E-Rickshaws को बीच रास्ते बंद करने वाले ऐप BAT-BMS App इस समय खूब ट्रेंड कर रहा है. BAT-BMS App की मदद से कई लोग E-Rickshaws कनेक्ट करके उसको बंद कर रहे हैं. कुछ शातिर इस ऐप की मदद से ई-रिक्शा को हैक करके और फिर मददगार बनने की आड़ में 200-300 रुपये वसूल रहे हैं. सोशल मीडिया पर इसे ई-रिक्शा या टिर्री पर साइबर अटैक भी कहा जा रहा है. खैर ये सब तो चलता रहेगा मगर अब वो जान लीजिए जो बहुत जरूरी है.
मोबाइल ऐप से ई-रिक्शा रोका तो जिंदगी भर पछताओगे, लंबी जेल पक्की!
BAT-BMS App e-Rickshaws: अगर आप भी इस ऐप का इस्तेमाल करके किसी ई-रिक्शा को बंद करने की सोच रहे हैं, तो अपनी सोच पर तुरंत ब्रेक लगा लीजिए. ऐसा करना साइबर अपराध है.


अगर आप भी इस ऐप का इस्तेमाल करके किसी ई-रिक्शा को बंद करने की सोच रहे हैं, तो अपनी सोच पर तुरंत ब्रेक लगा लीजिए. ऐसा करना साइबर अपराध है. पकड़े जाने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
इंटरनेशनल कमीशन ऑफ साइबर सिक्योरिटी लॉ के चेयरमैन पवन दुग्गल के मुताबिक,
'आज का ई-रिक्शा सिर्फ एक रिक्शा नहीं है, बल्कि एक कंप्यूटर सिस्टम भी है. इसलिए अगर ये डिजिटल सिस्टम पर काम करता है, तो इसमें मेमोरी और डेटा से जुड़े कई फंक्शन होते हैं.'
माने जैसे किसी कंप्यूटर को हैक करना, उससे छेड़खानी करना एक अपराध है, वैसे ही मामला ई-रिक्शा का है.
पवन ने बताया,
जेल और जुर्माना'मेरे विचार से ये कोई सामान्य हरकत या मजाक नहीं, बल्कि एक अपराध है. ये सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66, जिसे धारा-43 के साथ पढ़ा जाता है, के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है.'
पवन दुग्गल के मुताबिक, ‘अगर कोई व्यक्ति ई-रिक्शा के कंप्यूटर सिस्टम में मालिक की जानकारी या सहमति के बिना बेईमानी या धोखाधड़ी की नीयत से एंटर करता है या उसमें छेड़छाड़ करता है, तो ये कानून के तहत अपराध माना जाएगा. ऐसे अपराध के लिए 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है’. इसलिए अगर रील देखकर आपका भी मन टिर्री की टर्र-टर्र बंद करने का हो रहा तो रहने दीजिए. वैसे भी ऐसा करना हादसों को न्योता देना है.
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BAT-BMS ऐप क्या है?एंड्रॉयड पर उपलब्ध ऐप जिसे शेन्ज़ेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी (SHENZHEN GRENERGY TECHNOLOGY) नाम की कंपनी ने डेवलप किया है. ये एक बैटरी मैनेजमेंट (BMS) ऐप है. इसकी मदद से बैटरी को ब्लूटूथ से कनेक्ट करके कंट्रोल किया जा सकता है. अब आपको लग रहा होगा कि बैटरी में ब्लूटूथ कैसे घुस गया, तो बता दें कि आजकल की मॉडर्न बैटरी में ब्लूटूथ लगा होता है. इसे Bluetooth Low Energy (BLE) कहते हैं. BMS का इस्तेमाल बैटरी के तापमान, वोल्टेज, करेंट को चेक करने के लिए होता है. ऐसे ऐप की मदद से बैटरी की चार्जिंग को ऑन और ऑफ भी किया जा सकता है. BMS ऐप ईवी में बहुत कॉमन है
वीडियो: BAT-BMS App से बीच सड़क बंद होते e-Rickshaw का पूरा सच














