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'E20 पेट्रोल कोई प्रयोग नहीं, ये लागू हो चुकी पॉलिसी', केंद्र सरकार ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया

Ethanol Blended Petrol को लेकर अब केंद्र सरकार ने बताया है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की नीति कोई एक्सपेरिमेंट नहीं है, सरकार ने यह भी बताया कि E20 नीति वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि यह राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (Biofuel Policy) का हिस्सा है.

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Ethanol Blended Petrol कोई प्रयोग नहीं है

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  • केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) प्रोग्राम कोई प्रयोग नहीं है, बल्कि यह लागू की गई राष्ट्रीय नीति है जो पूरे देश में उपलब्ध होगी।
  • इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल नीति के मामले में विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित याचिकाओं और उनके सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर के प्रयास के कारण इस नीति की कानूनी व्याख्या का एकसाथ समाधान खोजने की प्रक्रिया चल रही है।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2025-26 तक इथेनॉल आपूर्ति के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देने के बाद सरकार के कार्यक्रम की निरंतरता और उसके प्रभाव की जानकारी आगामी सुनवाईयों में स्पष्ट हो सकेगी।

Ethanol Blended Petrol (EBP) या कहें E20 फ्यूल, कोई प्रयोग (Ethanol mixing not an experiment) नहीं है. ये कहना भी गलत है कि इस नीति का प्रभाव अगले साल तक स्पष्ट हो पाएगा. माने अब देश में E20 फ्यूल ही मिलेगा. सरकार के 20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) प्रोग्राम को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स पर केंद्र ने सफाई दी है.

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सरकार ने मंगलवार, 30 जून को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम अभी एक प्रयोग है और इस नीति का असर अगले साल तक और साफ होगा. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की ओर से दायर एक याचिका पर बहस के दौरान यह बात कही थी.

अब इस पर अटॉर्नी जनरल के कार्यालय से सफाई आई है. सरकार ने कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में अदालत में दी गई दलीलों को गलत तरीके से पेश किया गया है, जबकि राष्ट्रीय इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पहले की तरह जारी है.

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E20 पर अब सरकार ने क्या बताया?

आजतक के संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि सरकार का 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 कार्यक्रम कोई एक्सपेरिमेंट नहीं है. माने यह कहना गलत है कि इस नीति का प्रभाव अगले साल तक स्पष्ट हो पाएगा, क्योंकि यह एक्सपेरिमेंट नहीं है बल्कि लागू की जा चुकी पॉलिसी है.

सरकार ने कहा कि दरअसल ​सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने दलील देते हुए कहा था कि 'डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट्स' को इथेनॉल के एलोकेशन से जुड़े समान मुद्दों वाली ऐसी ही रिट याचिकाएं मौजूदा वक्त में कई हाईकोर्ट्स में लंबित हैं.

ये भी पढ़ें: 'पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाना एक प्रयोग, असर अगले साल तक पता लगेगा', SC में बोली सरकार

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सरकार के मुताबिक कोर्ट को बताया गया था कि इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए याचिकाएं दायर की जा रही हैं, जिससे एक ही कॉन्ट्रैक्चुअल फ्रेमवर्क से उत्पन्न होने वाले कानून की व्याख्या के सवालों पर एक साथ विचार किया जा सके. दलील पर विचार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित ट्रांसफर याचिकाएं दायर की जाएं और जहां तक मौजूदा मामले का संबंध है, चालू इथेनॉल आपूर्ति 2025-26 के लिए इथेनॉल एलोकेशन के संबंध में यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाए.

केंद्र सरकार के मुताबिक सुनवाई के दौरान किसी भी वक्त यह दलील नहीं दी गई कि सरकार का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम 'एक्सपेरिमेंट' है.  

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