The Lallantop

FASTag बनवाने जा रहे, इन स्टॉल पर फुल बैलेंस वाले आधे स्कैम के लिए तैयार रहिए!

FASTag Scam: हाइवे के स्टॉल से या टोल नाके के पास की दुकान से FASTag खरीदा तो पूरे चांस हैं आपको पूरा बैलेंस नहीं मिले. हो सकता है कि बचे हुए बैलेंस के नाम पर आपको कोई ट्रेवल इन्श्योरेन्स या ट्रेवलर प्लान चिपका दिया गया हो.

Advertisement
post-main-image
FASTag Scam (तस्वीर: बिजनेस टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • राह चलते या टोल नाके पर बनवाए गए FASTag में आधा बैलेंस वापस नहीं मिलता क्योंकि बचा हुआ पैसा ट्रेवलर पॉलिसी या इन्श्योरेन्स में चला जाता है।
  • स्टॉल वाले बैंक या एजेंसी द्वारा FASTag बनवाने पर बीमा चार्ज जोड़ने और टारगेट पूरा करने के कारण ग्राहकों का आधा पैसा बीमा में कट जाता है।
  • ग्राहक कस्टमर केयर से शिकायत करने और बैंक बदलने के बावजूद हटाए गए 200 रुपये वापस नहीं पा सकते, इसलिए ऐप से टैग बनवाना सुरक्षित माना जाता है।

अगर आप भी राह चलते या टोल नाके के पास लगने वाले स्टॉल से FASTag बनवाते हैं तो फास्ट तरीके से होने वाले आधे स्कैम के लिए तैयार रहिए. आधा इसलिए कहा क्योंकि इसमें सीधे-सीधे आपसे कोई ठगी नहीं होती, लेकिन FASTag बैलेंस आपको आधा ही मिलता है. बैलेंस वापस मिलने का कोई रास्ता नहीं क्योंकि बचा हुआ पैसा तो इन्श्योरेन्स या फिर किसी ट्रेवलर पॉलिसी में जा चुका होता है. कुछ समझ नहीं आ रहा ना. अजी कैसे समझ आएगा क्योंकि ये झोल है ही बड़ा अजीब. हम बताते कैसे.

Advertisement
FASTag के साथ बीमा चिपका रहे

आप सफर पर निकले और आपका FASTag ब्लॉक हो गया या आपके पास पहले से ही नहीं था. हाइवे पर आपको स्टॉल दिखा और आप पहुंच गए नया बनवाने. स्टॉल वाले ने आपसे कहा कि सर 600 रुपये लगेंगे. 400 का आपको बैलेंस मिलेगा और 100 रुपये डिपॉजिट होंगे और 100 मेरी कमीशन. आपने टैग बनवा लिया और लगे हाथ आपके अकाउंट में 200 बैलेंस आ गया. 200 कहां गया. स्टॉल वाले ने कहा कि थोड़े देर में आ जाएगा. आप भरोसा करके सफर आगे बढ़ा लिए.

200 तो बीमा में गए

सफर आपका खत्म भी हो गया मगर 200 नहीं आए. आपने स्टॉल वाले को फोन किया तो उसने पुरानी बात दोहराई. आपने थक हारकर FASTag इशू करने वाले बैंक या एजेंसी को फोन किया और अब आपको लगा झटका. आपके FASTag पर कोई ट्रेवल बीमा या फिर कोई ट्रेवलर प्लान एक्टिव है जिसके 200 रुपये कटे हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें: 20 रुपये सस्ता पेट्रोल आ गया, लेकिन अभी कोई गाड़ी वाला भरवाने नहीं जाएगा

अब आप कितना भी कस्टमर केयर से बहस कर लीजिए. 200 रुपये वापस आने से रहे. टैग बनाते समय आप सारे नियम और शर्तों को खुद ही ओके कर चुके हैं. स्टॉल वाले भईया को भी फोन करने का कोई फायदा नहीं. हाइवे पर वापस जाकर उससे लड़ाई करने से भी कुछ हासिल नहीं होगा. टैग का बैंक बदलने से भी कुछ नहीं होगा क्योंकि स्टॉल वाले हर बैंक या एजेंसी के टैग में ये बीमा आपको चिपकाया जाता है.

टारगेट का चक्कर बाबू भईया

अगर इतना पढ़कर आप स्टॉल वाले भईया को कोसने चले हैं तो उनकी गलती है नहीं. दरअसल बैंक या एजेंसी से उनको ये बीमा चिपकाने का टारगेट मिला है. वो तो बेचारे अपनी थोड़ी सी कमीशन के लिए ऐसा कर रहे हैं. हालांकि झूठ तो वो भी बोल रहे, मगर खेल तो टैग इशू करने वालों ने किया है. इसलिए जब भी स्टॉल से टैग इशू करवा रहे तो पहले ही साफ-साफ सब समझ लीजिए.

Advertisement

बेहतर होगा कि बैंक या एजेंसी के ऐप से टैग बनवाइए. यहां सब चार्जेस साफ लिखे होते हैं. मर्जी होम तो बीमा लीजिए नहीं तो सिर्फ टैग खरीद लीजिए.

वीडियो: कानपुर पुलिस ने बुर्के में आरोपी को कैसे पहचान लिया?

Advertisement