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CIBIL स्कोर 730 से कम तो होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन भूल जाइए!

RBI नया फ्रेमवर्क Expected Credit Loss (ECL) ला रहा है. इसके आते ही अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से नीचे है तो आपको होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा. ऐसा क्यों होगा ये भी जान लीजिए.

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CIBIL स्कोर 730 से नीचे है तो लोन नहीं मिलेगा

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  • भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2027-28 से Expected Credit Loss (ECL) फ्रेमवर्क लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे सिबिल स्कोर 730 से नीचे वाले व्यक्ति लोन नहीं ले पाएंगे।
  • इस कदम के पीछे बैंकिंग प्रणाली में गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) बढ़ने और बैंक के संभावित नुकसान को कम करने की जरूरत है, जिसके कारण लोन देने की प्रक्रिया में अधिक कठोरता आएगी।
  • ECL फ्रेमवर्क लागू होने से बैंकों को संभावित नुकसान के अनुसार अधिक पूंजी अलग रखनी होगी, जिससे कम सिबिल स्कोर वाले ग्राहकों के लिए लोन प्राप्त करना कठिन और महंगा हो जाएगा।

सबसे पहले तो 1 अप्रैल 2027 की तारीख याद कर लीजिए और उसके बाद 730 नंबर को. कोई स्टोरी का मीटर नहीं बिठाते और सीधे-सीधे बता देते हैं कि आरबीआई नया फ्रेमवर्क ला रहा है. इसके आते ही अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से नीचे है तो आप होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन भूल जाइए. रिजर्व बैंक का Expected Credit Loss (ECL) फ्रेमवर्क अगले साल के वित्तीय वर्ष से लागू होगा. केन्द्रीय बैंक के इस कदम का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को मजबूत और सुरक्षित बनाना है, लेकिन इसका मतलब लाखों आवेदकों के लिए कड़ी जांच भी हो सकता है.

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62 फीसदी जनता लपेटे में

Expected Credit Loss (ECL) फ्रेमवर्क लागू होने के बाद देश की 62 फीसदी जनता के लिए लोन लेना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि उसका सिबिल स्कोर 730 से नीचे है. नए नियमों के चलते क्रेडिट स्कोर अपुन ही भगवान है वाले लेवल पर आ जाएगा. माने इसके पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाने की संभावना है. फिलहाल में स्कोर कम होने पर भी NBFC ब्याज बढ़ाकर लोन दे देते हैं मगर ECL के बाद मुश्किल होगा.

ECL फ्रेमवर्क की जरूरत क्यों?

वर्तमान व्यवस्था में बैंक बेकार या बैड लोन का प्रावधान करना तभी शुरू करते हैं जब कोई उधार लेने वाला लंबे समय तक भुगतान नहीं करता है. बैंकिंग वाली भाषा में इसे non-performing asset या (NPA) कहते हैं. ECL सिस्टम में बैंक को अपना तरीका बदलना पड़ेगा. उसे लोन देने से पहले लोन के नहीं चुकाये जाने का अनुमान लगाना होगा.

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बोले तो कर्ज लेने वाले की कुंडली पूरी तरफ से बांचना होगी. ग्राहक का पेमेंट रिकॉर्ड, सिबिल स्कोर, इनकम, नौकरी जाने के खतरे जैसे कई पैरामीटर्स पर लोन देना होगा. बैंकों को संभावित नुकसान का पहले से अनुमान लगाना होगा और उसी के अनुसार धनराशि अलग रखनी होगी. इसके तहत अगर कोई ग्राहक लोन की दो किस्त (ईएमआई) चुकाने में चूकता है, तो बैंकों को 12 गुना तक ज्यादा रकम अलग रखनी होगी. ये थोड़ा घुमाने वाला है तो जानिए कि बैंक भी तो आरबीआई से पैसा लेते हैं और फिर आगे कर्ज देते हैं. रकम ज्यादा रखने का मतलबब ये है कि अगर बैंक का पैसा डूबा तो वो आरबीआई के सामने नहीं रो पाएगा क्योंकि वहां तो 12 गुना तक रकम रखी है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक ECL आने से बैंकों का मुनाफा करीब 42,000 करोड़ रुपये कम हो सकता है. जाहिर सी बात है बैंक कम सिबिल स्कोर वालों को लोन देने से हाथ खींच लेंगे. अगर लोन देंगे तो ब्याज ज्यादा लेंगे. लोन के एवज में गारंटी की मांग करेंगे. कुल जमा बात ये कि अगर आपको कम ब्याज पर लोन चाहिए तो स्कोर 730 से ऊपर रखना होगा और देश के इन 7 करोड़ ग्राहकों की लिस्ट में आना होगा जिनका सिबिल स्कोर 730 से ऊपर है. वैसे सिबिल का टॉप स्कोर 900 होता है मगर वो किसी का नहीं होता. Just FYI 

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