देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच रही है. मौजूदा बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर सरकार ने हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है. इसके बाद 4 अगस्त को निवेशकों के बीच शेयर बेचने की होड़ लग गई है. इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयरों में लगभग 9% की गिरावट आई.
सरकार बेच रही LIC में अपनी हिस्सेदारी, आम लोगों के लिए कैसे है यह बड़ा मौका? जानें यहां
LIC OFS: एलआईसी के शेयरों में मंगलवार को 9% की गिरावट देखने को मिली है. सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया और इसके साथ ही गिरावट शुरू हो गई. निवेशकों के पास बाजार मूल्य से कम में शेयर खरीदने का मौका है.

सरकार द्वारा एलआईसी के ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के लिए न्यूनतम मूल्य 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. इसके बाद से एलआईसी के शेयरों में 8.87% तक की गिरावट देखने को मिली. सुबह करीब 10 बजे, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर एलआईसी के शेयर 5.68% गिरकर 400.25 रुपये पर कारोबार कर रहे थे.
फ्लोर प्राइस सोमवार 3 अगस्त को LIC के क्लोजिंग प्राइस से 10.9% कम है. यही डिस्काउंट शेयर में आई भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण है. जब कोई बड़ा शेयरधारक OFS के जरिए शेयरों की खरीद पर बड़ी छूट देता है, तो बाजार मूल्य पर आमतौर पर दबाव पड़ता है.
सरकार की योजना है कि वह शुरुआत में OFS के माध्यम से LIC में 2% हिस्सेदारी बेचेगी और पर्याप्त मांग होने पर 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखेगी. इसका मतलब है कि कुल हिस्सेदारी की बिक्री 6.5% तक जा सकती है. 382 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर, अगर पूरी 6.5% हिस्सेदारी बेची जाती है तो सरकार लगभग 31,400 करोड़ रुपये जुटा सकती है.
यह OFS गैर-खुदरा निवेशकों के लिए मंगलवार 4 अगस्त को खुल गया है. खुदरा निवेशक बुधवार 5 अगस्त को इसमें भाग ले सकेंगे. मई 2022 में एलआईसी के शेयर मार्केट में लिस्ट होने के बाद कंपनी पहली बार हिस्सेदारी बेच रही है.
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हिस्सेदारी बेचने के पीछे दो जरूरी कारण हैं. सबसे पहले, सरकार का तर्क है कि LIC में जनता की हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत है. साल 2022 में इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के बाद भी सरकार ने बीमा कंपनी में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बरकरार रखी थी. फिलहाल सरकार के पास LIC का लगभग 96.5% हिस्सा है. इस तरह से सार्वजनिक शेयरधारकों के पास सिर्फ 3.5% हिस्सा ही बचा है. एलआईसी को मई 2027 तक अपनी न्यूनतम सार्वजनिक शेयर होल्डिंग बढ़ाकर 10% करने का समय दिया गया है.
अगर सरकार इस OFS में पूरे 6.5% शेयर बिक्री का रास्ता अपनाती है तो पब्लिक शेयर होल्डिंग बढ़कर लगभग 10% हो जाएगी. इससे LIC को उस जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी. दूसरा, इस बिक्री से केंद्र सरकार की विनिवेश से प्राप्त होने वाली इनकम में काफी वृद्धि होगी.
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है. सरकार ने एनएचपीसी, कोल इंडिया और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन सहित कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर पहले ही लगभग 21,200 करोड़ रुपये जुटाए हैं. मौजूदा OFS फ्लोर प्राइस पर LIC की पूरी हिस्सेदारी बेचने से इस राशि में 31,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हो सकती है.
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शेयरों में गिरावट क्यों आ रही है?जो निवेशक यह सोच रहे हैं कि आज LIC के शेयर क्यों गिर रहे हैं, उसका तात्कालिक कारण OFS की कीमत है. सरकार एलआईसी के बड़ी संख्या में शेयर 382 रुपये प्रति शेयर की दर से पेश कर रही है, जो सोमवार के बाजार मूल्य से लगभग 11% कम है.
इसके अलावा एलआईसी की इक्विटी का 6.5% तक बेचने से शेयरों का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक बाजार में आ जाएगा. इसलिए, यह गिरावट अपने आप में एलआईसी के मूल कारोबार में अचानक आई गिरावट का संकेत नहीं है.
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