Submit your post

Follow Us

CAA पर राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान और इतिहासकार इरफान हबीब के झगड़े में गलती किसकी?

इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस 1935 में बना एक संगठन है. भारतीय इतिहासकारों की सबसे बड़ी अकादमिक और प्रफेशनल बॉडी. इसके संविधान के मुताबिक, इसका मुख्य काम है- भारतीय इतिहास के वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा और प्रोत्साहन देना. एक निष्पक्ष-वैज्ञानिक नज़रिये वाला इतिहास. जिसमें राजनीति और पूर्वाग्रहों की जगह न हो. 2019 में इसका 80वां सत्र बुलाया गया. जगह तय हुई- केरल की कन्नूर यूनिवर्सिटी. तारीख़- 28 से 30 दिसंबर.

बाकी सालों की तरह इस साल भी शायद ये सत्र अकादमिक सर्कल से इतर बहुत ज़्यादा ध्यान नहीं खींच पाता. मगर, एक हंगामे की वजह से ये सुर्खियों में आया. हंगामा हुआ केरल के राज्यपाल आरिफ़ मुहम्मद ख़ान के भाषण के दौरान. वो बतौर मुख्य अतिथि इस कार्यक्रम में बुलाए गए थे. हंगामे में शामिल थे मशहूर इतिहासकार इरफ़ान हबीब. जो IHC के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. ये मामला क्या है, पूरा घटनाक्रम क्या है, इस ख़बर में हम आपको यही बता रहे हैं.

क्या हुआ था?
28 दिसंबर की बात है. राज्यपाल को उद्घाटन भाषण देना था. मगर उनसे पहले कुछ स्पीकर्स बोल चुके थे. इनमें इरफ़ान हबीब और CPI (M) के नेता और राज्यसभा सांसद के के रागेश भी शामिल थे. रागेश के भाषण में CAA का हिंट था. रागेश ने इल्ज़ाम लगाया कि BJP भारतीय इतिहास को बदलने, इसे अपने तरीके से लिखने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में फिर राज्यपाल के बोलने की बारी आई. उन्होंने ये कहते हुए बोलना शुरू किया कि वो जो भाषण तैयार करके आए हैं, उससे थोड़ा हट रहे हैं. राज्यपाल ने कहा-

अगर आपने ये मसला (CAA) यहां नहीं उठाया होता, तो मैं भी वही बोलता जिसकी मैं तैयारी करके आया हूं.

राज्यपाल आगे बोले-

मुझे पक्के तौर पर पता है कि इस क़ानून का विरोध कर रहे लोगों की राय भ्रामक है. तथ्यों पर आधारित नहीं है. अलग राय रखने वालों को तीन बार महात्मा गांधी ने बातचीत के लिए बुलाया. तीन बार उनका ये प्रस्ताव ठुकरा दिया गया. जब आप बातचीत का दरवाज़ा बंद करते हैं, तब आप हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे होते हैं. आपको विरोध करने का पूरा अधिकार है क्योंकि असहमतियां तो लोकतंत्र का मूलतत्व हैं.

इसी क्रम में आगे राज्यपाल ये बताने लगे कि CAA की परिधि से मुसलमानों को क्यों बाहर रखा गया. उनके मुताबिक-

भारत के बंटवारे ने एक असामान्य स्थिति पैदा कर दी. केरल के लोगों पर बंटवारे का असर नहीं पड़ा, मगर उनके मन में बहुत गहरी संवेदना है. अगर आपको लगता है कि आपका पड़ोसी उत्तेजित हो रहा है, तो यू कम ऐंड जॉइन.

इस पर विरोध करने वाले अपनी जगहों से खड़े होकर प्रोटेस्ट करने लगे. उन्हें चुप कराते हुए राज्यपाल ने कहा-

बाधा और अव्यवस्था पैदा करने का कोई अधिकार नहीं है आपको. आप एक एटिट्यूड के साथ आए लगते हैं. आप मुझपर चिल्ला नहीं सकते.

