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जिस मंदिर के पास हजारों करोड़ रुपये हैं, उसके 50 प्रॉपर्टी बेचने के फैसले पर हंगामा क्यों हो गया

आंध्र प्रदेश. दक्षिण भारत का एक राज्य. इसी राज्य में चित्तूर नाम से एक जिला है, जहां तिरुमाला कस्बा है. इसी कस्बे में है वेंकटेश्वर मंदिर. इसी मंदिर को तिरुपति बालाजी मंदिर, तिरुपति मंदिर और तिरुमाला मंदिर भी कहते हैं. इसका कामकाज देखता है तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD). TTD ने पिछले दिनों एक फैसला किया, जिस पर हल्ला हो गया. इसके तहत मंदिर की कुछ जमीनों को बेचने का फैसला लिया गया. जैसे ही बात खुली, वैसे ही विवाद का पिटारा भी खुल गया. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम निशाने पर आ गया. तेलुगूदेशम पार्टी, बीजेपी सहित कई दलों ने कड़ा रुख अपना लिया. चौतरफा हमले झेलने के बाद TTD ने फैसला वापस ले लिया.

पर हुआ क्या था

तिरुपति बालाजी मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में मंदिर के पास 8700 किलो सोना था. वहीं मंदिर के 12,000 करोड़ रुपये बैंकों में जमा था. बैंक को उस समय सालाना करीब 845 करोड़ रुपये ब्याज से मिलते थे. मंदिर की संपत्ति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं. मंदिर के नाम देश के कई राज्यों में जमीनें, मकान और प्लॉट हैं. 23 मई को इसी बारे में एक खबर आई. इसमें कहा गया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने अलग-अलग राज्यों में मौजूद 50 जमीनों को बेचने का फैसला किया गया. इनमें से 26 संपत्तियां आंध्र प्रदेश, 23 तमिलनाडु और एक उत्तराखंड में थीं. ये जमीनें मंदिर को दान में मिली थीं. मंदिर प्रशासन को उम्मीद थी कि इन्हें बेचने से करीब 24 करोड़ रुपये आ सकते हैं.

तिरुमाला तिरुपति मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है. सालाना यहां पर सैकड़ों करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है. (Photo: Tirumala Tirupati Devasthanam)
तिरुमाला तिरुपति मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है. सालाना यहां पर सैकड़ों करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है. (Photo: Tirumala Tirupati Devasthanam)

और ये संपत्ति बेचनी क्यों थी

पीटीआई के अनुसार, 30 अप्रैल, 2020 को तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने तमिलनाडु में बेचे जाने वाली संपत्तियों की लिस्ट जारी की. इनमें मकान, मकान की जगह, खाली जमीनें, खेती की जमीनें शामिल थीं. देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी ने कहा था कि यह संपत्तियां श्रद्धालुओं ने मंदिर को कई साल पहले दान की थीं. लेकिन ये संपत्तियां छोटी हैं और इनका रख-रखाव नहीं हो सकता. साथ ही इनसे कमाई भी नहीं है.

फिर विपक्षी दलों ने क्या किया

फैसला खबर बना और मीडिया में छपा. जैसे ही यह हुआ, बवाल हो गया. राजनीतिक दलों के साथ ही धार्मिक संगठनों ने भी मंदिर प्रशासन को आड़े हाथों ले लिया. ‘द हिंदू’ अखबार के अनुसार, आंध्र प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष कन्ना लक्ष्मीनारायण ने कहा कि फैसला वापस लिया जाए. श्रद्धालुओं की ओर से दान में मिले उपहारों को बेचने से लोगों की भावनाएं आहत होंगी.

बीजेपी ने सोशल मीडिया पर भी कैंपेन छेड़ दिया. इसके तहत नारा दिया #SaveLordBalajiLands यानी भगवान बालाजी की जमीनों को बचाओ. इस बालाजी की तस्वीर के साथ नारे को बीजेपी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपनी डीपी के रूप में लगाने को कहा. बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव, सुनील देवधर जैसे नेताओं ने भी कैंपेन के तहत अपनी डीपी बदल ली.

बीजेपी के अलावा और किसने किया विरोध

बीजेपी के अलावा आंध्र की जनसेना पार्टी भी विरोध में उतर आई. इस पार्टी के मुखिया मशहूर एक्टर पवन कल्याण हैं. उन्होंने मंदिर प्रशासन पर भक्तों की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया. इनके अलावा कांग्रेस, तेलुगूदेशम पार्टी और सीपीआई-एम ने भी मंदिर प्रशासन का विरोध किया. सबने कहा कि मंदिर की संपत्ति बेचने का फैसला वापस किया जाए.

धार्मिक संगठनों ने भी मोर्चा खोला

विश्व हिंदू परिषद (विहिप), मंदिर बचाओ अभियान जैसे संगठनों ने भी विरोध किया. विहिप ने चेतावनी दी कि फैसला वापस नहीं हुआ, तो कार सेवा की जाएगी. मंदिर बचाओ अभियान ने सरकार से धार्मिक परिषद बनाने को कहा, जिससे कि मंदिरों की संपत्ति की देख-रेख हो. उसकी ओर से कहा गया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के फैसले की देखा-देखी बाकी मंदिर भी संपत्ति बेचने लगेंगे.

लेकिन फैसले पर अड़ा रहा मंंदिर प्रशासन

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन सबके बीच तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम अपने फैसले पर अड़ा रहा. चेयरमैन सुब्बा रेड्डी ने कहा कि वह नियमों के तहत कदम उठा रहा है. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को अगर फायदा लगता है, तो वह अचल संपत्तियों को बेच सकता है, एक्सचेंज कर सकता है और गिरवी रख सकता है. 1974 से यह परंपरा चली आ रही है. 1974 से 2014 के बीच तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने ऐसी 129 संपत्तियों को बेचा, जो काम की नहीं थीं.

आमतौर पर तिरुपति बालाजी मंदिर में 2-3 लाख श्रद्धालु आते हैं. विशेष उत्सवों पर यह संख्या बढ़ जाती है. (Photo: Tirumala Tirupati Devasthanam)
आमतौर पर तिरुपति बालाजी मंदिर में डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु आते हैं. विशेष उत्सवों पर यह संख्या बढ़ जाती है. (Photo: Tirumala Tirupati Devasthanam)

मंदिर प्रशासन ने सफाई भी दी

लेकिन विवाद बढ़ता गया. ऐसे में 25 मई को देवस्थानम ने सफाई दी. देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी ने कहा कि अभी संपत्ति बेचने के बारे में आखिरी फैसला नहीं हुआ है. यह केवल एक प्रस्ताव था. इस बारे में अगली मीटिंग में विचार किया जाएगा. इस बारे में सभी लोगों और पक्षों से भी बात की जाएगी. उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों को बेचने का फैसला जनवरी, 2016 में लिया गया था. उस समय आंध्र में तेलुगूदेशम पार्टी की सरकार थी. साथ ही ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य भी दूसरे थे. उस समय संपत्तियों को बेचने के बारे में एक सब कमिटी ने सिफारिश की थी.

राज्य सरकार ने लगाई रोक

इसके बाद 25 मई को जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने संपत्ति बेचने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया. इसमें मंदिर प्रशासन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा. साथ ही कहा कि इस मामले में अंतिम फैसले तक 50 संपत्तियों को बेचने के प्रस्ताव को स्थगित किया जाता है.


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