पिछले कुछ महीनों से सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. ऊपरी स्तरों से सोना करीब 30% और चांदी का भाव 53% गिर गया है. लेकिन फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी मोनार्क पीएमएस का मानना है कि चांदी मौजूदा स्तरों से तेजी दिखा सकती है.
सोना 30% और चांदी 53% गिरा, अब किसमें सबसे ज्यादा कमाई के मौके?
दुनिया में चांदी का खदानों में उत्पादन साल 2015 से लगभग 83-85 करोड़ औंस प्रति वर्ष पर स्थिर बना हुआ है. चांदी की नई खदानों को अनुमति मिलने से लेकर उत्पादन शुरू होने तक लगभग एक दशक लग सकता है. चांदी के मामले में यही बड़ा खेल है.

इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सोने के दाम मजबूत बने रहने के कई कारण बने हुए हैं. वहीं, चांदी के मामले में निवेश की मांग के साथ-साथ हाजिर बाजार में चांदी की लगातार कमी और सीमित सप्लाई भी है. ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में ज्यादा तेज उछाल आ सकता है. 9 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई. इंटरनेशनल मार्केट में सोने का दाम 0.41% गिरकर 4,420.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. चांदी 0.21% गिरकर 66.86 डॉलर पर आ गई.
चांदी की कमी लगातार बढ़ रहीरिपोर्ट में बताया गया है कि चांदी की कमी लगातार बढ़ रही है. चांदी लगातार छठे साल मांग के मुकाबले कम उपलब्ध है. साल 2026 में इसकी कमी 4.63 करोड़ औंस रहने का अनुमान है, जो साल 2025 की 4.03 करोड़ औंस की कमी से ज्यादा है. साल 2021 से अब तक जमीन के ऊपर मौजूद चांदी के भंडार में से कुल 76.2 करोड़ औंस इस्तेमाल हो चुके हैं.
इसके अलावा दुनिया में चांदी का खदानों में उत्पादन साल 2015 से लगभग 83-85 करोड़ औंस प्रति वर्ष पर स्थिर बना हुआ है. चांदी की नई खदानों को अनुमति मिलने से लेकर उत्पादन शुरू होने तक लगभग एक दशक लग सकता है.
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सोलर में चांदी मांग घटी लेकिन कमी अब भी बरकरारचांदी के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक सोलर पैनलों से इसकी कमजोर मांग रही है. साल 2025 में 6% की गिरावट के बाद साल 2026 में फोटोवोल्टिक में चांदी की खपत में 19% की गिरावट का अनुमान है. यह लगभग 15.1 करोड़ औंस तक पहुंच जाएगी. हालांकि, मोनार्क पीएमएस का तर्क है कि यह गिरावट मुख्य रूप से प्रत्येक सौर सेल में कम चांदी के इस्तेमाल की वजह से है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि चांदी की मात्रा कम करने की एक व्यावहारिक सीमा है, क्योंकि बहुत ज्यादा कमी से सोलर सेल की क्षमता पर असर पड़ सकता है. इससे भी जरूरी बात यह है कि फोटोवोल्टिक मांग में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट के बाद भी घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है.
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चांदी की निवेश मांग बढ़ने के आसारसिल्वर की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि की संभावना इसलिए भी दिखती है, क्योंकि इंटरनेशनल कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स में रजिस्टर्ड भंडार लगभग 9.6 करोड़ औंस है. जब चांदी की भौतिक उपलब्धता कम हो जाती है और निवेश की मांग वापस आती है. अनुमान है कि साल 2026 में भौतिक निवेश की मांग 20% बढ़कर 22.7 करोड़ औंस हो जाएगी. अमेरिकी खुदरा मांग में 57% की वृद्धि होने की उम्मीद है.
मोनार्क पीएमएस के मुताबिक चांदी की अनुमानित कीमत 54-77 डॉलर प्रति औंस के बीच है. इसका मध्य बिंदु 65 डॉलर है. 6 अगस्त को चांदी की कीमत 61.7 डॉलर थी, जो इस मध्य बिंदु से लगभग 6% कम थी. इसके विपरीत, सोने की कीमत 3,922 डॉलर के मध्य बिंदु से लगभग 8% अधिक यानी 4,242 डॉलर थी.
इससे चांदी का रिस्क -रिवार्ड रेश्यो संभावित रूप से अधिक आकर्षक हो जाता है. हालांकि, चांदी सोने की तुलना में अधिक तेजी से गिर सकती है. लेकिन करेक्शन के बाद जब लीवरेज खत्म हो जाएगा और सोने-चांदी का अनुपात 46 गुना से बढ़कर लगभग 69 गुना हो जाएगा. ऐसे में मोनार्क का मानना है कि आगे अगर सोने -चांदी के दाम बढ़ते हैं तो चांदी की कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ेंगी.
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