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गोल्ड मोनटाइजेशन स्कीम में बड़े बदलाव की तैयारी, इस बार ज्वेलर्स को मोटा कमीशन मिलेगा?

World Gold Council के अनुमान के मुताबिक भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास वर्तमान में लगभग 25,000 टन सोना है

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माना जाता है कि भारत में मंदिरों और परिवारों के पास 5 ट्रिलियन डॉलर कीमत का सोना है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • सरकार अपनी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में बड़ा बदलाव करते हुए इस बार इसकी जिम्मेदारी ज्वेलर्स को सौंपने जा रही है, जिसकी घोषणा इस महीने के अंत तक होने की संभावना है।
  • भारत में मंदिरों और परिवारों के पास 25,000 से 50,000 टन सोना जमा है, जो आर्थिक विकास में योगदान नहीं दे पा रहा है, इसलिए सरकार ने पुरानी योजना को संशोधित करने का निर्णय लिया।
  • नयी योजना के तहत ज्वेलर्स सोना रिफाइनर्स को सौंपेंगे और लगभग 1% कमीशन प्राप्त करेंगे, जिससे सोने के उपयोग में वृद्धि और इम्पोर्ट में कमी आने की संभावना है।

सरकार अपनी प्रमुख गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) में बड़ा बदलाव करने जा रही है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरानी स्कीम से ये स्कीम काफी अलग होगी. सरकार इस बार इस योजना की जिम्मेदारी ज्वेलर्स को सौंप रही है. रिपोर्ट बताती है कि इस महीने के अंत में यह स्कीम होने की उम्मीद है.

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सरकार ये स्कीम दोबारा क्यों लाना चाहती है?

देशभर के मंदिरों और परिवारों में सोने का विशाल भंडार है. इतना सोना है जितना किसी देश के लोगों के पास नहीं है. इस सोने की कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है. लेकिन यह सोना देश की तरक्की में योगदान नहीं दे पाता है. यह न तो शेयर हैं, न नकदी और न ही क्रिप्टोकरेंसी.  

World Gold Council के अनुमान के मुताबिक भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास वर्तमान में लगभग 25,000 टन सोना है. उद्योग जगत के कुछ अनुमान इस आंकड़े को 30,000 टन के करीब बताते हैं. इतना ही नहीं कुछ स्टडीज कहती हैं कि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास जमा सोना 50,000 टन तक पहुंच सकता है.

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सर्राफा कारोबारी मालामाल होंगे?

जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि सरकार जल्द ही गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम फिर से शुरू कर सकती है. इस बार ये जिम्मेदारी ज्वेलर्स उठाएंगे. उनका कहना है कि उन्हें इससे जुड़ी एक-दो मंजूरियां मिलने का इंतजार है.

उन्होंने कहा कि यह योजना घरों में बेकार पड़े सोने के गहनों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने में मदद करेगी. साथ ही आभूषण उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में जुटाए गए सोने का इस्तेमाल करने से भारत के गोल्ड इम्पोर्ट में सीधा कमी आएगी. गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में लोगों को बैंकों में सोना जमा करने पर ब्याज मिलता हैं. वहीं सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि उन्हें एक परसेंट कमीशन मिल सकता है. 

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इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) द्वारा सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के मुताबिक, ज्वेलर्स ग्राहकों का सोना रिफाइनर्स को सौंपेंगे और रिफाइनर्स से लगभग 1% कमीशन पाएंगे.

आईबीजेए के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी ने ईटी से कहा कि ज्वेलर्स ग्राहकों से जिस सोने को अपने पास संभालकर रखेंगे उन्हें इस सोने की कीमत पर करीब 1% कमीशन मिलने की संभावना है.

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