जहां एक तरफ अमेरिका की बड़ी आईटी कंपनियां बड़ी तादाद में कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं, वहीं, दुनिया की दिग्गज एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कंपनी Nvidia टैलेंटेड लोगों को करोड़ों रुपये का पैकेज बांट रही है. कंपनी का मौजूदा रुख एच-1बी वीजा धारक भारतीयों के साथ-साथ उन हजारों इंजीनियरों के लिए बड़ा मौका है जिन्हें एआई के नाम पर नौकरी से निकाला गया है.
नौकरी से निकाले जा रहे इंजीनियरों के लिए बड़ा मौका, Nvidia दे रही करोड़ों के पैकेज
गूगल, ऐमजॉन और मेटा जैसी कंपनियां छंटनी और लागत में कटौती कर रही हैं, लेकिन Nvidia एच-1बी वीजा वाले कर्मचारियों की भर्ती बढ़ा रही है. यह भारत के आईटी प्रोफेशनल्स के लिए काफी राहत वाली बात है. अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीयों के पास एच-1 बी वीजा है.


इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि गूगल, ऐमजॉन और मेटा जैसी कंपनियां छंटनी और लागत में कटौती कर रही हैं, लेकिन Nvidia एच-1बी वीजा वाले कर्मचारियों की भर्ती बढ़ा रही है. यह भारत के आईटी प्रोफेशनल्स के लिए काफी राहत वाली बात है. अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीयों के पास एच-1 बी वीजा है.
एनडीटीवी के मुताबिक अमेरिकी सरकार के डॉक्यूमेट्स में बताया गया है कि Nvidia को वित्तीय वर्ष 2026 की पहली दो तिमाहियों के दौरान लगभग 1,200 एच-1बी पदों के लिए सर्टिफेशन मिला है. यह एक साल पहले इसी अवधि के दौरान लगभग 1,000 पदों की तुलना में ज्यादा है.
Nvidia का ये रुख चौंकाने वाला है. पिछले एक साल में आईटी कंपनियों ने हजारों लोगों को नौकरी से निकाला है. इस छंटनी के पीछे एक बात कॉमन है, अब आईटी कंपनियां एआई में पर फोकस बढ़ा रही हैं इसलिए वे छंटनी कर रही हैं या कम कर्मचारी भर्ती कर रही हैं.
बिजनेस इनसाइडर ने आंकड़ों के हवाले से बताया है कि गूगल द्वारा स्वीकृत एच-1बी वीजा धारकों की संख्या एक साल में 5,100 से घटकर लगभग 2,200 रह गई है. इस दौरान ऐमजॉन में भी एच-1 वीजा धारकों की मांग में भारी गिरावट आई और यह संख्या 6,100 से घटकर लगभग 4,300 रह गई. लेकिन, इसी बीच Nvidia द्वारा विदेशी कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने के फैसले ने आईटी कंपनियों को सकते में डाल दिया है.
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यह क्यों अहम है?Nvidia की तरफ से एच-1 वी वीजा धारकों को मोटी सैलरी देना अमेरिका में काम करने वाले भारतीय इंजीनियरों के लिए अहम है. आंकड़ों के मुताबिक, स्वीकृत एच-1बी लाभार्थियों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 71% से 73% है.
एच-1बी वीजा नियमों के तहत, नौकरी छूटने के बाद कर्मचारियों को आमतौर पर केवल 60 दिन का समय मिलता है ताकि वे कोई दूसरी कंपनी खोज सकें जो उनके वीजा को स्पॉन्सर करने के लिए तैयार हो. इस समय सीमा के भीतर नई नौकरी न मिलने पर उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
Nvidia दे रही 4.64 करोड़ रुपये तक सैलरीNvidia के भर्ती अभियान की सबसे खास बात मोटी सैलरी है. रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेजों से पता चलता है कि कंपनी एआई, इंजीनियरिंग और रिसर्च से जुड़ी जॉब्स के लिए करोड़ों का पैकेज देने को तैयार है. बताते हैं कि Nvidia में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर साल 391,000 डॉलर तक बेसिक सैलरी कमा सकता है. भारतीय रुपये में यह रकम करीब 3.72 करोड़ रुपये बनती है.
इसी तरह से रिसर्च साइंसटिस्ट को 3 लाख 56 हजार 500 डॉलर तक की राशि मिल सकती है. रुपये में ये रकम 3.39 करोड़ रुपये के अल्ले-पल्ले बनती है. इसी तरह प्रोडक्ट मैनेजर हर साल करीब 3.60 करोड़ रुपये कमा सकता है. हार्डवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर सालाना 3.5 करोड़ रुपये कमा सकते हैं.
आर्किटेक्चर डायरेक्टर की बेसिक सैलरी 4 लाख 88 हजार 750 डॉलर तक जा सकती है. यह सालाना लगभग 4.64 करोड़ रुपये के बराबर है. इन आंकड़ों में कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस वगैरा शामिल नहीं है.
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