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कार वालों के सामने हो रहे ये 3 स्कैम, सर्विस सेंटर वाला तो बहुत बुरा है

कार की सर्विस से लेकर पुरानी कार खरीदते समय कई स्कैम (Car Scams Every Car Owner Should Know) हमारे साथ होते हैं. ऐसे स्कैम जो होते तो हमारी आंखों के सामने हैं मगर दिखाई नहीं देते. अगर दिखाई भी देते हैं तो हम कुछ ज्यादा कर नहीं सकते क्योंकि फ्रॉड का कोई सबूत सामने नहीं होता है.

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कार स्कैम जो नजर में आते हैं समझ में नहीं.

आज आपकी कार से जुड़े तीन ऐसे स्कैम (Car Scams Every Car Owner Should Know) की बात करेंगे जो होते तो हमारी आंखों के सामने हैं मगर दिखाई नहीं देते. अगर दिखाई भी देते हैं तो हम कुछ ज्यादा कर नहीं सकते क्योंकि फ्रॉड का कोई सबूत सामने नहीं होता है. स्कैम जो कभी सर्विस सेंटर पर होते हैं तो कभी पुरानी गाड़ी खरीदते समय. कुछ स्कैम तो सड़क पर खुल्लम-खुल्ला होते हैं, मगर हमें पता नहीं चलते. जब आपको इन स्कैम के बारे में पता चलेगा तो आप भी एक पल को सोचने पर मजबूर हो जाएंगे- हां भाई ऐसा ही हुआ है.

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सर्विस सेंटर का स्कैम

Throttle Body Cleaning और Engine Flushing. थर्ड पार्टी सर्विस सेंटर पर लगाया जाने वाला नए तरीके का चूना. सर इसको करवा लीजिए. गाड़ी का माइलेज और परफ़ोर्मेंस सुधर जाएगा. अब जरा एक्सपर्ट से जानिए कि इनकी जरूरत कौन सी कारों को है. Castrol के मुताबिक Throttle Body Cleaning उन कारों के लिए है जो 1 लाख किलोमीटर से ऊपर चल चुकी हों. इसमें भी वो कारें जिनको रगड़ कर चलाया गया है उनके लिए ठीक है. माने जो आपकी कार ऑफिस से घर और घर से ऑफिस वाली है तो इसकी कोई जरूरत नहीं.

Engine Flushing मतलब इंजन को एकदम खाली करके साफ करना. पढ़ने में अच्छा लगेगा मगर 40 हजार किलोमीटर से कम में इसका कोई तुक नहीं. वो भी तब जब आपको लगे कि गाड़ी ढंग से नहीं चल रही. आवाज आ रही या माइलेज एकदम मर गया है. इसी तरह Injector Cleaning और फ़िल्टर बदलना भी जरूरी नहीं है. सर्विस सेंटर का ज्ञान लीजिए ही मत. हर गाड़ी की सर्विस बुक में और ऑनलाइन सर्विस मैनुअल में लिखा होता है कि कितने किलोमीटर पर क्या होना चाहिए. आमतौर पर कार उसी के हिसाब से ही चलती है. ‘बे-कार’ में पैसे बर्बाद मत कीजिए.

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Odometer स्कैम

गाड़ी चली है 1 लाख किलोमीटर, लेकिन मीटर दिखा रहा 40 हजार. ये झोल है गाड़ी के Odometer में जो पुरानी गाड़ियों में बहुत आम बात है ताकि पैसा अच्छा मिल सके. इस मामले में एजेंसी से लेकर ब्रोकर तक पर भरोसा करना ही नहीं है. एजेंसी वाले आमतौर पर ऐसा नहीं करते हैं मगर उनको ही किसी से झोल करके गाड़ी चिपका दी और क्या? इसलिए मीटर नहीं बल्कि सर्विस हिस्ट्री मांगिए.

इसके साथ बीमा की हिस्ट्री और ECU Scan (Electronic Control Unit scanners) डेटा मांग लीजिए. ये एक डिवाइस होता है जिसे गाड़ी की स्टीयरिंग के नीचे OBD2 पोर्ट में लगाया जाता है. इससे गाड़ी की पूरी कुंडली बांची जा सकती है. यहां जो दिखे वही सही. अब अगर ये नहीं मिल रहा तो फिर कहिए- ये चूना अपने चाचा को लगाओ.

Odometer
Odometer
डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) स्कैम

ये स्कैम एकदम गरीबी में आटा गीला होने जैसा है. BS6 कारों में डीजल इंजन बर्निंग से हानिकारक गैसें बाहर ना निकलें, इसके लिए इन कारों में DPF लगाया जाता है. DPF को डिजाइन किया गया है लंबी दूरी के लिए. माने कार को 60 से 80 km/h की हाई स्पीड पर नहीं चलाया तो DPF में क्लोगिंग की समस्या हो सकती है. अब इससे निपट लिए तो मार्केट में नकली DPF खूब मिलता है स्पेशली हाइवे पर. अब जो ये डलवा लिया तो फिर हो गया भंडारा. इसलिए सड़क चलते DPF मत ही खरीदें. कार कंपनी या उसके आधिकारिक सर्विस सेंटर से ही लेना अच्छा रहेगा.

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