मगर चीजें शांत नहीं हुईं. हल्ला-गुल्ला जारी रहा. ‘दी न्यूज़ मिनट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध के बावजूद राज्यपाल ने अपना भाषण जारी रखा और बोले-

मौलाना ने बंटवारे के बाद कॉन्वोकेशन में कहा था कि देश का बंटवारा गंदगी बहा ले गया लेकिन अब भी कुछ गड्ढे बचे हैं जिसमें पानी जमा हो गया है और उससे बदबू आ रही है. आप लोगों की वजह से ये बदबू आ रही है. मौलाना आज़ाद ने आपके लिए ही वो बात कही थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, यही वो पॉइंट था जब इरफ़ान हबीब ने अपनी जगह से उठकर आपत्ति जताई. जब राज्यपाल ने उन्हें अपने पास खड़े होकर आपत्ति उठाते देखा, तो वो बोले-

क्या मौलाना आज़ाद आपकी संपत्ति हैं? वो हमारे हैं.

ANI के एक ट्वीट में इस मौके की एक क्लिप है. इसमें राज्यपाल बोलते सुनाई देते हैं-

मौलाना आज़ाद ने आप ही के लिए कहा था. नहीं, नहीं, आपकी ज़ायदाद थे मौलाना आज़ाद? हमारी हैं, हमारी हैं. लेट दीज़ पीपल नो दे कान्ट शाउट मी डाउन. मैंने चुपचाप इनकी बातें सुनीं. इन्हें भी चुपचाप मेरी बातें सुननी चाहिए. नहीं सुनेंगे आप तो एक मिनट में बाहर हो जाएंगे.

आप धमकाएंगे यहां पर? इनको ज़रा देख लीजिए, ये डरा रहे हैं. उन्हें अपने मसले उठाने का हक़ है और मुझे उसपर अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है? पता नहीं, अगर जवाहरलाल नेहरू को उद्धृत करना बदतमीज़ी है, तो बेशक मेरी बदतमीज़ी है. आप तय करेंगे क्या कि मैं किसको उद्धृत करूं? ये तमीज़ है? आप कह रहे हैं कि मैं गोडसे को उद्धृत करूं. वो तमीज़ है? ज़रा मुशीर-उल-हसन साहब को जामिया में, कौन लोग थे जिन्होंने उनपर हमला किया था?

इरफ़ान हबीब इस विडियो में राज्यपाल के पास ही खड़े हैं. हॉल में बड़ी अस्त-व्यस्त स्थिति है. हंगामा शांत करने के लिए पुलिस ने प्रोटेस्ट कर रहे कुछ डेलिगेट्स को वहां से बाहर निकाल दिया. इसपर भी विरोध बंद नहीं हुआ. तब राज्यपाल को बीच में ही अपना भाषण रोककर डायस से हटना पड़ा.

राज्यपाल ने क्या आरोप लगाए?
इस मामले पर बाद में राज्यपाल ऑफिस के ट्विटर हैंडल से कुछ ट्वीट किए गए. एक ट्वीट में लिखा-

इरफ़ान हबीब ने मंच पर ही राज्यपाल के इनॉग्रल भाषण में व्यवधान डालने की कोशिश की. उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को उद्धरित करने के गर्वनर के अधिकार पर सवाल उठाया. चिल्लाते हुए कहा कि राज्यपाल को चाहिए वो गोडसे का हवाला दें. जब गवर्नर के ADC और सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो इरफ़ान हबीब ने उन्हें धक्का दिया.

एक अन्य ट्वीट में गवर्नर ऑफिस की ओर से लिखा गया-

कन्नूर यूनिवर्सिटी में आयोजित इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के 80वें सम्मेलन के दौरान श्री इरफ़ान हबीब ने CAA पर कुछ सवाल उठाए. लेकिन जब राज्यपाल ने इनका जवाब देने की कोशिश की, तब श्री हबीब ने अपनी सीट पर खड़े होकर गवर्नर को ‘फिज़िकली’ रोकने की कोशिश की. विडियो से ये साफ़ हो जाता है.

इस ट्वीट में विडियो का ज़िक्र किया गया. मगर पोस्ट के साथ कोई विडियो नहीं है. बस एक तस्वीर है. इसमें राज्यपाल डायस पर खड़े हैं. उनके बगल में एक सुरक्षाकर्मी है. उसके पास इरफ़ान हबीब हैं, जिनका हाथ दूसरी तरफ खड़े एक शख्स ने पकड़ा हुआ है.

