अरबपति कारोबारी Elon Musk की Tesla इंडिया में बेहद ही धीमी गति से चल रही थी लेकिन अब लगता है जैसे कि इसके प्रोडक्शन पर भी ब्रेक (Tesla leaving from India) लग गया है. टेस्ला भारत में अपना प्रोडक्शन प्लांट सेट नहीं करेगी. ठीक बात है मगर इसके पीछे जो वजह सोशल मीडिया में बताई जा रही है उसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है. माने भारत सरकार ने मस्क का सपोर्ट नहीं किया. सरकार ने मस्क एंड कंपनी को सारी सुविधाएं नहीं दीं. वगैरा-वगैरा. दरअसल हुआ इसके उलट है. मिस्टर मस्क इंडिया को चीनी टोपी पहनाना चाहते थे जो उसने पहनी नहीं.
Tesla की इंडिया में फैक्ट्री नहीं लगेगी, एलन मस्क सरकार को चीनी टोपी नहीं पहना पाए!
Tesla leaving from India: एलन मस्क की टेस्ला कई सालों के इंतजार के बाद साल 2025 में इंडिया आई. अमेरिकन कंपनी ने ऐसे समय में ईवी का एस्केलेटर दबाया जब देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल का बूम आया हुआ है. लेकिन टेस्ला की कारों को तगड़ी हाइप के बाद भी वैसी सेल नहीं मिली जैसी कंपनी ने उम्मीद की थी.


एलन मस्क की टेस्ला कई सालों के इंतजार के बाद साल 2025 में इंडिया आई. अमेरिकन कंपनी ने ऐसे समय में ईवी का एस्केलेटर दबाया जब देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल का बूम आया हुआ है. देसी टाटा और मारुति से लेकर कोरियन ह्युंदई और चीनी MG की कई ईवी सड़कों पर दौड़ रही हैं. सरकार की तरफ से कंपनियों को कई फायदे मिल रहे तो ग्राहकों को कई किस्म की छूट. माने टेस्ला के लिए भी एकदम मुफीद टाइम. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. टेस्ला की कारों को तगड़ी हाइप के बाद भी वैसी सेल नहीं मिली जैसी कंपनी ने उम्मीद की थी. कंपनी ने 2500 कार बेंचने का लक्ष्य रखा था मगर उसने वित्तीय वर्ष 25-26 में सिर्फ 342 कारें सेल की हैं जबकि 2025 में इंडिया में 2 लाख से ज्यादा ईवी कारें बिकी हैं. इतनी कम सेल के पीछे सबसे बड़ी वजह टेस्ला कारों के दाम हैं. कंपनी के इंट्री लेवल टेस्ला मॉडल Y (Tesla Model Y) की कीमत भारत में 60 लाख रुपये है, जबकि अमेरिका में इसका दाम 44 लाख के आसपास है.
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वहीं दूसरी इलेक्ट्रिक कारों का बेस मॉडल भारत में 10 लाख रुपये में मिल जाता है. महिंद्रा की प्रीमियम ईवी भी 30 लाख रुपये में आ जाती है. इसलिए ग्राहकों ने कुछ खास दिलचस्पी दिखाई नहीं. हालांकि टेस्ला मॉडल Y (Tesla Model Y) इतना महंगा है नहीं मगर ये इंडिया में चीन से इम्पोर्ट होकर आता है, इसलिए टैक्स लगाकर इसका दाम 60 लाख के पार चला जाता है. टेस्ला की हालत ग्लोबल लेवल पर भी कोई खास अच्छी नहीं है. चीनी BYD से उसको कड़ी टक्कर मिल रही है. चीनी कंपनी सेल्स में नंबर वन है जबकि हाई टैरिफ की वजह से उसके पास अमेरिका जैसा बड़ा मार्केट नहीं है. भारत में भी उसकी BYD Seal का दाम 41 लाख के आसपास है जो टेस्ला से काफी कम है.
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फ्लॉप शो का फैक्ट्री से क्या लेना-देना?सीधे-सीधे ना सही मगर कनेक्शन तो है. कारों की सेल का फ्यूज़ उड़ा हुआ है इसलिए कंपनी प्रोडक्शन का एस्केलेटर भी नहीं दबा रही. मिस्टर मस्क वैसे भी इंडिया में फुल कैपेसिटी वाला प्लांट नहीं लगा रहे थे. गाड़ी तो उनको चीन में ही बनाना थी और यहां इम्पोर्ट करके सेल करना था. एक किस्म से असेंबली प्लांट. भारत तो इसके लिए भी मान गया था मगर उसने शर्त रखी कि कार के 70 से 80 फीसदी पार्ट्स इंडिया से खरीदो और फिर यहीं फिट करो. ऐसा करने से भी टेस्ला कारों के दाम काफी कम हो जाते. मगर मस्क जी को तो चीनी ही खानी है. वैसे चीनी तो चीन में भी कम ही खाई जा रही है. माने वहां का प्लांट भी अपनी क्षमता का 60 फीसदी ही काम कर रहा. जाहिर सी बात है कि मस्क के लिए इंडिया में 500 मिलियन डॉलर का प्लांट लगाना बड़ा इलेक्ट्रिक झटका होता. वैसे उनके फ़्रेनमी (फ्रेंड प्लस एनमी) मिस्टर ट्रम्प भी नहीं चाहते कि मस्क इंडिया में प्लांट सेटअप करें.
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