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टेस्ट ड्राइव वाली कार नई बताकर बेची, डीलर पर कोर्ट ने लगाया तगड़ा जुर्माना, मुआवजे का दिया आदेश

NCDRC ने पुरानी टेस्ट ड्राइव कार को नई बताकर बेचने पर पंजाब के टाटा मोटर्स डीलर पर बड़ा एक्शन लिया है. कमीशन ने ग्राहक की पूरी रकम ब्याज सहित लौटाने के अलावा 2 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

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डीलर ने ग्राहक को धोखा देकर टेस्ट ड्राइव वाली पुरानी कार नई बताकर बेच दी. (सांकेतिक फोटो: AI)

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  • नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) ने पंजाब के एक टाटा मोटर्स डीलर को आदेश दिया कि वह ग्राहक को पुरानी टेस्ट ड्राइव वाली कार नई बताकर बेचने के लिए पूरी रकम ब्याज सहित लौटाए।
  • पटियाला के साधु सिंह ने 2011 में टाटा मंजा एलैन कार खरीदी थी, जिसे नई बताया गया था लेकिन बाद में पता चला कि यह पहले टेस्ट ड्राइव के लिए इस्तेमाल हुई थी, जिसके कारण विवाद सामने आया।
  • NCDRC ने डिस्ट्रिक्ट कमीशन का आदेश बहाल करते हुए डीलर को मुआवजा और कानूनी खर्च देने का निर्देश दिया, साथ ही टाटा मोटर्स को इस मामले में कोई जिम्मेदारी नहीं ठहराई।

नेशनल कंज्यूमर कमीशन (NCDRC) ने पंजाब के एक टाटा मोटर्स डीलर पर बड़ा एक्शन लिया है. आरोप है कि डीलर ने ग्राहक को धोखा देकर टेस्ट ड्राइव वाली पुरानी कार नई बताकर बेच दी थी. कोर्ट ने डीलर को आदेश दिया है कि वह ग्राहक की पूरी रकम ब्याज के साथ वापस करे और अपनी कार ले जाए. इसके अलावा डीलर को 2 लाख रुपये का मुआवजा और 20 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देना होगा.

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क्या है पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला पटियाला के साधु सिंह का है. उन्होंने साल 2011 में हिंद मोटर्स इंडिया लिमिटेड से 7 लाख रुपये से ज्यादा कीमत में ‘टाटा मंजा एलैन कार’ खरीदी थी. उनका कहना था कि कार लेने के अगले ही दिन उसमें कई खराबियां सामने आ गईं. कई बार सर्विस सेंटर जाने के बावजूद समस्या ठीक नहीं हुई. बाद में उन्हें पता चला कि जिसे नई कार बताकर बेचा गया था, वह पहले टेस्ट ड्राइव के लिए इस्तेमाल की जा चुकी थी.

डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने 2012 में माना कि डीलर ने ग्राहक के साथ गलत किया है. उसने डीलर को पूरी रकम ब्याज सहित लौटाने, कार वापस लेने और 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. उस समय टाटा मोटर्स को जिम्मेदार नहीं माना गया था. बाद में स्टेट कमीशन ने डीलर के साथ टाटा मोटर्स को भी जिम्मेदार ठहराया और मुआवजा घटाकर 1 लाख रुपये कर दिया. इसके खिलाफ मामला ‘नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन’ (NCDRC) पहुंचा.

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'टाटा मोटर्स पूरी तरह बेकसूर'

NCDRC ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में कार में किसी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट का सबूत नहीं मिला. गलती सिर्फ डीलर की थी, जिसने इस्तेमाल की हुई कार को नई बताकर बेचा. कमीशन ने यह भी साफ किया कि डीलर और कार बनाने वाली कंपनी अलग-अलग हैं. अगर डीलर कोई गलत काम करता है तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

कमीशन ने आखिरकार डिस्ट्रिक्ट कमीशन का पुराना आदेश बहाल कर दिया. यानी ग्राहक को पूरी रकम ब्याज समेत वापस मिलेगी, 2 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा और टाटा मोटर्स को इस मामले में कोई जिम्मेदारी नहीं उठानी होगी.

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