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अमित मालवीय : जिन पर भाजपा के खिलाफ़ काम करने के आरोप लगते हैं

साल 2018. भाजपा के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा, यानी भाजयुमो के कुछ नेताओं को ट्विटर पर ब्लू टिक मिला. ब्लू टिक यानी जिसके लिए ट्विटर का छोटा-मोटा छौणा भी पगलाया रहता है. और वही ब्लू टिक, जिसके नाम के बग़ल में होने से इस बात की तस्दीक़ होती है कि प्रोफ़ाइल में जिसकी फ़ोटो लगी है, वो ही इंसान उस अकाउंट का असली मालिक है.

बहरहाल, इन नेताओं को ब्लू टिक मिला. अक्टूबर का महीना था. कहते हैं कि ये ब्लू टिक भाजयुमो की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम महाजन की जुगत पर मिला था. इसे यकीन इस बात से भी मिला कि कुछेक नवब्लू टिकियों ने पूनम महाजन को शुक्रिया भी कह दिया. लेकिन डार्क ट्रुथ है कि उत्सव की उम्र लम्बी नहीं होती. कुछ देर में ब्लू टिक ग़ायब हो गया. ग़ायब ऐसा कि फिर वापिस नहीं आया. जिन अकाउंट्स से शुक्रिया कहा जा रहा था, उन्हीं खातों से एक हैशटैग चल निकला #AntiBJPMalviya. इंडिया के टॉप ट्रेंड में चली गयी बात. ये अमित मालवीय के खिलाफ़ चला ट्रेंड था. वही अमित मालवीय, जो भाजपा के आईटी सेल के नेशनल इंचार्ज हैं. वही अमित मालवीय, जिनके बारे में ये बात चली कि उनके IT सेल के कहने पर ही ट्विटर ने पूनम महाजन के साथ के नेताओं का ब्लू टिक वापिस ले लिया. अमित मालवीय पर बस पूनम महाजन के कथित समर्थकों ने ही भाजपा के खिलाफ़ होने का आरोप नहीं लगाया, बल्कि हाल फ़िलहाल ऐसा आरोप सुब्रमण्यम स्वामी ने भी लगाया है.

सोशल मीडिया के नए रणनीतिकार अमित मालवीय
सोशल मीडिया के नए रणनीतिकार अमित मालवीय

हां. सुब्रमण्यम स्वामी ने पार्टी को 10 सितम्बर तक का वक़्त दिया था कि अमित मालवीय को आईटी सेल से हटा दें. वरना स्वामी अपना ख़ुद बचाव करेंगे. लेकिन दशकों पुराने नेता और अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी अमित मालवीय से अदावत क्यों पाल बैठे? जवाब है अमित मालवीय के अधीन काम करने वाला आईटी सेल, जिस पर सुब्रमण्यम स्वामी की ट्रोलिंग करने का आरोप है.

तो अमित मालवीय कौन हैं? कहाँ से आते हैं? पढ़ाई-लिखाई-नौकरी का लेखाजोखा क्या है? और सबसे ज़रूरी बात, भाजपा से कैसे जुड़े?

पहली वेबसाइट और पहला ट्विटर खाता

यूपी का शहर इलाहाबाद. अमित मालवीय यहीं के रहने वाले हैं. झुकाव हुआ कि बैंकिंग में जायेंगे. तो शुरुआती पढ़ाई के बाद दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टिट्यूट गए बीबीएम की डिग्री लेने. फ़ाइनैन्स में. 1995 से 1998 तक यहां पर पढ़ाई-लिखाई करने के बाद पुणे चले गए. सिम्बायोसिस इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ में. दो साल में वहां से फ़ाइनैन्स मैनेजमेंट का पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा लिया.

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पहले बैंकर थे, फिर बनाई वेबसाइट और आ गए बीजेपी में

अब अमित मालवीय बैंकर बन गए थे. सबसे पहले ICICI बैंक में गए. साल 2001 तक असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट पर काम किया. फिर 2003 तक एक दूसरी कम्पनी कैलोन में बिज़नेस एनालिस्ट के पद पर रहे. और उसके बाद अमित मालवीय ने लम्बी छलांग लगाई. लग गए HSBC बैंक में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट. सात साल तक काम करने के बाद अमित मालवीय के जीवन में आया साल 2010. लेकिन इसके ठीक एक साल पहले यानी 2009 ने ट्विटर पर खाता खोलने वालों में ये दो लोग भी थे. एक थे जनवरी में अकाउंट बनाने वाले नरेंद्र मोदी. दूसरे दिसम्बर में ट्विटर जॉइन करने वाले अमित मालवीय.

लेकिन इसी साल अमित मालवीय ने एक बड़ा काम शुरू कर दिया था. ख़बरें बताती हैं कि उन्होंने एक वेबसाइट डाल दी थी. Orkut और google plus के पचड़े के बीच friendsofbjp.org नाम की वेबसाइट सामने आ गयी. अमित मालवीय ने कथित तौर पर राजनीति में अपनी ज़मीन ढूँढ ली थी. लोगों को लॉगिन करके वेबसाइट से जुड़ना होता था. ये कोशिश वोट न देने वाले मिडिल क्लास को वोटिंग बूथ तक लेकर आने की थी.कहते हैं कि ये मुहिम इतनी सफल हो गयी थी कि लखनऊ में पार्टी-शार्टी भी हुई थी.

