Submit your post

Follow Us

सिर्फ़ 6 लोगों की इस मीटिंग के टलने को पी चिदंबरम ने 'अभूतपूर्व' क्यूं कह डाला?

29 सितंबर से 01 अक्टूबर, 2020तक होने वाली ‘मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी’ की बैठक पोस्टपोन कर दी गई है. और फिर विशेषज्ञ कह रहे हैं कि देश की बिगड़ रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के एक उम्दा प्रयास को सरकार ने ही गड्ढे में धकेल दिया. तो मीटिंग कब तक के लिए रुक गयी है? कुछ निश्चित नहीं है. ये 6 सदस्यों की कमिटी है, लेकिन अभी इसमें सिर्फ़ 3 लोग हैं. MPC की बैठक हो पाए इसके लिए आवश्यक है कि कम से कम 4 लोग इस कमिटी में हों. मतलब स्टाफ़ की शॉर्टेज़ इस मीटिंग के टलने का कारण है.

# सदस्यों की संख्या कम क्यों है?-

इस समिति में 3 सरकार के और 3 बाहरी लोग होते हैं. सरकार के तीनों लोग तो हैं लेकिन बाहरी लोगों की नियुक्ति अब तक नहीं की गई है. पिछले महीने उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था. RBI का कहना है कि लोग तो सेलेक्ट हो गए हैं लेकिन जॉइनिंग-फ़ॉर्मेलिटीज़ पूरी नहीं हुई हैं. मतलब नए सदस्यों का बैकग्राउंड और सिक्यूरिटी चेक वग़ैरह.

# इस मीटिंग के न होने या पोस्टपोन होने से क्या फ़र्क़ पड़ेगा-

तुम पास हो, या न हो, क्या फ़र्क़ है/ बेदर्द थी ज़िंदगी, बेदर्द है.

RBI बैंक्स का बैंक भी है और देश की मौद्रिक नीति भी देखता है. (तस्वीर: PTI)
RBI बैंक्स का बैंक भी है और देश की मौद्रिक नीति भी देखता है. (तस्वीर: PTI)

RBI को ‘बैंकों का बैंक’ कहा जाता है. मतलब जैसे हम लोग बैंक से ब्याज़ पर क़र्ज़ लेते हैं और बैंक में पैसे जमा करते हैं ताकि ब्याज़ मिले. ठीक वैसे ही बैंक RBI से पैसे उधार लेते हैं, और वहां पर पैसे जमा करते हैं.

# बैंक जब RBI से पैसे उठाते हैं तो उन्हें RBI को ब्याज़ देना पड़ता है, इस ब्याज़ को ही रेपो रेट कहते हैं.

# बैंक RBI को पैसे दें और उनको इसपर RBI के द्वारा ब्याज़ मिले तो उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

अब-

# जितनी कम या ज़्यादा ब्याज़ दर पर बैंक्स को RBI से पैसा मिलेगा, उतनी ही कम या ज़्यादा ब्याज़ दर पर बैंक से आम लोगों को उधार मिलेगा.

# RBI में पैसे जमा करने पर जितना कम या ज़्यादा ब्याज़ बैंकों को मिलेगा, हमें भी बैंक में पैसे जमा करने पर उसी हिसाब से कम या ज़्यादा ब्याज़ मिलेगा.

तो ये जो रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट है, ये मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में ही डिसाइड होता है. हर तीन महीने में. बिला नागा. और इसी पर निर्भर करती है ढेर सारी चीज़ें. केवल आपको लिए गए क़र्ज़ पर मिलने वाले ब्याज़ की दर, और जमा पैसों पर मिलने वाला ब्याज़ ही नहीं, बाज़ार में उपलब्ध कैश (लिक्विडिटी) भी इसी पर निर्भर है.

# तो-

पी चिदंबरम का ट्वीट पढ़िए. हिंदी में है. स्थिति कितनी गंभीर है पता चलेगा-

रेडियो वाले दिनों में, जब किसी विशेष स्टेशन को सुनना होता था तो, रेडियो को उस स्टेशन पर सेट करने की प्रक्रिया को ट्यूनिंग कहते थे. फिर अगर एक स्टेशन पकड़ में आ जाए, फिर धीरे-धीरे घुंडी घुमाकर उसे और क्लियर करने की प्रक्रिया को फ़ाइन ट्यूनिंग कहते थे.

इसी तरह की फ़ाइन ट्यूनिंग की बात पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने अगले ट्वीट में की है.

उनका आशय ये है कि इस वक़्त देश की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है, कि एक पॉलिसी बना दी और बस बैठ गए. उन पॉलिसीज़ को लगातार फ़ाइन ट्यूनिंग की आवश्यकता है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था वाले रेडियो में विकास वाला स्टेशन क्लियर पकड़े और लगातार पकड़े.

