कच्चा तेल फिर उफान मारने लगा है. बुधवार, 22 जुलाई को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का दाम करीब 6 सप्ताह के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड की कीमत आज करीब 4 डॉलर उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई.
US-ईरान मिसाइलें मारते रहे, कच्चा तेल 100 डॉलर के पास पहुंच गया
कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. वहीं, यमन में ईरान समर्थित विद्रोही संगठन हूती मिलिशिया की तरफ से तेल और गैस से लदे जहाजों के ट्रांसपोर्ट में दिक्कतों की वजह से कच्चे तेल के दाम उछले हैं.


इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से बताया गया है कि 11 जून के बाद पहला मौका है जब कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची हैं. इसी तरह से दूसरी वैराइटी वाला अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI Crude) का भाव 3.65 डॉलर चढ़कर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
क्यों उबला कच्चा तेल?कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. वहीं, यमन में ईरान समर्थित विद्रोही संगठन हूती मिलिशिया की तरफ से तेल और गैस से लदे जहाजों के ट्रांसपोर्ट में दिक्कतों की वजह से कच्चे तेल के दाम उछले हैं.
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान पर लगातार 11वीं रात हमले किए. इस वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर नए सिरे से जंग छिड़ गई है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में सऊदी से कच्चा तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है. इसके चलते मिडिल ईस्ट में जारी लड़ाई में एक नया मोर्चा खोल दिया है.
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ब्रोकरेज फर्म केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वाटरर ने कहा है कि कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर दोहरा संकट है. बाब अल-मंडेब स्ट्रेट भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तरह एक संवेदनशील क्षेत्र बनता दिख रहा है, क्योंकि व्यापारी लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर रख रहे हैं.
मंगलवार 21 जुलाई को चीन और भारत के लिए निकले कच्चे तेल से लदे तीन तेल टैंकरों ने लाल सागर में यू-टर्न लिया और यमन के तट से होकर जाने के बजाय स्वेज नहर की ओर मुड़ गए. ये जहाज सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहे थे.
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