इरफ़ान हबीब कौन हैं?
इतिहास की मोटा-मोटी तीन स्ट्रीम होती हैं- प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक. इरफ़ान हबीब मिडिवल और एन्सियेंट भारत के प्रख्यात इतिहासकार हैं. उन्होंने ऑक्सफर्ड से पढ़ाई की. अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में प्रफेसर रहे. AMU का हिस्ट्री डिपार्टमेंट उनके नाम से जाना जाता है. करीब 88 साल की उम्र हुई उनकी, लेकिन अब भी कई विश्वविद्यालयों में लेक्चर देने के लिए न्योते जाते हैं. अगर आपको मध्यकालीन भारत का इतिहास पढ़ना है, तो इरफ़ान हबीब को पढ़ना ही पढ़ना होगा. उन्हें पढ़े बिना आपका सिलेबस ही पूरा नहीं हो सकता. बल्कि बस इतिहासकार के तौर पर नहीं, एक सोशल साइंटिस्ट्स के तौर पर भी बहुत सम्मान है उनका. विचारधारा के तौर पर कहिए, तो इरफ़ान हबीब मार्क्ससिस्ट हैं. उन्होंने कट्टर हिंदुत्व और कट्टर इस्लाम, दोनों का हमेशा विरोध किया है.

प्रोग्राम के बाद इरफ़ान ने क्या कहा?
इरफ़ान का कहना है कि राज्यपाल को बुलाने का फैसला IHC का नहीं, कन्नूर यूनिवर्सिटी का था. इस पूरे विवाद को लेकर ‘द हिंदू’ ने इरफ़ान हबीब से बात की. इरफ़ान का कहना है-

गवर्नर को CAA पर बोलने के लिए नहीं बुलाया गया था. IHC का समय बर्बाद करने के लिए नहीं है. गवर्नर ऐसी चीजें बोल रहे थे, जिसका IHC से कोई लेना-देना नहीं. उनसे IHC को संबोधित करने को कहा गया था, न कि किसी राजनैतिक भीड़ को.

गवर्नर का प्रोटोकॉल तोड़े जाने की बात पर इरफ़ान ने कहा कि IHC पर ये प्रोटोकॉल लागू नहीं होता. उनके मुताबिक, पहले भी कई मौकों पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति जैसे लोगों ने बिना प्रोटोकॉल IHC में हिस्सा लिया है. राज्यपाल के इस आरोप पर कि उन्हें असॉल्ट करने की कोशिश हुई, इरफ़ान का कहना है-

88 साल की उम्र में किसी को असॉल्ट कैसे कर सकता हूं मैं.

अलीगढ़ सोसायटी ने क्या कहा है?
अलीगढ़ सोसायटी ऑफ हिस्ट्री ऐंड आर्कियोलॉजी (ASHA) का कहना है कि इरफ़ान हबीब राज्यपाल से बात करने गए थे. मगर गवर्नर के सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें धक्का दिया. ASHA ने जो घटनाक्रम बताया है, वो यूं है-

उद्घाटन सत्र के बाद अध्यक्षीय भाषण दिया प्रफेसर अमिया कुमार बागची ने. इसके बाद आरिफ़ मुहम्मद ख़ान को भाषण देने के लिए बुलाया गया है. संबोधन देने की जगह आदरणीय राज्यपाल ने CAA का बचाव करना शुरू कर दिया. उन्होंने इल्ज़ाम लगाया कि जो भी लोग CAA से सहमत नहीं, वो पाकिस्तानी एजेंट हैं जिनकी कभी हिम्मत नहीं हुई गांधी परिवार, ख़ासतौर पर जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी, की ग़लत नीतियों का विरोध करने की. इसके बाद राज्यपाल ने जो कहा, उसका आशय ये था कि केरल के लोग CAA को नहीं समझ सकते, क्योंकि उन्होंने भारत का बंटवारा और पाकिस्तान का बनना, इन्हें अनुभव नहीं किया.

