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गर्मी में कितना होना चाहिए गाड़ी में टायर प्रेशर? पॉइंट में नहीं PSI में बात कीजिए

कार के चक्कों में हवा (correct psi for Indian roads) के प्रेशर के साथ आलसपन, लापरवाही, नासमझी आपको जोखिम में डाल सकती है. खास तौर पर गर्मी के दिनों में. लोकल में गाड़ी चलाते समय तो शायद टायर प्रेशर पता चल भी जाए मगर हाइवे पर मुश्किल होता है. आपको क्या करना है, वो जान लीजिए.

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चक्कों में सही टायर प्रेशर कितना होना चाहिए

गाड़ी के चक्कों में हवा बेहद ही मामूली सी बात है. जब लगा कि कम हो गई तब भरवा ली. कभी मीटर की तरफ देखा भी नहीं होगा कि किस टायर में कितनी (correct psi for Indian roads) हवा गई है. जितनी भईया ने भर दी, उतनी ठीक. अरे-अरे बुरा मत मानिए. क्या कहा आप गाड़ी से उतरकर देखते हैं. बहुत अच्छी बात लेकिन आप जैसे थोड़े कम ही हैं देश में. बाकी का काम अंदाजे से चल रहा है. चक्कों का कम या ज्यादा प्रेशर गाड़ी पर कितना प्रेशर बना रहा, इस पर ध्यान कम ही जाता है.

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मगर यही आलसपन, लापरवाही, नासमझी आपको जोखिम में डाल सकती है खास तौर पर गर्मी के दिनों में. लोकल में गाड़ी चलाते समय तो शायद टायर प्रेशर पता चल भी जाए मगर हाइवे पर मुश्किल होता है. आपको क्या करना है, वो जान लीजिए.

कोल्ड PSI का कैलकुलेशन

गाड़ी के चक्कों में जो हवा भरी जाती है उसे PSI (Pound-force per square inch) में मापा जाता है. कोल्ड से मतलब मशीन से आने वाली ठंडी हवा. अपनी भाषा में इसे पॉइंट कह देते हैं. भईया 30 पॉइंट आगे और 32 पीछे कर देना. अपनी गाड़ी की ड्राइविंग सीट वाले दरवाजे के पास टायर प्रेशर की चिट चिपकी होती है. सिर्फ उसके हिसाब से हवा भरवाना है.

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आपको लगेगा कि टायर पर जो प्रेशर लिखा होता है उसका क्या. जनाब वो टायर की क्षमता बताता है कि वो अधिकतम कितना प्रेशर झेल सकता है. आपकी गाड़ी को कितना प्रेशर चाहिए, वो दरवाजे पर लिखा होता है. एक साइज के टायर बड़ी-छोटी, हल्की-वजनी गाड़ी में लगते हैं. इसलिए प्रेशर का काम गाड़ी के हिसाब से होगा.

correct psi for Indian roads
कोल्ड PSI का कैलकुलेशन

हैचबैक में आमतौर पर 30-33 PSI, सेडान में 32-35, कॉम्पैक्ट SUV में 33-36 और मिड-साइज़ SUV में 35-38 PSI होता है. अपना PSI पता करें. यही आपके लिए गर्मियों का बेसलाइन है. गर्मी में लंबी हाईवे ड्राइव के लिए, कोल्ड स्पेसिफिकेशन से 2 से 3 PSI ज़्यादा रखें. अगर आप परिवार और सामान के साथ गाड़ी चला रहे हैं, तो दरवाज़े पर लगे स्टिकर पर "फुल लोड" कॉलम देखें. मतलब पूरी भरी गाड़ी में कितनी हवा होना चाहिए. आमतौर पर इस समय पीछे के टायर में 3 से 4 PSI ज़्यादा रखा जाता है. स्पेयर टायर में हमेशा 4 PSI ज़्यादा रखें. ऐसा इसलिए क्योंकि जब इसकी वाकई में जरूरत होगी तब उसमें पर्याप्त हवा होनी चाहिए.

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अब बात अप्रेल-मई-जून की. हाईवे पर गाड़ी चलाते समय गाड़ी में हवा का बढ़ जाता है. सिर्फ़ गाड़ी चलाने से ही घर्षण के कारण 4-6 PSI हवा बढ़ जाती है. गर्मी से हर 5-6 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर 1 पीएसआई और बढ़ जाता है. माने हो सकता है कि 33 की जगह चक्के में 39 PSI दिखे. मगर आपको इस गरम हवा को पेट्रोल पंप पर या सड़क नहीं निकालना है. ऐसा करेंगे तो दूसरे दिन प्रेशर 27-28 मिलेगा. इसलिए गाड़ी के ठंडे होने पर सिर्फ 2-3 PSI हवा ही निकालिए.

बाकी अगर आपको इतने सब पचड़े में नहीं पड़ना तो एक TPMS (Tyre Pressure Monitoring System) लगा लीजिए. बताता रहेगा हवा का प्रेशर.

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