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कंपनियों के बोर्डरूम में होंगे 18 साल के जेन Z? संसदीय बोर्ड ने सरकार से सिफारिश की

कंपनी एक्ट के तहत 18 साल का कोई भी व्यक्ति कंपनी का डायरेक्टर बन सकता है. लेकिन धारा 196 के मुताबिक इन बड़े पदों के लिए न्यूनतम आयु सीमा ज्यादा है.

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फिलहाल कंपनी एक्ट के तहत 18 साल का कोई भी व्यक्ति कंपनी का डायरेक्टर बन सकता है (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • संसदीय समिति ने कंपनी के प्रबंध निदेशकों और पूर्णकालिक निदेशकों के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश की है।
  • वर्तमान में कंपनी अधिनियम की धारा 196 के तहत एमडी और पूर्णकालिक निदेशकों के लिए कम से कम 21 वर्ष की आयु अनिवार्य है, जिससे नियमों में अस्पष्टता उत्पन्न हुई है।
  • यदि सिफारिश लागू होती है तो इससे 18 वर्ष की आयु के युवा बोर्ड में शामिल हो सकेंगे, जिससे कंपनियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

एक संसदीय समिति ने कंपनी के प्रबंध निदेशकों (एमडी) और पूर्णकालिक निदेशकों के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 से घटाकर 18 साल करने की सिफारिश की है. दुनिया के ज्यादातर प्रमुख देशों में कंपनियों के बड़े अधिकारियों के लिए 21 साल की कोई खास आयु सीमा निर्धारित नहीं है.

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि समिति की सिफारिश को मंजूरी मिली तो भारत में 18 साल का व्यक्ति कंपनी बना सकता है, शेयर खरीद सकता है. कंपनी के बोर्ड में शामिल हो सकता है और बिजनेस चला सकता है. 

अभी क्या नियम है? 

कंपनी एक्ट के तहत 18 साल का कोई भी व्यक्ति कंपनी का डायरेक्टर बन सकता है. लेकिन धारा 196 के मुताबिक इन बड़े पदों के लिए न्यूनतम आयु सीमा ज्यादा है. इससे डायरेक्टर को 21 साल की आयु तक कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक नियुक्त नहीं किया जा सकता है. यानी नियम-कायदों में उलझने की वजह से स्पष्टता नहीं है.

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संसदीय समिति ने गौर किया कि नियामक सुधारों पर उच्च स्तरीय समिति और नीति आयोग से भी इसी तरह के सुझाव प्राप्त हुए थे.

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने समिति को सूचित किया कि इसका उद्देश्य बोर्ड रूम में युवाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है. समिति ने अमेरिका, सिंगापुर, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में प्रचलित प्रथाओं की ओर भी इशारा किया, जहां आमतौर पर कार्यकारी नेतृत्व पदों के लिए ऐसी कोई आयु सीमा नहीं है. 

यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब भारतीय बोर्डरूम में युवा सदस्यों की संख्या पहले से ही बढ़ रही है. हालांकि यह बदलाव अभी भी मामूली है. प्राइम डेटाबेस की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में 40 साल से कम उम्र के निदेशकों की संख्या मार्च 2024 तक बढ़कर 1,618 हो गई. जो एक दशक पहले 687 थी.

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कंपनियां युवा निदेशकों को क्यों प्राथमिकता दे रही हैं? 

पिछले कुछ साल में बोर्ड चयन फर्मों, स्वतंत्र निदेशकों और बिजनेसमैन ने कहा है कि कंपनियां एआई, साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिस्ट जैसे क्षेत्रों में निपुण लोगों की तलाश कर रही हैं. प्राइम डेटाबेस के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि कम उम्र के लोग सीमित हैं.

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