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चांदी 98 प्रतिशत चढ़ी, फिर भी निवेशकों को सिर्फ 18% रिटर्न क्यों मिला?

पिछले एक साल में चांदी का भाव 98% उछला है लेकिन चांदी में निवेश करने वाले औसत निवेशक को पिछले एक साल में कुल निवेश के आधार पर सिर्फ 18% का रिटर्न मिला

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निवेशकों ने चांदी सस्ती होने पर कम खरीदी, लेकिन जब भाव काफी बढ़ गए तो मोटा पैसा लगा दिया (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

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  • पिछले एक साल में चांदी के दाम लगभग 98% बढ़े हैं, लेकिन औसत निवेशक को इस दौरान कुल निवेश पर केवल 18% का रिटर्न मिला है।
  • निवेशकों ने चांदी की कीमत बढ़ने के बाद अधिक निवेश किया जबकि पहले कम निवेश किया, जिससे कुल रिटर्न अपेक्षा से कम रहा है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक अगली रणनीति तय करते समय हालिया रिटर्न को आधार न बनाएं क्योंकि उच्च कीमत पर निवेश से लाभ सीमित हो सकता है।

पिछले एक साल में चांदी के दाम खूब उछले हैं. इस दौरान चांदी का भाव लगभग 98% चढ़ा है. लेकिन इस दौरान चांदी खरीदने वाले निवेशकों का अनुभव बिल्कुल अलग रहा है. उनका रिटर्न उम्मीद से काफी कम रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर में डीएसपी म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि चांदी में निवेश करने वाले औसत निवेशक को पिछले एक साल में कुल निवेश के आधार पर सिर्फ 18% का रिटर्न मिला. इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में चांदी में निवेश की गई 56% रकम घाटे में है.

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पहले खरीदने वाले मलाई काट ले गए!

रिपोर्ट में बताया गया कि निवेशक का वास्तविक रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि उन्होंने कब और कितनी राशि का निवेश किया. जिन निवेशकों ने चांदी पहले खरीदी और इन्वेस्टेड रहे, उन्होंने तेजी से मोटा फायदा कराया. वहीं, जिन लोगों ने कीमतों में तेजी से इजाफा होने के बाद ज्यादा आक्रामक रूप से निवेश किया उन्हें आगे प्रॉफिट का फायदा उठाने के लिए बहुत कम समय मिला. रिपोर्ट में कहा गया है, 

फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) पिछले रिटर्न को भविष्य की उम्मीदों में बदल देता है. दुर्भाग्य से, आप जो कीमत चुकाते हैं, वही आपको मिलने वाले रिटर्न को निर्धारित करती है.

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हालिया प्रदर्शन को रिटर्न का आधार न मानें 

निवेशक अक्सर हाल के प्रदर्शन को इस बात का संदर्भ मानते हैं कि कोई एसेट भविष्य में क्या रिटर्न दे सकता है. लेकिन पिछले साल में 98% रिटर्न का मतलब यह नहीं है कि आज निवेश करने वाला व्यक्ति अगले साल भी 98% रिटर्न की उम्मीद कर सकता है. इसलिए, FOMO के साथ बड़ा जोखिम यह नहीं है कि निवेशक गलत एसेट खरीद लें, बल्कि यह है कि वे सही एसेट तब खरीदें जब अधिकांश रिटर्न पहले ही मिल चुका हो.

यह पैटर्न विशेष रूप से सिल्वर ईटीएफ में दिखाई दिया. जनवरी 2026 में सिल्वर ईटीएफ में 11,761 करोड़ रुपये का निवेश अपने पीक पर था. सितंबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच दर्ज किए गए कुल निवेश के बराबर था, जब चांदी की कीमतें 1.41 लाख रुपये से कम थीं.

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रिपोर्ट में कहा गया कि इससे पता चलता है कि निवेशकों ने चांदी सस्ती होने पर कम खरीदी, लेकिन जब भाव काफी बढ़ गए तो मोटा पैसा लगा दिया. यही वजह है कि चांदी के 98% चढ़ने के बावजूद निवेशकों को औसतन सिर्फ 18% रिटर्न मिला.

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