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कार के ऊपर तो कैमरा उड़ता नहीं, तो 360 डिग्री व्यू काम कैसे करता है?

360 Degree Camera in Car: 360 डिग्री कैमरा से ड्राइवरों को उनके आस-पास आ रही गाड़ियों की पूरी विजिबिलिटी मिलती है. यानी ये ब्लाइंड स्पॉट को काफी हद तक खत्म कर देता है, जिससे सेफ्टी भी बढ़ती है.

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360 डिग्री कैमरा से 'बर्ड्स आई व्यू' मिलता है. (फोटो-Amazon)

आजकल की मॉडर्न गाड़ियों में 360 डिग्री वाला कैमरा काफी कॉमन है. बेस से थोड़े ऊपर वाले मॉडल में जाते हैं, तो ये कैमरा मिल ही जाता है. कई लोग तो इसे 'जरूरत' बताते हैं और बेस वेरिएंट से ही इसकी डिमांड करते हैं. सिंपल है, 360 डिग्री कैमरा से आगे-पीछे, दाएं-बाएं और ऊपर का व्यू स्क्रीन पर दिख जाता है. लेकिन इससे एक सवाल भी आता है. वो यह कि कार के साथ-साथ कैमरा तो उड़ता नहीं, फिर छत का व्यू यानी 'बर्ड्स आई व्यू' कैसे दिख जाता है? इसका जवाब है सॉफ्टवेयर.

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दरअसल, कार की छत पर कोई भी कैमरा या ड्रोन कैमरा नहीं होता है. कैमरों को सिर्फ कुछ जगह पर फिट किया जाता है. ये अलग-अलग एंगल पर लगे कैमरा अपनी तरफ का व्यू दिखाते हैं और सॉफ्टवेयर इन्हीं नजारों को जोड़कर 'बर्ड्स आई व्यू' बना देता है. इसे देखकर ऐसा लगता है मानो कार के ऊपर ड्रोन उड़ रहा हो. 

CarADAS की रिपोर्ट के हवाले से बताते हैं कि कार में ‘बर्ड्स आई व्यू’ स्क्रीन पर दिखता कैसे है और ये काम कैसे करता है. 

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1. हर कैमरा अपने खास एंगल से लाइव वीडियो फुटेज कैप्चर करता है. माने कि आगे-पीछे, बाएं और दाएं साइड से.

2. सॉफ्टवेयर हर कैमरा की तस्वीर में कुछ कॉमन प्वाइंट को आइडेंटिफाई करता है. ताकि उन्हें गाड़ी के साइज के हिसाब से सही जगह पर फिट किया जा सके. यानी सभी तस्वीरें एक जगह जोड़ी जा सकें.

3. वाइड-एंगल लेंस इमेज को डिस्टॉर्ट (टेढ़ा या गोल) कर सकते हैं. सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों को सही से एडस्ट करता है, ताकि व्यू में सड़क की लाइनें और शेप सही तरीके से दिखाई दें.

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4. सही तस्वीरों को एक साथ जोड़ दिया जाता है. ओवरलैपिंग एरिया (वो हिस्सा जो दो चीजों में एक साथ कॉमन हो) को ब्लेंड करके एक स्मूद, पैनोरमिक व्यू बनाया जाता है. सॉफ्टवेयर सभी इमेज के रंग और ब्राइटनेस को भी एक जैसा कर देता है. ताकि व्यू बिल्कुल नेचुरल लगे.  

5. फिर 'बर्ड्स आई व्यू' गाड़ी के इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर दिखता है.

इसे आप स्मार्टफोन के Panoramic इमेज से समझ सकते हैं. इसमें भी कई सारी तस्वीरों को एक साथ मिलाकर दिखाया जाता है. सॉफ्टवेयर सभी तस्वीरों को एक साथ मर्ज कर देता है. रंग और ब्राइटनेस भी उसी प्रकार देता है, जिससे लगता है कि हमारी छत के साथ ही कोई कैमरा उड़ रहा है.

अगर आपको यकीन नहीं हो तो कार की छत पर एक बैग रख दीजिए. आपकी फोटो में वो नहीं दिखेगा क्योंकि ऊपर कोई कैमरा है ही नहीं. वैसे बिना ड्राइवर वाली Robotaxis और Autonomous व्हीकल में तो LiDAR सेंसर भी लगा होता है, ताकि रियल टाइम में जानकारी सॉफ्टवेयर तक पहुंच सके. 

थोड़ा बहुत इन कैमरा के फायदे भी बता देते हैं.

1. 360 डिग्री कैमरा से ड्राइवरों को उनके आस-पास आ रही गाड़ियों की पूरी विजिबिलिटी मिलती है. यानी ये ब्लाइंड स्पॉट को काफी हद तक खत्म कर देता है, जिससे सेफ्टी भी बढ़ती है.

2. 360 डिग्री का एरियल व्यू लाइव वीडियो तंग जगह पर पार्किंग करना आसान बना देता है. मतलब बार-बार पीछे गर्दन करके देखने का झंझट खत्म.

3. 360 डिग्री कैमरा लगातार वीडियो फुटेज कैप्चर करता है. इस वजह से ये इंश्योरेंस क्लेम की जांच में सबूत के तौर पर भी काम करता है.

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360 डिग्री कैमरा कई चीजों में काम आ सकता है. माने ब्लाइंड स्पॉट खत्म करना, पार्किंग को स्मूद बनाने में हेल्प करना और कॉन्फिडेंट बिल्ड अप करना. क्योंकि हमें हमारे आसपास चल रही ज्यादातर चीजों का पता चल जाता है. इससे ड्राइविंग और आसान लगती है. आपकी कार में ये कैमरा है, तो बढ़िया. अगर आप आफ्टर मार्केट से इसे लगवाने का विचार कर रहे हैं, तो किसी प्रोफेशनल से ही इसे फिट करवाएं. ध्यान दें कि कैमरा HD क्वालिटी हो, ताकि इमेज साफ दिखाई दें.

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