बयान में आगे लिखा है-

राज्यपाल को ऐसी बातें करते सुनकर दो महिलाएं, जो कि JNU से रिसर्च कर रही हैं, चुपचाप अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गईं. उनके हाथ में एक कागज़ था, जिसपर ‘No To CAA’ लिखा हुआ था. उनके अलावा AMU और DU के कुछ प्रफेसर भी खड़े हुए और उन्होंने राज्यपाल को टोका कि वो जो कर रहे हैं, वैसा न करें. प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने घेर लिया था. पुलिस के लोगों ने हाथापाई की कोशिश की और उन दोनों लड़कियों को कस्टडी में लेना चाहा. मगर मंच पर मौजूद राज्यसभा के एक सांसद के बीचबचाव की वजह से ऐसा नहीं हो सका. जल्द ही AMU, DU, JNU और जामिया के कुछ रिसर्चर्स को डिटेन कर लिया गया. उन्हें एक घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया. अलीगढ़ के एक वरिष्ठ प्रफेसर को भी डिटेन करने की कोशिश हुई. 

ASHA के सदस्यों का कहना है-

जब विरोध बढ़ने लगा, तो मंच पर मौजूद इरफ़ान हबीब ने IHC के पदमुक्त होने जा रहे अध्यक्ष की हैसियत से अपनी जगह से उठे और कन्नूर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रफेसर गोपीनाथ रवींद्रन की ओर बढ़े. उनसे आग्रह किया कि जो हो रहा है, उसे रोकें. इरफ़ान हबीब ने राज्यपाल से कहा कि वो IHC को राजनैतिक अखाड़ा न बनाएं और जिस तरह की टिप्पणियां वो कर रहे हैं, उससे बचें. जैसे ही इरफ़ान हबीब वहां पहुंचे, ADC और राज्यपाल के सिक्यॉरिटी अफसर ने उन्हें धक्का दे दिया. उन्हें रोकने की कोशिश की. राज्यपाल भी आरोप लगाने लगे कि इरफ़ान हबीब उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. हैरानी की बात है कि लोकतांत्रिक तरीके से किए गए विरोध को राज्यपाल ट्वीट करके अपने ऊपर हमला बता रहे हैं. 

Statement of Aligarh Society of History and Archaeology [#ASHA]

The 80th Session of the Indian History Congress was…

Posted by Ali Nadeem Rezavi on Saturday, 28 December 2019

ASHA का ये भी आरोप है कि प्रोग्राम के दौरान JNU, AMU और DU के कई रिसर्चर्स को पुलिस ने डिटेन किया. बाद में पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

IHC ने क्या कहा?
‘इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस’ का भी बयान आया है इस मामले पर. उनका कहना है कि राज्यपाल को अपने उद्घाटन भाषण में निष्पक्ष होना चाहिए था. मगर उन्होंने पक्ष लेकर प्रोटोकॉल तोड़ा. उनके मुताबिक, मंच पर मौजूद लोगों ने बस उनके इसी पूर्वाग्रही रवैये पर आपत्ति जताई. IHC के मुताबिक, इरफ़ान हबीब का राज्यपाल के भाषण पर आपत्ति जताना प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं था.

कौन सही, क्या सही?
गवर्नर का कहना है कि उन्होंने ख़ुद से CAA का ज़िक्र नहीं छेड़ा. चूंकि उनसे पहले बोलने वालों ने ये मसला उठाया, सो इसपर बोला जाना ज़रूरी था. किसने किसको धक्का दिया, पहले किसने धक्का दिया, ये भी साफ़ नहीं हो पाया है. राज्यपाल ने अपने आरोप के समर्थन में जो तस्वीर शेयर की ट्विटर पर, उसमें भी एक शख्स इरफ़ान का हाथ पकड़े दिखते हैं. कुल मिलाकर चीजें बहुत स्पष्ट नहीं हैं.

राज्यपाल भाषण दे लेते, तो क्या हो जाता?
अब कुछ गंभीर सवाल बचते हैं. क्या इरफ़ान हबीब ने राज्यपाल को टोककर, उन्हें रोकने की कोशिश करके ग़लती की? हां, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. राज्यपाल को किसी ने भी आमंत्रण दिया हो, वो मुख्य अतिथि बनकर आए. भाषण देने की बारी थी उनकी. उन्हें बोलने देना चाहिए था. उनकी बातों से अहसमति भी हो, तब भी. जब तक कि वो हिंसा की अपील न करते. गाली न देने लगते. उन्हें उनके विवेक से बोलने देना चाहिए. फिर जब भाषण ख़त्म हो जाता, तो उसी मंच से असहमतियां भी रखी जा सकती थीं.

