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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 45 अरब डॉलर का उछाल, बना नया रिकॉर्ड

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक इससे पिछले सप्ताह (28 अगस्त को खत्म) में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 11.47 अरब डॉलर का इजाफा हुआ था. इस दौरान फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 740.80 अरब डॉलर हो गया था. जबकि फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) करीब 47.50 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हो गईं.

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कुछ महीने पहले तक घटते विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर मोदी सरकार आलोचनाओं का सामना कर रही थी

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  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में 44.9 अरब डॉलर बढ़कर 785.71 अरब डॉलर हो गया, जो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार सामने आया है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि के पीछे आरबीआई की FCNR (B) स्कीम के तहत गैर-रिहायशी भारतीयों द्वारा भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करना मुख्य कारण रहा है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से भारत की आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलने की संभावना है और आगे निवेश प्रवाह को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को खत्म हफ्ते में 44.9 अरब डॉलर बढ़कर 785.71 अरब डॉलर हो गया. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से शुक्रवार, 11 सितंबर को आंकड़े जारी कर यह जानकारी दी गई है. 

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आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक इससे पिछले सप्ताह (28 अगस्त को खत्म) में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 11.47 अरब डॉलर का इजाफा हुआ था. इस दौरान फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 740.80 अरब डॉलर हो गया था. जबकि फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) करीब 47.50 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हो गईं.

फॉरेन करेंसी एसेट्स की भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. हालांकि, इस हफ्ते में सोने का भंडार करीब 2.59 अरब डॉलर घटकर लगभग 113.82 अरब डॉलर हो गया. सोने का भंडार मार्च के आखिर से 1.58 अरब डॉलर कम रहा. लेकिन सोने का भंडार पिछले साल की तुलना में करीब 23.52 अरब डॉलर ज्यादा रहा.

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इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के साथ भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में सप्ताह के दौरान 4 मिलियन डॉलर की गिरावट आई और यह घटकर करीब 18.81 अरब डॉलर रह गया. स्पेशल ड्राइंग राइट्स इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की बनाई एक रिजर्व एसेट है. इसका इस्तेमाल देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार के हिस्से के रूप में रखते हैं. जरूरत पड़ने पर आईएमएफ के मेंबर्स के बीच विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

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इस स्कीम ने कर दिया खेल!

कुछ महीने पहले तक घटते विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर मोदी सरकार आलोचनाओं का सामना कर रही थी. इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने NRIs के लिए एक स्कीम लॉन्च की. इस स्कीम का नाम FCNR (B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन रेजीडेंट (बैंक) था. इस स्कीम में NRIs ने भारत में खूब पैसा निवेश किया. इस स्कीम के जरिये 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आया है. 

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NRIs का फुल फॉर्म नॉन रेजीडेंट इंडियन होता है. ये भारतीय होते हैं और विदेश में नौकरी या बिजनेस वगैरा करते हैं. इनकी नागरिकता भी भारत की ही होती है. इस स्कीम के तहत मूलधन और ब्याज दोनों का भुगतान विदेशी मुद्रा में किया जाता है. इससे NRIs को भारत में निवेश करने पर रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण होने वाला नुकसान नहीं होता है.

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