अगर आपने किसी स्मॉल फाइनेंस (Small Finance) बैंक में एफडी (फिक्सड डिपॉजिट) करा रखी है या कराने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आप ही के लिए है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
फिक्स्ड डिपॉजिट कराने की सोच रहे तो इंटरेस्ट से जुड़े ये बदलाव जरूर जान लीजिए
स्मॉल फाइनेंस बैंकों में एफडी के नियमों को लेकर 3 प्रमुख बदलाव दिए गए हैं. पहला बदलाव ये है कि अब सभी स्मॉल फाइनेंस बैंकों को रोजाना (वर्किंग डे) सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क एफडी (थोक जमा) पर ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी. उन्हें सुबह 10:10 बजे तक दरों को अपडेट करने के लिए 10 मिनट का समय मिलेगा.

इंडिया टुडे की खबर में बताया गया है कि स्मॉल फाइनेंस बैंकों में एफडी के नियमों को लेकर 3 प्रमुख बदलाव दिए गए हैं. पहला बदलाव ये है कि अब सभी स्मॉल फाइनेंस बैंकों को रोजाना (वर्किंग डे) सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क एफडी (थोक जमा) पर ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी. उन्हें सुबह 10:10 बजे तक दरों को अपडेट करने के लिए 10 मिनट का समय मिलेगा.
आरबीआई के नियमों के मुताबिक सभी कमर्शियल बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए थोक जमा का मतलब 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की एकमुश्त एफडी से है. ये एफडी आमतौर पर कंपनियां, बड़े बिजनेसमैन, ट्रस्ट और अमीर लोग करते हैं.
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सभी तरह की एफडी की ब्याज दरें पहले बतानी होंगीदूसरा बड़ा बदलाव सभी तरह की एफडी की ब्याज दरों को लेकर किया गया है. आरबीआई ने स्मॉल फाइनेंस बैंकों से कहा है कि जमा स्वीकार करने से पहले अपनी एफडी की ब्याज दर की जानकारी साझा करें.
बैंकों को नियमित और थोक जमा दोनों के लिए अपनी वेबसाइट्स पर दी गई जानकारी के हिसाब से ब्याज दरों के बराबर इंटरेस्ट रेट्स देने होंगे. इससे एफडी कराने वाले ग्राहकों के लिए निवेश करने से पहले एफडी रेट्स की तुलना करना आसान हो जाएगा.
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सभी ग्राहकों के लिए बराबर एफडी रेट्सआरबीआई ने यह साफ कर दिया है कि स्मॉल फाइनेंस बैंक एक ही दिन स्वीकार की गई समान राशि की जमा राशि के लिए अलग-अलग ग्राहकों को अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकते हैं.
इन सभी बैंकों की शाखाओं में समान दरें लागू होनी चाहिए. इससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक जमाकर्ता के साथ समान व्यवहार किया जाए, चाहे उसने फिक्सड डिपॉजिट्स किसी भी बैंक में खोला हो. रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी नए नियम 1 अक्टूबर से अमल में आएंगे.
हालांकि, यह नियम थोक जमा पर लागू नहीं होता है. बैंक थोक जमा पर अलग-अलग ब्याज दरें दे सकते हैं, बशर्ते मानदंड पहले से तय और सार्वजनिक किए गए हों.
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