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दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती: दौड़ में बाहर हुए अभ्यर्थी दोबारा फिजिकल टेस्ट की मांग क्यों कर रहे?

30 जून 2021. दिल्ली पुलिस का पुलिस ट्रेनिंग स्कूल वजीराबाद. ग्राउंड में दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए फिजिकल टेस्ट हो रहे थे. अभ्यर्थी ग्राउंड पर दौड़ रहे थे. इसी बीच तेज हवा चलने लगी जो जल्दी ही धूल भरी आंधी में बदल गई. फिजिकल टेस्ट में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आए अभ्यर्थियों का कहना है कि इस आंधी में भी उनका टेस्ट जारी रहा. आंधी की वजह से वे निश्चित समय सीमा के अंदर दौड़ पूरी नहीं कर पाए और उन्हें बाहर कर दिया गया. 30 जून को फिजिकल टेस्ट देने वाले अभ्यर्थी इसे अपने साथ हुआ भेदभाव बता रहे हैं और फेयर टेस्ट की मांग कर रहे हैं.

पिछले साल आई थी भर्ती

पिछले साल दिल्ली पुलिस ने 5846 कॉन्स्टेबल पदों पर भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी. 1 अगस्त से 7 सितंबर 2020 तक इसके लिए आवदेन मांगे गए. 27 नवंबर से 14 दिसंबर तक इसके लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई. फिर लिखित परीक्षा पास करने वालों को फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया. फिजिकल टेस्ट मई में होने वाला था लेकिन कोरोना की भयावह दूसरी लहर को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया था. कोरोना केसेज कम हुए तो फिर से नया नोटिफिकेशन आया और फिजिकल टेस्ट 28 जून से 26 जुलाई तक होना तय हुआ. फिजिकल टेस्ट के लिए कुल 67 हजार 740 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था. इन्हीं में से एक राहुल कहते हैं,

हमारे साथ अन्याय हुआ है. हमारा बैच 9:15 पर दौड़ाया गया. बीच में ही आंधी के साथ धूल-मिट्टी उड़ने लगी. हमारे आंख और मुंह में मिट्टी चली गई. ऐसे में हम दौड़ कहां से पूरी करते और उसके बाद दिल्ली पुलिस डिपार्टमेंट ने हमारी एक भी नहीं सुनी. हमें बाहर निकाल दिया. अब एक बैच को अच्छी स्थिति में दौड़ और एक बैच को आंधी के साथ धूल-मिट्टी में दौड़. ये तो अनफेयर है.

महीनों से फिजिकल टेस्ट की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी दिल्ली पुलिस के रवैये से निराश हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने ग्राउंड पर मौजूद पुलिसकर्मियों से शिकायत की, लेकिन उन्होंने हाथ खड़े कर दिए. दौड़ में शामिल हुए एक अभ्यर्थी समीर बताते हैं,

जब हमारी दौड़ हो रही था तभी तेज आंधी, रेतीला तूफान आ गया था. और इसी में हमारा टेस्ट हुआ. जब हमने शिकायत की तो पहले तो हमें इधर से उधर भगाते रहे. कभी अपील डेस्क तो कभी यहां, कभी वहां. जब हमने विरोध किया तो उन्होंने हमें डांटकर भगा दिया.
नॉर्मली जितने बच्चे एक बार में दौड़ते हैं उनमें से करीब 40-50 प्रतिशत बच्चे एक बार में पास हो जाते हैं. लेकिन हमारे टाइम 86 में से केवल 6 बच्चे ही पास हुए. अब आप अंदाजा लगा लीजिए कि कितना बुरा मौसम था. 8 महीने से रेगुलर हम इसकी तैयारी कर रहे हैं. परसों से आए हुए हैं हम यहीं पड़े हुए हैं. कुछ हिसार से आए हैं कुछ जयपुर से आए हैं. पैसे भी खत्म हो गए. घर भी वापस जाना है. लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है.

फिजिकल टेस्ट का टाइम टेबल. जिसमें रिजर्ड डे के तौर पर 10 दिन रखा गया है. (लाल घेरे में रिजर्व डे)
फिजिकल टेस्ट का टाइम टेबल. जिसमें रिजर्ड डे के तौर पर 10 दिन रखा गया है. (लाल घेरे में रिजर्व डे)

अगले दिन यानी कि एक जुलाई को इन अभ्यर्थियों ने दिल्ली पुलिस रिक्रूटमेंट सेल में ज्ञापन दिया और रिजर्व डे पर फिर से फिजिकल टेस्ट की मांग की. दौड़ में शामिल एक और अभ्यर्थी आशीष बताते हैं,

ग्राउंड में रेत वगैरा थी. तो सब एकदम से उड़कर आने लगा. सबके मुंह में नाक में रेत भर गई थी. इसी में दौड़ भी हो रही थी. 1600 मीटर दौड़ना होता है 6 मिनट में. जो लोग बाहर 1600 मीटर 5 मिनट 30 सेकेंड या 5 मिनट 40 सेकेंड तक में पूरा कर लेते थे वो सब यहां क्वालिफाई ही नहीं कर पाए. फिजिकल 28 जून से शुरू होकर 27 जुलाई तक रेगुलर होना है. इसके बाद 10 दिन रिजर्व है. जैसे अगर बारिश आ जाए, मौसम खराब हो जाए तो फिर उसके लिए. जैसे कल मौसम खराब हुआ था तो कल फिजिकल कैंसिल करवा के रिजर्व डे में करवाना चाहिए था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हम यही चाहते हैं कि रिजर्व डे में आप टेस्ट करवा लीजिए.

अभ्यर्थियों का कहना है कि रिजर्व डे की व्यवस्था ही इसीलिए की जाती है कि यदि मौसम खराब हो जाए या किसी अन्य कारण से कोई व्यवधान आ जाए तो रिजर्व डे में टेस्ट कराया जा सके. इसीलिए ये अभ्यर्थी दिल्ली पुलिस रिक्रूटमेंट सेल से रिजर्व डे पर टेस्ट कराने की मांग कर रहे हैं. इस संबंध में जब हमने दिल्ली पुलिस रिक्रूटमेंट सेल की डीसीपी श्वेता चौहान के ऑफिशियल नंबर पर कॉल किया तो उनके स्टाफ ने बताया इस संबंध में जानकारी ग्राउंड इंचार्ज से ही मिल सकती है. ये ग्राउंड इंचार्ज का काम है. जो डिसीजन होगा, वहीं से होगा.

दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का कहना है कि ग्राउंड पर उन्हें कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला. आशीष बताते हैं,

जब आंधी आई तो हमने मना किया कि ट्रैक भी नहीं दिख रहा है. हम इसमें कैसे दौड़ पाएंगे? आगे से एकदम तेज हवा लग रही थी और सामने कोई दौड़ रहा है या नहीं, ये भी नहीं पता चल पा रहा था. इस पर जिन लोगों की वहां पर ड्यूटी थी उन लोगों ने कहा कि हमारे हाथ में तो कुछ भी नहीं है. अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो उन लोगों ने भी कोई हेल्प नहीं की.

यानी हर कोई अपने हाथ खड़े कर दे रहा है और दूसरे को जिम्मेदार बता रहा है. अभ्यर्थी ग्राउंड से ऑफिस और ऑफिस से ग्राउंड के चक्कर काट रहे हैं. काफी प्रयास करने के बाद भी पुलिस ट्रेनिंग स्कूल वजीराबाद के ग्राउंड इंचार्ज से हमारा संपर्क नहीं हो सका. इस मामले में जो भी अपडेट होगा, आगे वो हम आप तक पहुंचाते रहेंगे.


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