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मुंबई पुलिस से करोड़ों की 'लूट', अपने ही अधिकारियों ने करोड़ों का चूना लगाया, 5 पर FIR

Mumbai police Ghost employees: पुलिस का कहना है कि आरोपी अधिकारियों ने क्लर्कों की मिलीभगत से अटेंडेंस रजिस्टर और फर्जी कर्मचारियों के रिकॉर्ड बनाए थे. आरोप है कि उन्होंने बाहरी लोगों के नाम पेरोल में जोड़े थे.

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घटना के समय पद पर रहे पांच अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • मुंबई पुलिस के 2019-2020 के बीच 10 फर्जी कर्मचारियों को कुल 6 करोड़ 41 लाख रुपये की सैलरी दी गई, जो कागजों पर मौजूद थे लेकिन उनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था।
  • यह घोटाला पुराने सैलरी पोर्टल से नए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म पर डेटा ट्रांसफर के दौरान सामने आया, जिससे फर्जी कर्मचारियों के रिकॉर्ड और अटेंडेंस रजिस्टर की मिलीभगत उजागर हुई।
  • इस मामले में 5 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, दो अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है और पुलिस जांच कर रही है कि फर्जी कर्मचारियों को पेरोल में कैसे जोड़ा गया।

मुंबई पुलिस के ‘10 कर्मचारियों’ को साल 2019-2020 के बीच 6 करोड़ 41 लाख रुपये की सैलरी मिली. इसके छह साल बात पता चला कि यह कर्मचारी सिर्फ कागजों पर मौजूद थे. असल में इनका कोई वजूद ही नहीं था. यह घोटाला कर्मचारियों के पुराने सैलरी पोर्टल के डेटा को नए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर करते समय सामने आया. मामले में दो अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है.

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फर्जी पुलिसकर्मियों के नाम ये हैं- रामदास भोगले, सुधाकर कदम, सरजू यादव, भागवत भोसले, गुनाजी खावकर, महादेव हलदानकर, राजेंद्र सोनार, उत्तम थोराट, सूर्यकांत पाटिल और पांडुरंग कदम. इंडिया टुडे से जुड़े दिव्येश सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ रीजनल डिवीजन के एक पुलिस अधिकारी ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में उन्होंने बताया कि 10 लोगों को पुलिस कर्मचारी के तौर पर लिस्ट किया गया था. उनके बैंक अकाउंट में हर महीने सैलरी भेजी गई थी. मगर असल में उनका अस्तित्व है ही नहीं. सैलरी के फर्जी ट्रांजैक्शन मुख्य रूप से दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 और जून 2020 से सितंबर 2020 के बीच हुए.

5 अधिकारियों पर FIR दर्ज, 2 सस्पेंड

पुलिस का कहना है कि आरोपी अधिकारियों ने क्लर्कों की मिलीभगत से अटेंडेंस रजिस्टर और फर्जी कर्मचारियों के रिकॉर्ड बनाए थे. आरोप है कि उन्होंने बाहरी लोगों के नाम पेरोल में जोड़े थे.

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घटना के समय पद पर रहे पांच अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. FIR में नामजद कर्मचारियों में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गोस्वामी, नागेश तलवडेकर और विजया चव्हाण, हेड क्लर्क अजय राठौड़ और सीनियर क्लर्क अमोल मेश्राम शामिल हैं. पुलिस विभाग ने विजया चव्हाण और अमोल मेश्राम को सस्पेंड कर दिया है. दोनों पर 10 'कर्मचारियों' को जोड़ने और उनके मासिक वेतन को मंजूरी देने का आरोप है. मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज किया गया है.

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'घोस्ट कर्मचारियों' की पहचान की जांच

मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "यह 2020 का घोटाला है, आज का नहीं है. उस पर कार्रवाई चल रही है. जिन-जिन लोगों ने घोटाला किया है, उन पर कार्रवाई हुई है. "

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पुलिस उन 10 लोगों की पहचान की जांच कर रही है, जिन्हें 'कर्मचारी' के तौर पर लिस्ट किया गया था. जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कागजों पर मौजूद इन कथित कर्मचारियों के नाम वेतन सूची में कैसे शामिल हुए. और मामले में किस-किस की भूमिका रही. 

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