सड़क पर ट्रैफिक रूल्स फॉलो नहीं करेंगे तो घर में अंधेरे में रहना पड़ सकता है. आप सोच रहे होंगे, ये क्या बात हुई? ये क्या कनेक्शन है? ट्रैफिक रूल्स का घर के उजाले से क्या लेना-देना? लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्य सरकारों को चालान वसूलने का जो आइडिया दिया है, वो अगर लागू हो गया तो ट्रैफिक रूल तोड़ने का अंजाम यही होने वाला है. सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों से कहा है कि वो बकाया ट्रैफिक ई-चालान बिजली के बिल से जोड़ने पर विचार करें. जब घर की बिजली पर संकट आएगा, तभी लोग समय पर चालान भरने की बात सोचेंगे.
ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो घर की बिजली जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग ई-चालान की वसूली के लिए राज्यों को कई सुझाव दिए हैं, जिसमें चालान की रकम बिजली के बिल में जोड़ने का आइडिया भी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने अफसरों से कहा कि सिर्फ चालान काटते रहने से काम नहीं चलेगा. उसकी वसूली पर भी ध्यान देना होगा. पुलिस चाहे तो लाखों इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी कर सकती है लेकिन सवाल है कि इस जुर्माने की वसूली कैसे होगी?
क्या कहा कोर्ट ने?सुप्रीम कोर्ट की बातें इलेक्ट्रॉनिक चालान के बारे में है. आपके साथ भी होता होगा. कभी रेड लाइट जंप किया. या गलत जगह गाड़ी पार्क कर दी. गलत लेन में चलने लगे. उस समय तो आपको कोई कुछ नहीं बोलता. लेकिन बाद में फोन पर चालान कटने का मैसेज आ जाता है. सीधे ट्रैफिक पुलिस से सामना होता नहीं है तो बहुत से लोग ये चालान भरते ही नहीं. फिर ये जुर्माना सालों-साल उनके नाम से दर्ज रहता है. इसे भरने के लिए कोई प्रेशर भी नहीं बनाता. देश भर में ऐसे पेंडिंग ई-चालान की कितनी रकम वसूले जाने से रह गई है, इसका आंकड़ा जानेंगे तो आप भी चौंक जाएंगे.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ई-चालान के करीब 45 हजार करोड़ रुपये की रकम वसूलनी है. इसमें से लगभग 25 हजार करोड़ रुपये अब तक वसूले जा चुके हैं. लेकिन अभी भी पहाड़ जैसी रकम वसूलना बाकी है.
इनकी वसूली कैसे की जाए? इसके लिए बिजली के बिल वाले जुगाड़ के अलावा भी कोर्ट ने ढेर सारे उपाय बताए हैं. एक-एक करके सब जानते हैं.
पहले तो बिजली के बिल वाला जान लें. सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों को सलाह दी है कि अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं तो उसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दें. उन्हें बिजली का बिल भरना ही पड़ेगा. वरना बिजली का कनेक्शन काट दिया जाएगा. कोर्ट ने अफसरों से जोर देकर कहा कि वो इस पर काम करें. आपको कोई न कोई रास्ता तो निकालना ही होगा. अगर अफसरों ने कोर्ट की ये वाली बात मान ली तो ट्रैफिक रूल तोड़ने पर आपका बिजली का बिल बढ़ सकता है.
दूसरा उपाय कोर्ट ने ये बताया कि जब तक सभी बकाया चालान भर नहीं दिए जाते, तब तक गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को रिन्यू ही न किया जाए. डुप्लीकेट RC जारी करने और गाड़ी के मालिक का नाम बदलने की परमिशन भी रोकी जा सकती है.
तीसरा सुझाव ये कि जिन गाड़ियों के चालान नहीं भरे गए हैं, उन्हें परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए. ऐसी गाड़ियों की ओनरशिप किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर करने पर भी रोक लगाई जाए.
कोर्ट का चौथा सुझाव ये है कि बकाया चालान वाली गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट और पॉल्यूशन टेस्ट यानी PUC सर्टिफिकेट रोक दिया जाए. इतना ही नहीं, ऐसी गाड़ियों के मालिक का ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू न किया जाएगा. पहले से जो लाइसेंस जारी किए गए हैं, उन्हें सस्पेंड करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं.
पांचवां उपाय कोर्ट ने ये बताया कि गाड़ियों की रैंडम जांच की जाए. इस दौरान अगर किसी पर ठोका गया ई-चालान नहीं भरा गया है तो उसके खिलाफ कड़ा ऐक्शन लिया जाए. जरूरत पड़ने पर गाड़ी को जब्त कर लिया जाए.
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सिर्फ विचार, आदेश नहींः कोर्टहालांकि, सुप्रीम कोर्ट में इन सब उपायों पर सिर्फ चर्चा हुई है. इन्हें लागू किए जाने का निर्देश नहीं दिया गया है. कोर्ट ने खुद ये बात साफ करते हुए कहा कि बकाया ट्रैफिक चालान को बिजली के बिल में जोड़ने का सुझाव सिर्फ एक विचार के तौर पर दिया गया है. इसे लागू करने का कोई आदेश कोर्ट की ओर से नहीं है.
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