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प्रोविडेंट फंड की वेज लिमिट ₹25,000 हुई, आपकी सैलरी और पेंशन पर क्या असर होगा?

अभी तक अगर किसी कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये है, तो कर्मचारी का योगदान 12% के नियम के हिसाब से 1,800 रुपये बनता है. इतना पैसा कंपनी भी कर्मचारी के पीएफ में जमा करती है.

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देश में करीब 7.98 करोड़ ईपीएफओ के सदस्य हैं (Courtesy: India Today)

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  • सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की मंथली वेज लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है, जिससे अब अधिक वेतन वाले कर्मचारी भी अनिवार्य पीएफ कवरेज में आएंगे।
  • 15,000 रुपये की वेज लिमिट 1 सितंबर 2014 से लागू थी, जिससे 25,000 रुपये तक के वेतन वाले कर्मचारी अनिवार्य पीएफ योगदान से बाहर थे, जो पेंशन की सीमित गणना का कारण था।
  • इस बदलाव से करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों का पीएफ कटेगा, जिससे उनकी पेंशन और बचत बढ़ेगी, हालांकि उनकी इन-हैंड सैलरी में कटौती भी हो सकती है।

सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की मंथली वेज लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार 16 सितंबर को कैबिनेट ब्रीफिंग में यह जानकारी दी. अभी किसी प्राइवेट कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा है तो उसका पीएफ कटना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक होता है.

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अभी क्या नियम हैं?

फिलहाल EPF स्कीम 1952 के तहत जिन कर्मचारियों की सैलरी (बेसिक +डीए) 15,000 रुपये तक है उनका पीएफ काटना अनिवार्य है. यह पीएफ कर्मचारी और कंपनी (नियोक्ता) दोनों को जमा करना होता है. 15 हजार रुपये वाली वेज लिमिट 1 सितंबर 2014 से लागू है. 

मान लीजिए अगर किसी कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये है, तो कर्मचारी का योगदान 12% के नियम के हिसाब से 1,800 रुपये बनता है. इतना पैसा कंपनी भी कर्मचारी के पीएफ में जमा करती है. इसी तरह से अभी पेंशन की गणना के लिए अधिकतम वेज लिमिट फिलहाल 15,000 रुपये प्रति माह तय है. इसी वजह से 15 हजार रुपये से ज्यादा सैलरी होने पर भी पेंशन में हर महीने अधिकतम 1,250 रुपये ही जमा होते हैं. लेकिन वेज लिमिट बढ़ने के बाद कर्मचारी की पेंशन के मद में ज्यादा पैसा जमा होगा और जब कर्मचारी रिटायर होगा तो रिटायरमेंट के समय मिलने वाली बचत और पेंशन दोनों बढ़ सकती हैं .

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क्या बदला है?

नई लिमिट उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो अभी 15,000 रुपये से ऊपर हैं, लेकिन 25,000 रुपये तक के वेतन के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर थे. सरकार का दावा है कि इस दायरे में आने वाले 51 लाख लोगों का अब और पीएफ कटने लगेगा.

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि 25 हजार वेज लिमिट का मतलब ये नहीं है कि 25 हजार से ऊपर सैलरी वालों का पीएफ कटना बंद हो जाएगा. 25 हजार ऊपरी सीमा है. सरकार कहती है कि EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज की सीमा इतनी होगी.

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क्या इन हैंड सैलरी घटेगी?

जानकारों का कहना है कि कुछ कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी घट सकती है. उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी की सैलरी (बेसिक+डीए) 25,000 रुपये है . इस कर्मचारी का अब तक पीएफ 15,000 रुपये वेतन सीमा पर कट रहा था. इस हिसाब से पीएफ में कर्मचारी का योगदान 12% के हिसाब से 1,800 रुपये था. 

अगर नई व्यवस्था में PF की गणना पूरे 25,000 पर होती है, तो योगदान बढ़कर 3000 रुपये हो जाएगा. इस तरह से कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी 1200 रुपये कम हो सकती है. हालांकि, एक बड़ा फायदा भी है. कर्मचारी के खाते में पीएफ ज्यादा जमा होगा. EPFO की पेंशन भी ज्यादा बन सकती है.

सरकार को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी?

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि सरकार को इस बढ़ी वेज लिमिट के चलते पेंशन के मद में लगभग 11,339 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. पांच सालों में अनुमानित व्यय लगभग 56,696 करोड़ रुपये है. सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 7.98 करोड़ लोग EPFO के सदस्य हैं. साथ ही करीब 82 लाख पेंशनर्स हैं.

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