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इंटरनेट पर पहली बार सोनम गुप्ता की बेवफाई का सच: पार्ट 2

Sonam gupta bewafa hai. ये लिखकर गूगल पर एंटर मारो. सबसे ऊपर आएगा 10 रुपए का ये नोट. तुड़ा मुड़ा हुआ सा नोट लेकिन गांधी की मुस्कराहट बरकरार. इस नोट पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है ‘सोनम गुप्ता बेवफा है.’ फेसबुक-व्हॉट्सएप पर बीते दिनों इस नोट की तस्वीर खूब वायरल हुई. लेकिन क्या किसी ने जानने की कोशिश की, कि इसके पीछे क्या कहानी है?

इसे देखकर हमारे साथियों ने सोनम गुप्ता की कथित बेवफाई की संभावित कहानियां लिखी हैं. ये सभी कहानियां काल्पनिक हैं, लेकिन उस सनकपन की पड़ताल करती हैं, जिसमें किसी ने इस नोट पर ये बात लिखी होगी.

हो सकता है इनमें से कोई कहानी आपको हंसाए, कोई रुलाए. लेकिन हार्ट बीट कंट्रोल करके पढ़ना. पहला पार्ट आप पढ़ चुके होंगे ऐसी उम्मीद है. न पढ़ा हो तो सबसे नीचे लिंक है. यहां दूसरा पार्ट पढ़ो.

1. सोनम ‘द सेल्फ डिपेंड’

by रजत सैन

10 को नोट पर लिखी ये लाइन सिर्फ एक लाइन नहीं है. ये दर्द है उस लड़के का(मैं लड़की को स्ट्रेट मानकर चल रहा हूं) जिसने सोनम से सस्ती वाली मोहब्बत की होगी. सस्ती इसलिए क्योंकि बेवफाई को बयां करने के लिए भी बड़ा ही सस्ता सा साधन चुना गया है. बताओ जहां जहां रेगुलेट होगा ये नोट, हर आदमी एक बार तो सोनम के बारे में सोचने लगेगा. सिर्फ सोनम ही लिख देता तो मेरे जैसे कई लड़कों का ध्यान सोनम कपूर की तरफ चला जाता. लेकिन नहीं फिर वो लड़का कैसे अपने मकसद में कामयाब होता. लिख दिया सोनम गुप्ता. अब इमेजिन करना पड़ रहा है कि कैसी रही होगी सोनम गुप्ता.

ज़रूर पहले राई के पहाड़ बनाए होंगे दोनो ने साथ में मिलकर. और जब लगा होगा कि लड़का कुछ ज़्यादा ही चेप हो रहा है तो कट ली होगी. जैसा मेरे दोस्त तरुण के साथ हुआ. 8 साल से रिलेशन में थे. सब ठीक था जब तक दोनो रोहतक में रह रहे थे. लेकिन उसकी गर्ल-फ्रेंड जैसे ही नौकरी के सिलसिले में दिल्ली आई, भूल गई तरुण को. एक साल हो गया. वो उसे गालियां देता नहीं थकता. रोज़ कह देता है कि भाई वो डिच कर गई. इतना डिप्रेस्ड रहता है कि पूरा दिन दिमाग में यही चलता रहता है. वो भी एक दिन कुछ ऐसा लिख दे तो बड़ी बात नहीं है.

लेकिन लिख के कैसा लगता होगा. क्या भावना होगी इसके पीछे. मन की भड़ास को एक मीडियम मिल जाता होगा. आधी भड़ास लिखने पर निकलती होगी, आधी तब जब दुनिया उसे पढ़के सोनम गुप्ता के बारे में सोचगी. जैसे इस वक्त मैं सोच रहा हूं. लड़के को सिम्पथाइज़ करते हुए, और बिना जाने लड़की को बेवफा समझ कर. कुछ साल बाद अगर ये नोट घूम फिरकर उसके पास पहुंचा तो वो खुश होगा. और अगर लड़की के पास पहुंचेगा तो वो उस लड़के को कोसने लगेगी. तो वहां जाकर सर्कल पूरा हो जाएगा. लेकिन तब तक पासे पलट चुके होंगे.

एक शेर याद आ रहा है:
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूं कोई बेवफा नहीं होता

2. सोनम बेवफा नहीं है

by ज्योति

उसकी सीट पक्की थी. वो रोज़ आती. और वहीं बैठती. लाइब्रेरी में सबको आदत-सी पड़ गई थी. कोई उसकी सीट पर नहीं बैठता था. किसी दिन लेट भी हो जाती तो वो सीट ख़ाली ही रहती. प्यारी-सी लड़की थी. किताबों से कुछ ज्यादा ही प्यार था. झोला भर-कर लाती. एसएससी की तैयारी तो नहीं कर रही थी. शायद सोशियोलॉजी या लिटरेचर की स्टूडेंट होगी. दिन में तीन-चार चाय ब्रेक हो जाते थे. सोनम गुप्ता नाम था. आइडी कार्ड गिर गया था. सौरभ ने नाम-वाम देख कर कार्ड लौटा दिया.