यूं अगर फ़ाइन ट्यूनिंग करने वाली संस्था ही किसी ‘टेक्निकल कारण’ के चलते निष्क्रिय हो जाए तो फिर क्या ही कहा जाए. और वो भी तब जब देश भयानक आर्थिक संकट से गुज़र रहा हो.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास. इनके कंधों पर ही देश की मौद्रिक नीति का पूरा भार है. (तस्वीर: PTI)
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास. इनके कंधों पर ही देश की मौद्रिक नीति का पूरा भार है. (तस्वीर: PTI)

ICICI सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री ए. प्रसन्ना ने इस बारे में बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया

यह शर्मनाक है. सरकार और आरबीआई के पास सदस्यों की नियुक्ति के लिए कम से कम तीन महीने का समय था. और अभी तक वे (नियुक्ति करने में)असफल रहे हैं. हमारे पास अर्थव्यवस्था को सही कर सकने के लिए सिर्फ़ एक बटन था- मौद्रिक नीति. और उससे जुड़ी इस तरह की अनिश्चितताएं बिलकुल भी सहायक सिद्ध नहीं होतीं.

यानी GDP गर्त में है. अर्थव्यवस्था डूब चुकी हुई बताई जा रही है. और मीटिंग नहीं होगी. मीटिंग सरकार की कथित अनदेखी और बेध्यानी की वजह से नहीं होगी. आलोचकों की नज़र से देखें तो संभवत: सरकार ने उपाय निकालने का एक मौक़ा गंवा दिया है.


वीडियो देखें:

CAG ने GST को लेकर मोदी सरकार के कामकाज पर क्या सवाल खड़े किए?-

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्या चल रहा है?

हथियार बनाने वाली सरकारी कंपनी ने ही कर दिया सेना के साथ खेल, जानकर आपका भी खून खौल उठेगा

हथियार बनाने वाली सरकारी कंपनी ने ही कर दिया सेना के साथ खेल, जानकर आपका भी खून खौल उठेगा

विदेशी कंपनी से बचते रहे, देसी ही चपत लगा गई

गैंगरेप मामले में हाथरस के DM मदद के रुपये गिनाने लगे, ट्विटर पर लोगों ने धो दिया

गैंगरेप मामले में हाथरस के DM मदद के रुपये गिनाने लगे, ट्विटर पर लोगों ने धो दिया

डीएम साहब ने एक-एक रुपये का पूरा हिसाब दिया है.

केंद्र पर सवाल उठाने वाले NGO ने भारत से कामधाम समेटा, कहा- सरकार प्रताड़ित कर रही है

केंद्र पर सवाल उठाने वाले NGO ने भारत से कामधाम समेटा, कहा- सरकार प्रताड़ित कर रही है

लम्बे समय से ऐम्नेस्टी का कामधाम सवालों के घेरे में रहा है.

हाथरस गैंगरेपः ट्विटर पर फूटा लोगों का गुस्सा, बोले- फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं

हाथरस गैंगरेपः ट्विटर पर फूटा लोगों का गुस्सा, बोले- फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं

19 साल की दलित लड़की को रेप के बाद बेरहमी से मारा. 15 दिन इलाज के बाद उसकी मौत हो गई.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बारे में एम्स की रिपोर्ट से एक बड़ा खुलासा हुआ है

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बारे में एम्स की रिपोर्ट से एक बड़ा खुलासा हुआ है

सीबीआई अब मेडिकली ये तय कर सकेगी कि सुशांत ने आत्महत्या की थी या हत्या हुई थी

क्या इस वायरल वीडियो में टेरेंस लुईस ने नोरा फतेही को गलत ढंग से छुआ?

क्या इस वायरल वीडियो में टेरेंस लुईस ने नोरा फतेही को गलत ढंग से छुआ?

नोरा फतेही ने खुद हकीकत बता दी है.

सुपरओवर से बहुत पहले किस ओवर में हार गई थी MI?

सुपरओवर से बहुत पहले किस ओवर में हार गई थी MI?

विराट की कप्तानी में कैसे बंध गए पोलार्ड-किशन.

सुपरफॉर्म में होकर भी इसलिए सुपरओवर खेलने नहीं आए ईशान किशन

सुपरफॉर्म में होकर भी इसलिए सुपरओवर खेलने नहीं आए ईशान किशन

रोहित ने बताया ईशान को ना खिलाने का रीज़न.

हथियारों की कौन-सी लंबी-चौड़ी खेप खरीदने जा रहा है भारत?

हथियारों की कौन-सी लंबी-चौड़ी खेप खरीदने जा रहा है भारत?

रक्षा मंत्रालय ने 28 सितंबर को इसे हरी झंडी दी है.

किसानों को आतंकी कहने वाली कंगना रनौत के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया

किसानों को आतंकी कहने वाली कंगना रनौत के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया

BMC के साथ पहले ही कोर्ट केस चल रहा है.