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E20 पर हंगामे के बीच कौन कह रहा 'E10 फ्यूल भी होना चाहिए'?

SIAM ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर E10 को बंद (E10 should continue) कर दिया जाता है और सिर्फ़ ज़्यादा इथेनॉल वाले ब्लेंड ही ईंधन के तौर पर उपलब्ध रहते हैं, तो बड़ी संख्या में गाड़ियां ऐसे ईंधन पर चलने को मजबूर होंगी जिनके लिए न तो उनके पार्ट्स उपयुक्त होंगे और न ही उनकी परफ़ॉर्मेंस को उस हिसाब से बेहतर बनाया गया होगा.

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E10 फ्यूल होना चाहिए था

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  • सरकार ने E20 इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को अनिवार्य कर दिया है और E22, E25, E27 के नोटिफिकेशन भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे यह ईंधन अब व्यापक पैमाने पर उपलब्ध है।
  • सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने पुरानी गाड़ियों के कम्पैटिबिलिटी और सुरक्षा कारणों से E10 ईंधन की समानांतर बिक्री जारी रखने की मांग की थी।
  • E20 के व्यापक उपयोग के बाद SIAM ने चेतावनी दी है कि पुरानी गाड़ियों को रेट्रोफिटिंग की आवश्यकता होगी और इसके बिना उनकी कार्यक्षमता तथा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

E20 फ्यूल सोशल मीडिया से होते हुए आपकी गाड़ी में पहुंच चुका है. Ethanol Blended Petrol की धार अब जंतर मंतर पर भी बह रही है. E22, E25, E27 का नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है. ऐसे में E10 फ्यूल की बात कौन ही करेगा?

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वही E10 फ्यूल जिसके हिसाब से देश में चलने वाली अधिकतर गाड़ियां बनी हुई हैं. लेकिन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) इसकी उपलब्धता चाहता है. इथेनॉल ब्लेंडिंग पर नीति आयोग के 2021 के रोडमैप से पता चलता है कि SIAM ने E20 के साथ-साथ E10 पेट्रोल की उपलब्धता जारी रखने की मांग की थी.

SIAM ने चेतावनी दी थी कि कम इथेनॉल वाले ईंधन को हटाने से भारतीय सड़कों पर पहले से मौजूद गाड़ियों के लिए कम्पैटिबिलिटी, सुरक्षा, फ़्यूल-एफ़िशिएंसी और चलाने में आसानी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

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SIAM का सुझाव

E20 के साथ E10 फ्यूल जारी रखने का सुझाव SIAM ने नीति आयोग की 'भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए रोडमैप: 2020-25' रिपोर्ट पर स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के दौरान दिए थे. यह रिपोर्ट 2021 में तब तैयार की गई थी जब भारत ज़्यादा इथेनॉल ब्लेंड वाले ईंधन की ओर बढ़ रहा था. उस समय भारत में E20 फ्यूल वाली गाड़ियां नाममात्र के लिए ही थीं.

यह दस्तावेज़ E20 पेट्रोल को लेकर चल रही नई बहस के बीच फिर से चर्चा में आया है. हाल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि इस ईंधन से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचता है. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक रिपोर्ट के Annexure D में दिए गए इनपुट में, SIAM ने तर्क दिया कि E20 के आने के बाद भी E10 को "प्रोटेक्शन ग्रेड" फ़्यूल के तौर पर उपलब्ध रहना चाहिए. 

SIAM ने कहा, "मौजूदा गाड़ियों के लिए ईंधन की उपलब्धता पक्की करने और ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए प्रोटेक्शन ग्रेड E10 ईंधन की समानांतर बिक्री ज़रूरी है." SIAM ने बताया कि जिन देशों ने ज़्यादा इथेनॉल वाला फ्यूल को अपनाया, उन्होंने बदलाव के समय कम इथेनॉल वाले ईंधन के विकल्प भी उपलब्ध कराए थे.

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E20 के हिसाब से बदलाव मुश्किल होगा

संगठन ने यह भी तर्क दिया था कि पुरानी गाड़ियों को ज़्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण पर बेहतर ढंग से चलाने के लिए उनमें बदलाव करना (रेट्रोफिटिंग) एक बहुत बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि पहले से ही कई तरह की गाड़ियां और अलग-अलग तरह के फ़्यूल-सिस्टम इस्तेमाल हो रहे हैं.

दरअसल 2023 से पहले की गाड़ियों का फ्यूल सिस्टम E20 के हिसाब से नहीं बना है. SIAM ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर E10 को बंद कर दिया जाता है और सिर्फ़ ज़्यादा इथेनॉल वाले ब्लेंड ही ईंधन के तौर पर उपलब्ध रहते हैं, तो बड़ी संख्या में गाड़ियां ऐसे ईंधन पर चलने को मजबूर होंगी जिनके लिए न तो उनके पार्ट्स उपयुक्त होंगे और न ही उनकी परफ़ॉर्मेंस को उस हिसाब से बेहतर बनाया गया होगा. 

रिपोर्ट में कहा गया, "इससे 2028 तक मौजूद सभी गाड़ियां इस्तेमाल के लायक नहीं रहेंगी, क्योंकि न तो उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री इसके अनुकूल होगी और न ही उनकी क्षमता या परफ़ॉर्मेंस को इसके हिसाब से बेहतर बनाया गया होगा. इससे गाड़ियों के पार्ट्स खराब हो सकते हैं, जिससे ईंधन का रिसाव हो सकता है और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कत भी हो सकती हैं."

E20 नुकसान कर सकता है 

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (ARAI) की एक स्टडी में पाया गया है कि E10-कम्पैटिबल गाड़ियों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से फ्यूल-सिस्टम के रबर के पार्ट्स खराब हो सकते हैं. हालांकि, इस रिपोर्ट में जो अभी तक पब्लिश नहीं हुई है, E20 फ्यूल के इस्तेमाल का समर्थन किया गया है. ये नतीजे भी 2023 से पहले की गाड़ियों के मालिकों की चिंताओं से मेल खाते हैं. 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टडी के तहत चार-पहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों ने "इंजन की ड्यूरेबिलिटी" (टिकाऊपन) का टेस्ट किय. जहां  एक कंपनी को 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं मिली, वहीं दूसरी कंपनी के मामले में, 809 घंटे तक टेस्ट किए गए इंजन में एग्ज़ॉस्ट वॉल्व के थर्मोमैकेनिकल फेलियर की समस्या देखी गई. हालाँकि, ARAI की स्टडी में E20 का मेटल के पार्ट्स पर कोई बुरा असर नहीं पाया गया. 

अब सुर बदले हैं

रिपोर्ट के मुताबिक तो ऐसा लगता है कि SIAM को भी नए पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों पर होने वाले असर को लेकर चिंता थी. मगर जब सरकार ने E20 अनिवार्य कर दिया तो अब उनके सुर भी बदले हैं. शनिवार को इथेनॉल को लेकर ऑटो उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. इसमें इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई. 

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्ज़ीक्युटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफ़ेयर्स एंड गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने कॉन्फ़्रेंस में इसे परफ़ॉर्मेंस के मामले में 'बेहतरीन ईंधन' बताया, जबकि एक दिन पहले ही एक इंटरव्यू में गुलाटी ने कहा था, "बेशक फ़्यूल एफ़िशिएंसी में कुछ कमी आती है." मारुति सुजुकी के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर ऑफिसर Rahul Bharti ने भी कहा कि E20 फ्यूल से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं होता है.

वीडियो: E20 पेट्रोल से खराब हो रही हैं गाड़ियां? जंतर-मंतर पर जनता ने सरकार को घेरा

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