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आपको भी डर लगता है कि कोई लड़की फर्जी आरोप में आपको #MeToo में न लपेट ले?

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लोग अक्सर कहते हैं कि औरतें, औरतें होने का दुरुपयोग करती हैं. वो अपने पक्ष में बने कानूनों को मिसयूज करती हैं. दहेज, रेप, घरेलू हिंसा के फर्जी केस बनाकर पैसे ऐंठती हैं. भाई सही बात है. कानून और भरोसे का गलत इस्तेमाल तो जरूर होता है. इसलिए आप औरतों पर भरोसा करना छोड़ देते हैं. जब भी रेप और दहेज़ की खबर आती है, आप सबसे पहले ये वेरीफाई करना चाहते हैं कि कहीं औरत झूठ तो नहीं बोल रही. क्योंकि कई हजार में से 10 औरतों ने कभी फर्जी आरोप लगा दिया तो आप बाकी 990 औरतों पर डाउट करने से नहीं चूकेंगे. ये हम हैं, हम सब. एक समाज के तौर पर हमारा पहला इंस्टिंक्ट भरोसा न करना होता है क्योंकि हम अपने पुरुषों को निर्दोष दखना चाहते हैं.

PP KA COLUMN

हम आलोक नाथ और एमजे अकबर को भी निर्दोष ही देखना चाहते थे, जबतक उनपर आरोप लगाने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ती नहीं गई. हम एक-एक कर अपने हीरोज को गिरते देख रहे हैं. वो केवल पुरुषों के ही नहीं, कई महिलाओं के भी हीरोज थे. वो हमारे फेवरेट कॉमेडियन, एक्टर और पत्रकार थे. हर दिन इस मूवमेंट ने हमें बताया कि औरत को भक्षण की निगाह से देखना हमारे लिए कितना नॉर्मल है. इस मूवमेंट ने हमें वो औरतें दीं जिन्होंने एक दिन ये सोचना छोड़ दिया कि आप उनका भरोसा करेंगे या नहीं. वो कई साल चुप रहने के बाद बोल पड़ीं.

हर दिन इस मूवमेंट ने हमें बताया कि औरत को भक्षण की निगाह से देखना हमारे लिए कितना नॉर्मल है.
हर दिन इस मूवमेंट ने हमें बताया कि औरत को भक्षण की निगाह से देखना हमारे लिए कितना नॉर्मल है.

आज बहुत लोग उनका भरोसा नहीं कर रहे. लोग कह रहे हैं कि फ़्लर्ट को हरासमेंट बता दिया. कह रहे हैं कि जरूर ब्रेकअप के बाद बदला ले रही है. जैसे स्त्री फिल्म में स्त्री आ गई थी और सभी पुरुष दुबक गए थे, वैसा माहौल हो गया है. हालत खराब हैं, पसीने छूट रहे हैं. अब गए कि तब गए. कहीं एक्स ने कुछ पोस्ट तो नहीं कर दिया. कहीं किसी कॉलीग ने ट्विटर पर घसीट तो नहीं लिया. लड़के अपनी एक्स गर्लफ्रेंड्स से बेवजह माफ़ी मांग रहे हैं, कि कहीं कुछ हो न जाए. पुरुष औरतों से दो कदम दूर है. तौल-तौलकर बातें कह रहे हैं. लिफ्ट में, बसों में ऑफिस के गलियारों में औरतों के लिए अधिक जगह छोड़ रहे हैं. इसी दौर में एक पुरुष साथी ने कहा, ‘एक हफ्ते से दिमाग खराब हो रखा है. सुबह-शाम, दिन रात, डर लगा रहता है, कहीं कोई कैरेक्टर की धज्जियां न उड़ा दे.’ मैंने जवाब में कहा, ‘मैं समझ सकती हूं.’

लड़के, लड़कियों से डर रहे हैं.
लड़के, लड़कियों से डर रहे हैं.

