर 23,800 के निचले स्तर पर पहुंच गया.

इन शेयरों में भारी गिरावट 

शुरुआत में सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट इंफोसिस के शेयरों में देखने को मिली. यह गिरावट करीब 3% दर्ज की गई. वहीं टीसीएस, एचसीएलटेक, इंडिगो और एमएंडएम के शेयरों में भी करीब 2% की गिरावट आई. 

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एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), आईटीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में 1% से अधिक की गिरावट आई. सन फार्मा और अडानी पोर्ट्स के शेयर मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में रहे.

वहीं, निफ्टी आईटी सबसे अधिक नुकसान झेलने वाला सेक्टर रहा. इनमें 2% से अधिक की गिरावट आई. निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी में भी लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और कई अन्य क्षेत्रीय सूचकांकों में 1% की गिरावट आई.

निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे!

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट के कारण खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर बीएसई (BSE) के कुल मार्केट कैप में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई. इस गिरावट के साथ बीएसई का मार्केट कैप घटकर 488 लाख करोड़ रुपये रह गया. मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड शेयरों की कुल वैल्यू को कहा जाता है.

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क्यों औंधे मुंह गिरा बाजार?

शेयर बाजार में तेज गिरावट की कई वजहें हैं.  ईरान-अमेरिका के बीच लड़ाई फिर से तेज हो गई है. अमेरिका और ईरान के बीच एक सितंबर की रात से भीषण हवाई हमले शुरू हो गए हैं. अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए. ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है. अमेरिकी हमलों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से बाधित होने की संभावना है. इस रास्ते से दुनिया का करीब 20 परसेंट तेल और गैस ट्रांसपोर्ट होता है. 

बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह ये है कि कच्चे तेल की कीमतें फिर से 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड में लगातार इजाफा हुआ है. इसकी वजह से यील्ड कई साल की ऊंचाई पर पहुंच गई है. 

वीके वेल्थवाइज के रिसर्च एनालिस्ट सीए वत्सल खेमका लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि सबसे बड़ी चिंता जापान की बॉन्ड यील्ड को लेकर है. 1 सितंबर तक जापान की 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 3% के स्तर पर पहुंच गई है. यह लंबे समय के लिहाज से काफी ऊंचा स्तर है. इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ता है.

वत्सल खेमका आगे बताते हैं कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा रहना और रुपये में कमजोरी भी भारतीय बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है. जब अमेरिका में बॉन्ड पर आकर्षक रिटर्न मिलता है, तो विदेशी निवेशकों (FIIs) के लिए अमेरिकी डेट में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद हो जाता है. इसका असर भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के रूप में देखने को मिल सकता है. रुपये में कमजोरी इस दबाव को और बढ़ाती है.

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निवेशकों को क्या सलाह है?

वीके वेल्थवाइज के रिसर्च एनालिस्ट सीए वत्सल खेमका ने लल्लनटॉप को बताया कि बाजार में आई इस गिरावट पर निवेशकों को घबराने के बजाय धैर्य रखने की जरूरत है . निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए. अतीत में देखें तो बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल कई बार देखने को मिला है. लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से किए गए निवेश ने अक्सर फायदा दिया है.

वत्सल खेमका का मानना है कि निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल और लंबी अवधि के लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए. बाजार में गिरावट हमेशा सिर्फ जोखिम पैदा नहीं करती बल्कि कई बार यह अच्छे निवेश के लिए मौके भी लेकर आती है.

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