अब आता है साल 2010. अमित मालवीय इस साल बैंक ऑफ़ अमरीका में वाइस प्रेसिडेंट लग गए. चले गए बेंगलूरू. दो साल नौकरी की. लेकिन समय आ गया था कि अमित मालवीय अब बीजेपी में friends के ओहदे से थोड़ा आगे बढ़ें. मुंबई में तमाम बैंकों में वो काम कर रहे थे. और मुंबई भाजपा के एक और बड़े नेता की ज़मीन थी. नाम – पीयूष गोयल.

जानकार पत्रकार बताते हैं कि गोयल उस समय भाजपा के ख़ज़ांची थे. 2009 में पार्टी लोकसभा का चुनाव हार चुकी थी. चुनाव के दो साल पहले प्रद्युत बोरा की निगरानी में बना बीजेपी का IT सेल बहुत कमाल कर नहीं सका था. पार्टी नवीनीकरण के मोड में आ रही थी. तमाम विभागों में नए लोगों की ज़रूरत थी.

किसने थामा हाथ?

कट टू 2012. नए बैंक में नयी नौकरी को दो साल पूरे हो गए थे. पत्रकार बताते हैं कि अमित मालवीय और पीयूष गोयल में कुछ क़रीबी थी. ये क़रीबी Friends of BJP के ज़रिए आई थी. भाजपा के टैलेंट हंट में अमित मालवीय चुने गए. कहते हैं कि साल 2012 में ही अमित मालवीय भाजपा के आईटी सेल से जुड़ गए. उस समय IT सेल का कामधाम अरविंद गुप्ता देख रहे थे. पत्रकार नरेंद्र नाथ बताते हैं कि अरविंद और अमित ने मिलकर भाजपा की सोशल मीडिया की नई स्ट्रैटेजी तय की. चूंकि नरेंद्र मोदी की छवि को पटल पर लेकर आना था. और एक बड़ा व्यापक प्रोजेक्शन चाहिए था, तो काम ज़्यादा था. लिहाज़ा आईटी सेल डबल इंजन पर काम करने लगा.

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पीयूष गोयल, कहा जाता है भाजपा के खजांची गोयल ने अमित मालवीय का हाथ थामा था

साल 2014. भाजपा चुनाव जीत गयी. नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री. अगले साल यानी 2015 में अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए. पार्टी बिहार और दिल्ली में हार चुकी थी. बहुत सारा बदलाव किया जाना बचा था. डिजिटल फ़्रंट पर सरकार को बड़े फ़ैसले लेने थे. अरविंद गुप्ता को आईटी सेल से लाकर MyGov का प्रोजेक्ट दिया जाना था. ये काम हो गया 2015 में. और इसी साल अमित मालवीय वो बने, जो वो आज हैं. आईटी सेल के राष्ट्रीय इंचार्ज.

काम करने का तरीक़ा

अब तक जो काम बहुत केंद्रित तरीक़े से चल रहा था, उसकी कार्यप्रणाली अमित मालवीय ने थोड़ी बदली. साल 2016 में इंडिया फ़ाउंडेशन के जम्मू में आयोजित पांचवें यंग थिंकर्स मीट में भाषण देते हुए अमित मालवीय ने कहा,

“भाजपा के नज़रिए से देखें तो अगले दो सालों तक गवर्नेंस ही प्रमुख मुद्दा होगा… साथ ही भाजपा कई सारे असम्बद्ध ग्रुप्स और माध्यमों के साथ मिलकर काम करेगी ताकी मुद्दों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को अवगत कराया जा सके.”

ये भाषण इंडिया फ़ाउंडेशन की वेबसाइट पर मौजूद है.

अमित मालवीय ने कहा कि वो भाजपा को और ज़्यादा असम्बद्ध ग्रुपों से जोड़ेंगे, और इसका परिणाम उन्हें मिला भी.
अमित मालवीय ने कहा कि वो भाजपा को और ज़्यादा असम्बद्ध ग्रुपों से जोड़ेंगे, और इसका परिणाम उन्हें मिला भी.

बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपी ख़बर के हवाले से बात करें तो 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में अमित मालवीय का खुल्ला खेल फ़र्रुख़ाबादी हो गया. मतलब? मतलब ये कि एक साल पहले इंडिया फ़ाउंडेशन में दिए गए अपने भाषण को अमित मालवीय जी रहे थे. ख़ुद प्रयाग के थे और कुछ साल आगरा में भी रहे थे. ख़बर दावा करती है कि इन्हीं असम्बद्ध ग्रुपों से निकल रहे Whatsapp मैसेजों ने संघ परिवार की इस चुनाव में बहुत मदद की. भाजपा जीत गयी. गोरखनाथ मंदिर से निकलकर योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंच गए.

