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प्रोविडेंट फंड की वेतन सीमा बढ़कर 25 हजार होगी, जानें आपका क्या फायदा है

इस प्रस्ताव को लेकर अब कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है. वेतन सीमा में सितंबर 2014 में संशोधन किया गया था. उस समय इस लिमिट को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया था.

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25 हजार की वेतन सीमा 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना है

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  • वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा है।
  • वेतन सीमा बढ़ाने का कारण फरवरी 2014 के बाद से ईपीएफ कवरेज को बढ़ाकर अधिक कर्मचारियों को शामिल करना और पुराने वेतन सीमा को आधुनिक बनाना है।
  • यह बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना है, जिससे कंपनियों को पेरोल सिस्टम और नियम पालन में संशोधन करना होगा और सरकार के खर्च में वृद्धि हो सकती है।

वित्त मंत्रालय ने अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) कवरेज के लिए वेज सीलिंग (wage ceiling) को बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. फिलहाल यह सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है.

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मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव को लेकर अब कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है. वेतन सीमा में सितंबर 2014 में संशोधन किया गया था. उस समय इस लिमिट को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया था.

क्या बदल रहा है?

अभी 15,000 रुपये प्रति माह तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी ईपीएफ और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के अंतर्गत आते हैं. इस नियम का पालन करना सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य है. वहीं, इस सीमा से ज्यादा कमाई वाले लोग इसमें शामिल होने या न होने का विकल्प चुन सकते हैं .  

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नौकरी देने वाली कंपनियों के लिए उन्हें नामांकित करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो 25,000 रुपये प्रति माह बेसिक वाले कर्मचारी भी इस दायरे में आ जाएंगे.

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कंपनियों पर बोझ बढ़ेगा

इस कदम से अभी के मुकाबले ज्यादा कर्मचारियों पीएफ के दायरे में शामिल होने की संभावना है. हालांकि, इससे कंपनियों के लिए नियम-कायदों का पालन करने की लागत भी बढ़ेगी क्योंकि उनको अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए अनिवार्य ईपीएफ और पेंशन योगदान देना होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पहले सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने पर विचार किया था. लेकिन 25 हजार रुपये पर सहमति बनी.

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सरकार का योगदान बढ़ेगा

सरकार को भी पेंशन के मद में अपना हिस्सा बढ़ाना पढ़ सकता है. फिलहाल नियोक्ता (कंपनी) कर्मचारी के मूल वेतन का 8.33% पेंशन फंड में योगदान करते हैं, जबकि सरकार 1.16% का योगदान देती है. केंद्रीय बजट में 2026-27 के लिए कर्मचारी पेंशन योजना के लिए 11,144 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इसलिए, कवरेज का विस्तार करने से सरकार के खर्च में भी वृद्धि हो सकती है.

अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस प्रावधान केवल 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों पर लागू होते हैं. छोटी कंपनियां स्वेच्छा से रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं, लेकिन ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य नहीं है. 

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कब से लागू होगी नई सीमा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 हजार की वेतन सीमा 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना है. हालांकि, अंतिम तारीख कैबिनेट की तरफ से इस प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद तय की जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी, संशोधित वेतन सीमा के तुरंत लागू होने की संभावना नहीं है. 

रिपोर्ट के अनुसार, नई सीमा लागू होने से पहले कंपनियों को पेरोल सिस्टम, नियम-कायदों का पालन करने और दूसरे कामकाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को अपडेट करने के लिए समय की जरूरत होगी. 

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