दिल्ली के एक उपभोक्ता आयोग ने हाउस ऑफ बोहो ( House of BOHO ) नामक एक मशहूर रेस्तरां पर जुर्माना लगाया है. एक ग्राहक ने आरोप लगाया था कि उससे जबरन सर्विस चार्ज लिया गया. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाउस ऑफ बोहो रेस्तरां को अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी (unfair trade practice) मानते हुए ब्याज सहित सेवा शुल्क वापस करने और उत्पीड़न के लिए मुआवजे का आदेश दिया है.
सर्विस चार्ज के लिए ग्राहक के परिवार को बनाया बंधक, दिल्ली के पॉश रेस्टोरेंट पर लगा जुर्माना!
दिल्ली के एक मशहूर रेस्तरां को उपभोक्ता कोर्ट ने सर्विस चार्ज वसूलने के बदले में ग्राहक को ब्याज सहित पैसे लौटाने का आदेश दिया है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके परिवार को रेस्टोरेंट ने सर्विस चार्ज देने तक जबरन रोककर रखा था.


यह आदेश नीरज दुबे की तरफ से दायर शिकायत पर आया. इस शिकायत में दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को सर्विस चार्ज का भुगतान करने तक रेस्तरां में रोककर रखा गया था.
उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?इस मामले की सुनवाई दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल ने की. अपने आदेश में उपभोक्ता आयोग ने पाया कि अलग-अलग नामों से सर्विस चार्ज वसूलना भ्रामक था . साथ ही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत यह अनुचित व्यापार प्रथा थी. आयोग ने सर्विस चार्ज पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के दिशानिर्देशों की वैधता को बरकरार रखने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा.
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विवाद की वजह क्या थी?शिकायत के मुताबिक नीरज दुबे और उनके परिवार ने 19 अक्टूबर, 2024 को हाउस ऑफ बोहो में खाना खाया था. उनका बिल 11 हजार 761 रुपये था. इसमें 949 रुपये सर्विस चार्ज जोड़ा गया था. नीरज ने इस चार्ज पर आपत्ति जताई और सीसीपीए दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए इसे हटाने का अनुरोध किया. शिकायत में कहा गया है कि सर्विस चार्ज देना ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है और इसे जबरन नहीं लिया जा सकता है.
परिवार को रेस्तरां में बंधक बनाया!नीरज ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने सर्विस चार्ज देने से इनकार कर दिया, तो रेस्तरां के कर्मचारियों ने उनकी मेज को घेर लिया. साथ ही उन्हें और उनके परिवार को धमकाया और चेतावनी दी कि जब तक सर्विस चार्ज समेत पूरा बिल नहीं चुकाया जाता, तब तक उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
नोटिस जारी किए जाने के बावजूद, हाउस ऑफ बोहो की ओर से कोई भी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ. बाद में उपभोक्ता फोरम ने 8 अप्रैल, 2025 को एकतरफा कार्यवाही शुरू की और शिकायतकर्ता की तरफ से पेश किये गए साक्ष्य के आधार पर मामले का फैसला किया.
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ब्याज समेत पैसा लौटाने के अलावा 25 हजार का जुर्माना ठोंकासीसीपीए के दिशा-निर्देशों और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए आयोग ने हाउस ऑफ बोहो को सर्विज चार्ज के मद में लिए गए 949 रुपये वापस करने का आदेश दिया. जिस तारीख को ग्राहक ने खाने के साथ सर्विस चार्ज चुकाया था, उस तारीख से लेकर आयोग के आदेश के बीच सर्विस चार्ज की रकम पर 7% सालाना ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया.
इसके अलावा उत्पीड़न के लिए मुआवजे के तौर पर 25,000 रुपये का भुगतान करने की आदेश दिया. आयोग ने आगे निर्देश दिया कि पूरी राशि आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर चुका दी जाए. अगर रेस्तरां तय समय में जुर्माना और सर्विस चार्ज की राशि ब्याज सहित नहीं चुकाता है, तो उसे भुगतान होने तक पूरी राशि पर 6% सालाना ब्याज देना होगा.
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