IT सेल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

अब अमित मालवीय का क़द बढ़ चुका था. वो थोड़ा मज़बूती से पार्टी में खड़े थे. लेकिन जिस समय अमित मालवीय कामयाबी का मेयार देख रहे थे, उस समय उनकी टीम हज़ारों आरोपों से गुज़र रही थी. सोशल मीडिया पर कहा जाने लगा कि आईटी सेल का काम ट्रोलिंग करना है. पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने I am a Troll नाम से किताब लिखी. इसमें साध्वी खोसला के हवाले से बातें लिखी गयी थीं. खोसला आईटी सेल की पूर्व मेंबर होने की बात कहती थीं. अरविंद गुप्ता के साथ काम करने का दावा करती थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें रोज़ बताया जाता था कि सरकार और पार्टी पर सवाल उठाने वालों को सोशल मीडिया पर घेरना है. ट्रोल करना है. अरविंद गुप्ता ने नकार दिया कि खोसला कभी आईटी सेल से जुड़ी थीं.

अमित मालवीय के काम में सबसे बड़े अवरोध फ़ेक न्यूज़ की वजह से हैं. फ़ैक्ट चेक वेबसाइटें उन्हें गाहे-बगाहे टटोलती रहती हैं.
अमित मालवीय के काम में सबसे बड़े अवरोध फ़ेक न्यूज़ की वजह से हैं. फ़ैक्ट चेक वेबसाइटें उन्हें गाहे-बगाहे टटोलती रहती हैं.

अमित मालवीय और उनकी टीम पर झूठी जानकारियां फैलाने के बहुतेरे आरोपों की फ़ेहरिस्त है. फ़ेहरिस्त इतनी लम्बी कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग उन्हें फ़ेक न्यूज़ की फ़ैक्टरी का मालिक कहते हैं. अमित मालवीय कोई ट्वीट डालते हैं या रिट्वीट करते हैं, फ़ैक्ट-चेक करने वाली वेबसाइटें अक्सर सच सामने लेकर आ जाती हैं. उदाहरणों से देखिए.
28 दिसंबर 2019. देश भर में CAA के खिलाफ़ प्रदर्शन हो रहे थे. तो लखनऊ में भी ऐसा प्रोटेस्ट हुआ. अमित मालवीय ने इस दिन ट्वीट किया कि लखनऊ में हुए प्रोटेस्ट में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए गए.

अमित मालवीय के इस ट्वीट की फ़ैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ ने पड़ताल की. निकलकर आया कि लखनऊ में प्रोटेस्ट करने वाले ‘काशिफ़ साब ज़िंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे. काशिफ़ ओवैसी वाली पार्टी AIMIM के लखनऊ मुखिया थे.

अमित के 15 नवम्बर 2017 के ट्वीट को देखिए. उन्होंने राहुल गांधी का एक क्लिप किया हुआ वीडियो शेयर किया. राहुल गांधी बोलते दिख रहे थे कि ऐसी मशीन लगाऊँगा, इधर से आलू डालूंगा, उधर से सोना निकलेगा. राहुल गांधी का मज़ाक़ उड़ने लगा.

राहुल गांधी ने इस रैली का पूरा तथाकथित वीडियो अपलोड कर दिया. उसमें वो कहते दिख रहे थे, कुछ महीने पहले यहां बाढ़ आयी 500 करोड़ रुपये दूंगा, (पीएम मोदी ने) एक भी रुपया नहीं दिया. आलू के किसानों से कहा, ऐसी मशीन लगाऊंगा, इस साइड से आलू घुसेगा, उस साइड से सोना निकलेगा… ये मेरे शब्द नहीं हैं, नरेंद्र मोदीजी के शब्द हैं.

इसके अलावा 2018 में भी चुनाव आयोग की घोषणा से पहले ही अमित मालवीय ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखें बता दी थीं. इस पर सोशल मीडिया पर उनकी बहुत किरकिरी हुई थी. लोग कहने लगे कि अमित मालवीय लगे हाथ लोकसभा चुनाव की डेट भी बता दें. अमित मालवीय ने ट्वीट डिलीट किया. और बाद में पार्टी की तरफ़ से सफ़ाई दी गयी कि अमित मालवीय ने न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के आधार पर ये ट्वीट किया था.

तमाम आरोपों के बाबत हमने अमित मालवीय को कुछ सवाल भेजे हैं. सवालों पर अमित मालवीय का जवाब आता है, तो हम ज़रूर आपको बतायेंगे.

और कहने वाले कहते हैं, अमित मालवीय भाजपा के लिए आंख का तारा हैं. आईटी सेल पर आरोप तो लगते हैं, फ़ेक न्यूज़ फैलाने के और ट्रोलिंग के. लेकिन वो कहते हैं ना, ‘बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?’


लल्लनटॉप वीडियो : सुब्रमण्यम स्वामी ने BJP IT सेल हेड अमित मालवीय को हटाने की क्यों मांग की?

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