राज्यपाल विवेक दिखाते, तो बेहतर होता
और क्या राज्यपाल को वो गंदगी वाली बात कहनी चाहिए थी? क्या विरोध के बावजूद उन्हें ऐसी टिप्पणी करनी चाहिए थी? नहीं. उन्हें अपने पद का विवेक दिखाना चाहिए था. 70-72 साल पुरानी एक बात को ऐसे संदर्भ में उठाना कि सामने बैठे लोगों को ग़लत महसूस हो, ये तरीका नहीं होना चाहिए था. राज्यपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विरोध और असहमति ज़रूरी हैं. बातचीत से हल निकाला जाना चाहिए. गवर्नर ने सही बात कही है. IHC हॉल के अंदर राज्यपाल शायद अपनी विचारधारा में अल्पसंख्यक रहे हों. जिस दिन वो बहुसंख्यक जमात का हिस्सा हों, उस दिन भी उन्हें बातचीत और डायलॉग की अहमियत याद रहनी चाहिए. अकेले उनको नहीं, सबको ही याद रहनी चाहिए.

तथागत रॉय मेघालय के राज्यपाल हैं. ये उनके ट्विटर हैंडल पर लिखा उनके परिचय वाले हिस्से का स्क्रीनशॉट है.
तथागत रॉय मेघालय के राज्यपाल हैं. ये उनके ट्विटर हैंडल पर लिखा उनके परिचय वाले हिस्से का स्क्रीनशॉट है.

राज्यपाल को फैस वैल्यू पर नहीं लिया जा सकता
एक और ज़रूरी बात है. हमेशा बात होती है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, संवैधानिक संस्थाओं को कम-से-कम पक्षपात मुक्त तो दिखना ही चाहिए. ऐसा न लगे कि वो अपना अजेंडा चला रहे हैं. या किसी पॉलिटिकल पार्टी की लाइन को आगे बढ़ा रहे हैं. मगर ऐसा होता नहीं है. भारत में जिन पदों का सबसे ज़्यादा राजनैतिकरण हुआ, उनमें राज्यपाल की जगह भी शामिल है. हमारे पास मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय का भी उदाहरण है. जिन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर अपनी पहचान बताते हुए ‘राइट विंग हिंदू सोशियो पॉलिटिकल थिंकर’ लिखा हुआ है. वो कई बार बहुत सांप्रदायिक बातें लिख जाते हैं. उनका पक्षपात, उनका बायस छुपा नहीं रह जाता.

इस तरह की और भी कई मिसालें हैं. जिनकी वजह से राज्यपाल के पद की गरिमा छोटी होती है. वो अजेंडा लगने लगते हैं. ऐसे में उनकी कही बातें फेस वैल्यू पर नहीं ली जा सकती हैं. दूध और पानी करना ही पड़ेगा. CAA पर केंद्र सरकार हर मुमकिन रास्ते से अपना बचाव कर रही है. हर मुमकिन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर इसे सही ठहराने की कोशिश की जा रही है. IHC कार्यक्रम में इसका ज़िक्र नहीं होना चाहिए था. किसी और को भी नहीं करना चाहिए था. और, न ही राज्यपाल को करना चाहिए था. किसी को जवाब देने के लिए भी नहीं. अपना पॉइंट साबित करने के लिए भी नहीं. CAA को लेकर सरकार पर निशाना साधने या इसके बचाव में तर्क देने, दोनों में से किसी के लिए भी IHC सही मंच नहीं. अगर किसी और स्पीकर ने ये बात नहीं समझी, तब भी राज्यपाल को समझनी चाहिए थी. बल्कि उन्हें अपने भाषण के आख़िर में उस स्पीकर को उसकी ग़लती बता देनी चाहिए थी.


क्या योगी सरकार, बुलंदशहर में दंगा करने वालों को वसूली नोटिस भेजेगी?

Anti-CAA प्रदर्शन के दौरान यूपी पुलिस ने मेरठ में 9 राउंड फायरिंग की बात स्वीकार की

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

जवाब दिल जीत लेगा.

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.