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मार्केट खुलते ही मिनटों में निवेशकों के डूबे 4 लाख करोड़, शेयर बाजार की हालत कब सुधरेगी?

Share Market News: गुरुवार (24 सितंबर) को शेयर मार्केट खुलते ही औंधे मुंह गिर गया. दोनों प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखने को मिली. कुछ ही मिनट में निवेशकों के 4 लाख करोड़ डूब गए. सवाल है कि आखिर बाजार कब चढ़ेगा?

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कच्चा तेल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है (Courtesy: India Today)

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  • 24 सितंबर को शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जहां सेंसेक्स 700 अंक से अधिक गिर गया और निफ्टी 50 सूचकांक 200 अंक से अधिक नीचे आया।
  • अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण निवेशक जोखिम से बचने लगे, जिससे बाजार में गिरावट आई।
  • शेयर बाजार में इस गिरावट के बाद निवेशक आरबीआई की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी बैठक का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अगले कदमों का निर्धारण होगा।

शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है. गुरुवार, 24 सितंबर को मार्केट में भारी गिरावट देखने को मिली. खुलने के कुछ ही देर बाद सेंसेक्स और निफ्टी 1% तक लुढ़क गए. सुबह 10:26 बजे सेंसेक्स 700 अंक से अधिक गिरकर 74,050 के स्तर पर आ गया. इसी तरह निफ्टी 50 में 200 अंक से ज्यादा की गिरावट आई और यह 23,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.

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इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान बजाज फाइनेंस के शेयरों में 5% से अधिक की गिरावट देखने को मिली. एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर 3-4% गिरे. इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक , एशियन पेंट्स , एचडीएफसी बैंक और ट्रेंट के शेयर 1-2% तक गिर गए. 

वहीं निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 1% की गिरावट आ गई. इसके अलावा, सभी क्षेत्रीय सूचकांक लाल निशान में खुले. जैसे कि निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज लगभग 2% गिरे.

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मिनटों में 4 लाख करोड़ स्वाहा! 

इस भारी गिरावट के चलते बंबई शेयर बाजार (BSE) के कुल मार्कैट कैप 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा गिरकर 480 लाख करोड़ के आसपास आ गया. मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के कुल शेयरों की कुल वैल्यू को कहते हैं. हालांकि , बाजार की गिरावट नोशनल होती है. इसका मतलब है कि अगर आप गिरावट पर शेयर नहीं बेचेंगे तो आपका नुकसान बाजार में तेजी पर रिकवर हो जाएगा.

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शेयर बाजार में गिरावट क्यों आई ?

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट मार्केट में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसकी वजह से लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड वगैरा में लगाने लगते हैं और बाजार गिर जाता है. 

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शेयर बाजार में आई fM भारी गिरावट का ये सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. लेकिन बाजार में गिरावट के दो तीन कारण और हैं. अमेरिका में ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गया है. 

कच्चे तेल की कीमतें फिर से 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. 23 सितंबर को कच्चा तेल 99 के नीचे लुढ़क गया था. इसके अलावा तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में आई तेज़ी के चलते शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे गिरकर 95.87 पर आ गया.

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शेयर बाजार में उठापटक कब तक चलेगी? 

वीके वेल्थवाइज के रिसर्च एनालिस्ट सीए वत्सल खेमका ने लल्लनटॉप से बातचीत में इस बारे में विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितता को लेकर दबाव बना हुआ है. अमेरिका में बॉन्ड डील 30 साल और जापान की 10 साल मैच्योरिटी वाले बॉन्ड की यील्ड 30 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. भारतीय बॉन्ड की यील्ड भी 7% के ऊपर चली गई. इससे बाजार में रिस्क -ऑफ सेंटीमेंट देखने को मिल रहा है. इसका मतलब है कि बाजार में निवेशक जोखिम लेने से बचने लगे हैं.

वत्सल खेमका कहते हैं कि इस हफ्ते और अगले हफ्ते बाजार में दबाव और उठापटक जारी रह सकती है. अब बाजार की नजर अगले सप्ताह होने वाली आरबीआई (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक पर होगी. 5-7 अक्टूबर को आरबीआई की एमपीसी है. उनका कहना है कि फिलहाल निवेशकों को एग्रेसिव खरीदारी से बचते हुए धैर्य बनाए रखना चाहिए. साथ ही, किसी भी बड़ी गिरावट में अच्छे फंडामेंटल्स वाले stocks की खरीदारी धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए.

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश स्ट्रैटिजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत में 102 डॉलर से ऊपर की तेजी देखने को मिली है. अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 5.11% की वृद्धि से आज बाजार पर दबाव रहेगा. उन्होंने आगे कहा कि जब तक ये दो वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियां बनी रहेंगी. बाजार में तेजी से सुधार की संभावना कम ही नजर आती है.

एनालिस्ट ने बताया कि इन सेगमेंट के ग्रोथ शेयरों में, उनकी ऊंची वैल्यूएशन के बावजूद, लगातार खरीदारी देखी जा रही है. उन्होंने कहा कि यह रुझान बदलेगा, लेकिन इसका समय कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड के रुझान पर निर्भर करेगा. उनका कहना है कि लंबी अवधि निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो में ब्लू चिप शेयर शामिल करने का एक अच्छा अवसर है. 

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