उसके बाद सोनम के सामने वाली सीट सौरभ की हो गई थी. कभी-कभार नज़रें मिल जाती तो मुस्कुरा देते. फिर एक दिन दोनों चाय पीते साथ दिखे. सिविल्स वाले सारे लड़के जल-भुन गए. उनको चाय पूछने की कला नहीं आती. वरना क्या पता सोनम उनमें से किसी के साथ चाय पी रही होती. यहां ये हिन्दी का लडका सुड़क-सुड़क कर चाय पी रहा है उसके साथ.

थोड़े दिन ही नैन मटके चल पाए. यूं कह लिजिए कि सिविल्स वालों कि नज़र लग गई. सोनम का कोई दोस्त उससे मिलने लाइब्रेरी आया. सोनम और वो दोनों बाहर चले गए. सौरभ ने दो-चार मिनट पढने की कोशिश तो की. पर दिल नहीं लगा. तो उठकर बाहर चला गया. चाय वाले से थोड़ा दूर सोनम और उसका दोस्त बैठे थे. सौरभ को देख कर सोनम ने आवाज़ लगाई “सौरभ इधर आओ, किसी से मिलवाती हूं.”

सौरभ को लगा किसी हिंदी मूवी की तरह सीन होने वाला है. सोनम कहीं यह ना कह दे “कुनाल, दिस इज़ सौरभ. सौरभ दिस इज़ कुनाल, हम इस जून शादी करने वाले है”

पर खुशकिस्मती कहिए, सोनम ने ऐसा कुछ नहीं कहा. वो बात करती रही. थोड़ी देर सौरभ अकेला बैठा रहा. चाय वाले से बतियाता रहा. तीन चाय खत्म होने पर सोनम आई. आते ही बोली “भईया, गरमागरम अदरक वाली चाय दे दो.”

“सौरभ के लिए भी बना दो, आज सुबह से हमने साथ नहीं पी है.”

“और तुम? यहां आकर क्यों बैठे हो? इतनी देर हो गई है. पढ़ना-वढ़ना नहीं है क्या?”

और फिर दोनों अपनी इंटेलेक्चुअल बातों में मशगूल हो गए. चाय वाले भईया ने खुल्ले लौटाते हुए सौरभ की तरफ स्माइल की. दस वाले नोट पर भईया ने कुछ लिख दिया था. सौरभ ने लाइब्रेरी में नोट खोला। “सोनम गुप्ता बेवफा” है को काटकर “सोनम गुप्ता बेवफ़ा नहीं है” लिखा हुआ था.

3. ओह! सोनम का साइन किया हुआ है ये नोट

by सुमेर सिंह राठौर
सोनम बड़ी अजीब लड़की थी. हमेशा कुछ ना कुछ उल्टा सीधा करती रहती. उसे पुराने नोट इकट्ठे करने का शौक था. उसकी किताबों में इधर-उधर पुराने नोट भरे रहते. 1 रुपए से लेकर 100 रुपए तक के नोट थे. बाकि 500 और 1000 के नोटों को वो नया समझती थी.

वो अपने दोस्तों को उनके बर्थडे या किसी भी खास दिन उन्हीं नोटों पर कुछ लिख कर दे देती थी. वो दोस्त भी उन नोटों को संभाल कर रखते थे.

इधर स्कूल का एक लड़का सोनम की इंस्टाग्राम पर लगी तस्वीरें देखकर पगलाया था. सोनम गुप्ता की प्रोफाइल का नोटिफिकेशन ऑन कर रखा था. वो ज्यों ही
फोटो डालती इधर खट से लाइक, कमेंट.

एक दिन स्कूल के बरामदे में सोनम ने उसे रोककर पूछा, अरे रवि क्या लगा रखा है ये. हर फोटो रियल टाइम में लाइक कर देते हो. चक्कर क्या है. रवि ने कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मुझे तुमसे प्यार हो गया है. तुम्हारे ध्यान में आ जाए इसलिए फटाफट लाइक करता रहता हूं.

सोनम गुप्ता ने नजर उठाकर रवि की तरफ देखा. मुस्कराई. अपनी किताब खोली. एक पुराना दस का नोट निकला. उसपर कुछ लिखा और समेटकर रवि को पकड़ा दिया.

रवि बाहर चाय की दुकान पर आया. एक चाय ऑर्डर की और वो नोट खोला. पढ़कर उसका मुंह उतर गया. नोट पर लिखा था सोनम गुप्ता बेवफा है. उसने गुस्से में वो नोट चायवाले को दे दिया. और चायवाले से घूमते-घूमते वो नोट पहुंच गया इंटरनेट पर.


इंटरनेट पर पहली बार सोनम गुप्ता की बेवफाई का सच: पार्ट 1

आपको क्या लगता है कि नोट पर ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’ क्यों लिखा गया, हमें lallantopmail@gmail.com पर अपनी कहानी लिखकर भेजिए. अगर हमें पसंद आया, तो हम इसे आपके नाम के साथ छापेंगे.

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