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क्या टीवी का खेल खत्म होने वाला है? 50 से ज्यादा चैनलों ने लाइसेंस सरेंडर क्यों किया?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक भारत में फिलहाल 916 टीवी चैनल डाउनलिंकिंग के लिए मौजूद हैं

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बीते तीन सालों में 50 से ज्यादा टीवी चैनलों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)

क्या टीवी का बुरा दौर शुरू हो चुका है? क्या टीवी मीडियम बंद होने की कगार पर है? भले ही अभी ये कयास भर हों लेकिन टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि टीवी इंडस्ट्री के लिए आने वाला समय बुरा साबित होने वाला है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर बताती है कि बीते तीन सालों में 50 से ज्यादा टीवी चैनलों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि टीवी के दर्शक तेजी से कनेक्टेड टीवी और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर डिजिटल कंटेंट का रुख कर रहे हैं. इसके चलते टीवी चैनलों की विज्ञापन से होने वाली कमाई घट रही है. कनेक्टेड टीवी वह टीवी होता है जो इंटरनेट से जुड़ा होता है. इस तरह के टीवी पर  केबल या DTH के लोग OTT ऐप्स, ऑनलाइन वीडियो और डिजिटल कंटेंट सीधे देख सकते हैं.

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इन कंपनियों ने वापस किए लाइसेंस

इस रिपोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से जानकारी दी गई है कि जियो स्टार (JioStar),  जी इंटरटेनमेंट (Zee Entertainment Enterprises), इनाडु टीवी (Eenadu Television), NDTV और ABP Network जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने अपने कई टीवी लाइसेंस वापस किए हैं. इसके अलावा, Culver Max Entertainment ने भी 26 डाउनलिंकिंग परमिशन सरेंडर की हैं. Culver Max Entertainment कंपनी Sony Pictures Networks India के नाम से काम करती है. जियो स्टार ने Colors Odia, MTV Beats, VH1 और Comedy Central जैसे चैनलों के लाइसेंस सरेंडर किए हैं. 

कंपनी का कहना है कि लाइसेंस वापस करने का फैसला  कंपनी का आंतरिक कारोबारी फैसला था. जी इंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) ने Zee Sea चैनल को बंद कर दिया है. वहीं Enter10 Media (जो हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल दंगल  (Dangal) चलाती है) ने भी कुछ लाइसेंस सरेंडर किए. कंपनी ने Dangal HD और Dangal Oriya के लाइसेंस वापस कर दिए गए हैं. इसके अलावा एबीपी नेटवर्क ने ABP News HD को बंद कर दिया है. कंपनी का कहना है कि चैनल चलाने की बढ़ती लागत और कम  कमाई की वजह से लाइसेंस सरेंडर किये गए हैं. वहीं, NDTV ने अपने प्रस्तावित गुजराती न्यूज़ चैनल NDTV Gujarati का लाइसेंस सरेंडर कर दिया.  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक भारत में फिलहाल 916 टीवी चैनल डाउनलिंकिंग के लिए मौजूद हैं. इनमें 572 फ्री-टू-एयर चैनल हैं और 334 पेड चैनल शामिल हैं. इसके अलावा, मंत्रालय ने 10 ऐसे टीवी चैनलों को लाइसेंस दिए हैं जो भारत से अपलिंक होते हैं, लेकिन उनका प्रसारण केवल विदेशों में किया जाता है. टीवी चैनल का सिग्नल स्टूडियो से सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडकास्ट करने के लिए भेजने को अपलिंक कहते हैं. 

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टीवी इंडस्ट्री की क्या मजबूरी है?

टीवी इंडस्ट्री अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक रूप से चैनलों का फायदे में न रहने और दर्शकों की बदलती डिमांड की वजह से भी इन कंपनियों ने अपने लाइसेंस सरेंडर किए हैं. कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं, इसलिए कई टीवी चैनलों के लाइसेंस वापस किए जा रहे हैं. इसके अलावा इन अधिकारियों का कहना है कि भारत का पेड टीवी इकोसिस्टम लंबे समय से वित्तीय दबाव में है. अमीर और शहरों में रहने वाले कई लोग तेजी से OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं. 

वहीं जिन लोगों को पैसा खर्च में दिक्कत है वह डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) पर शिफ्ट हो रहे हैं. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक  वित्त वर्ष 2018-19 में पेड DTH सब्सक्राइबर  7.2 लाख करोड़ रुपये थे. वित्त वर्ष 2023-24 में  इनकी संख्या घटकर 6.2 करोड़ रह गई है. इतना ही नहीं मौजूदा वित्त वर्ष यानी वित्त वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या 5.1 करोड़ से भी नीचे जाने का अनुमान है. विज्ञापन के मोर्चे पर भी हालात मुश्किल बने हुए हैं. दुनिया की जानी मानी विज्ञापन और मार्केटिंग कंपनी WPP का अनुमान है कि 2025 में टीवी विज्ञापन से होने वाली कमाई 1.5% घटकर 477.4 अरब रुपये रह जाएगी. वहीं, इंडस्ट्री संगठनों का कहना है कि सरकारी नियम कायदों ने ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. ब्रॉडकास्टर्स, केबल ऑपरेटर्स और DTH कंपनियां लगातार यह मुद्दा उठाती रही हैं कि टीवी इंडस्ट्री पर लाइसेंसिंग, कंटेंट और प्राइसिंग समेत कई स्तरों पर नियम लागू हैं. जबकि OTT प्लेटफॉर्म्स को अपेक्षाकृत कम नियम कायदों का पालन करना पड़ रहा है.

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