4 अगस्त को फुकेट-दिल्ली फ्लाइट अचानक से 300 फीट नीचे आ गई थी. इसके चलते 17 यात्री और कुछ क्रू मेंबर घायल हो गए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घायल यात्रियों में से दो का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है. कुछ लोगों को फ्रैक्चर और सिर में चोटें आई हैं.
एयर इंडिया फ्लाइट में घायल होने वाले यात्रियों को मिलेंगे 2 करोड़? मुआवजे का पूरा गुणा-गणित जान लें
एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट के अचानक 300 फीट नीचे आ जाने की वजह से विमान में सवार कई यात्री और क्रू मेंबर्स घायल हो गए थे. अब सवाल है कि क्या इन घायल यात्रियों को कंपनी या सरकार की तरफ से कोई मुआवजा मिलेगा?

इस बीच, जांच में पता चला है कि एयर इंडिया की इस फ्लाइट संख्या AI 2379 के पायलट-इन-कमांड ने गांजा (मारिजुआना) पी रखा था. इस पायलट का कन्फर्मेटरी लैब टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आया है. एक और सवाल उठ रहा है कि इस सफर में घायल यात्रियों को कितना मुआवजा मिलेगा? यह मुआवजा कंपनी देगी या फिर सरकार की तरफ से मिलता है?
कितना मुआवजा पाने का अधिकार?बिजनेस टुडे में छपी एक रिपोर्ट में विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ और सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के फाउंडर अमित सिंह ने इस बारे में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि हवाई यात्रा के दौरान घायल होने वाले यात्रियों को इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के अनुबंध 13 (Annex 13) के तहत कंपनसेशन का हक है. इस अनुबंध के तहत, घायल होने हर यात्री 1.8 करोड़ रुपये तक का मुआवजा पाने का अधिकार है.
मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने इस घटना की जांच एयरक्रॉफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो को सौंपी है. यात्रियों को मिलने वाला मुआवजा इस पर निर्भर करेगा कि जांच एजेंसी इसे गंभीर घटना मानती है या एक्सीडेंट. यह वर्गीकरण काफी मायने रखता है.
एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट अमित सिंह का कहना है, "यह एक दुर्घटना थी और इसे गंभीर घटना नहीं माना जा सकता. इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइनजेशन के एनेक्स 13 में यह साफ है कि अगर किसी एक व्यक्ति को गंभीर चोट लगती है, तो ही घटना को दुर्घटना माना जाता है. घायल शख्स 48 घंटे से ज्यादा समय तक अस्पताल में भर्ती रहता है या कोई हड्डी टूट जाती है या काफी खून बहता है, तो इसे दुर्घटना माना जा सकता है."
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एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट अमित सिंह आगे कहते हैं कि भारत में पहले से एक उदाहरण मौजूद है. वे 7 जून 2021 को विस्तारा की उड़ान UK775 (मुंबई–कोलकाता) का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि इस विमान को उतरते समय तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था. इसमें कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे. हालांकि किसी की मौत नहीं हुई थी.
इसके बावजूद भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत काम करने वाले एयरक्रॉफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने इसे एक्सीडेंट ही माना था. अब विस्तारा का एयर इंडिया में विलय हो चुका है.
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रिपोर्ट बताती है कि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत, प्रत्येक घायल यात्री को मुआवजे का अधिकार है. इसके तहत, सख्त दायित्व (Strict Liability) लागू होगा और एयरलाइन की गलती साबित करने की जरूरत नहीं होगी. हर यात्री को करीब 1.8 करोड़ रुपये तक मुआवजा मिल सकता है.
इसके ऊपर मुआवजे की कोई सीमा नहीं है, जब तक कि एयर इंडिया यह साबित न कर दे कि उसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई थी. दावा करने के लिए दो साल का समय है. इसलिए अपने अस्पताल से जुड़े सभी रिकॉर्ड अभी से संभालकर रखें. एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट अमित सिंह ने ये जानकारी अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है.
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