मैं समझ सकती हूं क्योंकि मेरे पैदा होने के बाद से ही मेरे ‘कैरेक्टर’ का सवाल मेरे ऊपर डोलने लगा था. मुझपर यानी सभी लड़कियों पर. हमारी ट्रेनिंग बचपन से हुई, लिफ्ट और बसों में पुरुषों को जगह देने की. दूर रहना बेटी, कहीं वो कुछ कर न दे. भद्दे कमेंट्स करता है तो क्या, तुम चुप रहना, कहीं रेप न कर दे. वो कहता है वो प्यार करता है तो हां कर दो, कहीं तुम्हारे ऊपर तेज़ाब न फेंक दे. पति पीटता है तो चुप रह जाना, कहीं तलाक देकर बच्चों के साथ बेघर न कर दे. सोशल मीडिया पर पहले ‘हाय’ न भेजना, कहीं सेक्स का निमंत्रण न समझ ले. स्लीवलेस कपड़ों में तस्वीर न डालना, कहीं वेश्या न समझ ले. ऑफिस में मुस्कुरा न देना, कहीं शेयर्ड कैब में जबरन चूम न ले. डेट के लिए हां न कहना, कहीं वो ये न समझे कि तुम उसके बिस्तर पर होना चाहती हो. डेट पे जाना तो शराब न पीना, कहीं वो तुम्हारी ड्रिंक में कुछ मिलाकर तुमसे वो न लूट ले जिसे समाज तुम्हारी इज्ज़त कहता है.

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मैं समझ सकती हूं क्योंकि ये डर मेरे अंदर तबसे है जबसे मुझे एहसास दिलाया गया कि मैं लड़की हूं. मैं और मेरे जैसी करोड़ों लड़कियां रोज़ अपना कैरेक्टर भंग होने के डर में जीती हैं और अगर आप इससे सहमत नहीं हैं तो यकीन मानिए आपने कभी किसी लड़की से प्रेम नहीं किया है. आपने बहन, बेटी, मां, पत्नी, सहेली, प्रेमिका– कभी किसी से प्रेम किया ही नहीं. और अगर किया है तो उनके डर का एक टुकड़ा आप अपने सीने पर लेकर घूम रहे होंगे. क्योंकि मैं ये नहीं मानूंगी कि आपको अपनी नन्ही बच्ची के लिए डर नहीं लगता कि कोई उसे छू न ले.

आप कहते हैं आपको डर लगता है? एक हफ्ते में चुनिंदा लड़कियों का सच सुनकर डर लगता है? आपको देखकर वो बच्चा याद आता है जो डॉक्टर से सुई लगवाते समय भयभीत आंखों से रो रहा होता है.

आप डरते रहें, आप चुटकुले बनाते रहें, आप गालियां देते रहें मुझे और मेरी टीम को, मेरी सहेलियों को और हर उस लड़की को जो कुछ भी बोलती है. मगर एक एडवाइस लेना चाहें तो आपको बता दूं कि कोई फायदा नहीं है. क्योंकि तवारीख आगे की ओर ही बढ़ती है और भले ही ये सोशल मीडिया तक सीमित हो, ये मूवमेंट हमारी स्मृतियों से नहीं मिटेगा. और उनकी स्मृतियों से नहीं मिटेगा जिन्होंने पिछली बार लड़की को देखकर, उसे मांस का टुकड़ा समझ लार चुआई थी.

औरतों के पास कुछ नहीं है खोने को.
आप उनसे इतना कुछ पहले ही छीन चुके हैं कि अब औरतों के पास कुछ नहीं है खोने को.

जिस लड़की ने अपना नाम सोशल मीडिया पर सामने रख दिया है, उससे आप ज्यादा छीन नहीं पाएंगे क्योंकि उसके पास खोने को अब कुछ नहीं है. न रेप्यूटेशन, न पौरुष, न पैसा, न पावर. और जिनके पास ये सब है, वो खोएंगे. वो सब खोएंगे क्योंकि जिन लड़कियों के करियर वे खा गए थे, जिनका काम करना अपनी गन्दी नज़र से उन्होंने हराम कर दिया था, वो अपने हिस्से का सच बताने आई हैं.

अंग्रेजी में एक कहावत है. गेटिंग अ टेस्ट ऑफ़ योर ओन मेडिसिन. लड़कियां लड़कों से डरती हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में, स्कूलों में, कॉलेज में, ऑफिस में, घर में, ससुराल में. हफ्ते भर की बात है, आप भी जान लीजिए कि डर क्या होता है.

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meow: how me too for men is proving to be a taste of their own medicine

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