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यूपी जनसंख्या नियंत्रण विधेयक पर 'हिंदू-मुस्लिम' करने से पहले VHP ने क्या-क्या तर्क दिए?

उत्तर प्रदेश में रविवार 11 जुलाई को नई जनसंख्या नीति लॉन्च कर दी गई. सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद इसे लॉन्च किया. लेकिन यूपी की नई चाइल्ड पॉलिसी से जुड़े विधेयक को लेकर कई तरह की आपत्तियां जताई गई हैं. विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने यूपी के जनसंख्या नियंत्रण कानून से जुड़े ड्राफ्ट में बदलाव करने की अपील की है. इस बाबत उसने सोमवार 12 जुलाई को राज्य के विधि आयोग को पत्र भी लिखा है. VHP ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में एक बच्चा पैदा करने के नियम को इस विधेयक से हटाया जाए. पत्र में VHP के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार ने कानून को लेकर कई सुझाव दिए हैं. इनमें क्या-क्या कहा गया है, ये जानने से पहले इस बिल से जुड़ी खास बातों पर गौर फरमा लेते हैं.

क्या कहता है बिल?

उत्तर प्रदेश के राज्य विधि आयोग द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक का नाम है- यूपी पॉपुलेशन कंट्रोल स्टेबिलाइजेशन एंड वेलफेयर एक्ट, 2021. इस कानून में केवल दो बच्चे पैदा करने पर जोर दिया गया है. ड्राफ्ट कहता है कि परिवार नियोजन को अपनाने वाले परिवारों को सरकार द्वारा लाभ दिए जाएंगे. उन्हें सरकारी सेवाओं, योजनाओं, नौकरियों आदि में प्राथमिकता दी जाएगी. दो से ज्यादा बच्चे करने पर सरकारी सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है. वहीं, केवल एक बच्चा पैदा करने वालों को सरकार कुछ विशेष सुविधाएं देगी. कानून कहता है,

– गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवार अगर एक बच्चे के पैदा होने के बाद ही नसबंदी करवा लेते हैं तो उन्हें 80 हजार रुपये की वित्तीय राशि दी जाएगी.
– साथ ही उस (इकलौते) बच्चे की पूरी पढ़ाई का खर्च और अन्य सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी.
– एक बच्चा करने वाले सरकारी कर्मचारी को 12 महीने का मातृत्व या पितृत्व अवकाश दिया जाएगा.
– ऐसे कर्मचारियों को मुफ्त स्वास्थ्य और बीमा पॉलिसी मिलेगी आदि.

– कानून कहता है कि सरकार से मिलने वाला फ्री राशन केवल चार सदस्यों वाले राशन कॉर्ड कार्ड पर ही दिया जाएगा.
– जो लोग दो से ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे, उनकी पंचायती एवं स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने की मान्यता समाप्त हो सकती है.
– सरकारी नौकरियों में आरक्षण और आवेदन की पात्रता भी खत्म की जा सकती है.

Yogi Adityanath
रविवार 11 जुलाई को यूपी की जनसंख्या नीति 2021 को लॉन्च करते सीएम योगी. (तस्वीर- पीटीआई)

VHP के तर्क

ये तो हो गई कानून की बात. लेकिन इसके कुछ सेक्शन पर विश्व हिंदू परिषद ने आपत्ति जताई है. राज्य विधि आयोग को लिखे पत्र में VHP के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक वर्मा ने कहा है कि उनका संगठन इस बिल की कई बातों से सहमत है- जैसे जनसंख्या में स्थिरता लाना और दो बच्चे पैदा करने की पॉलिसी को बढ़ावा देना. लेकिन विधेयक के सेक्शन 5, 6(2) और 7 का VHP समर्थन नहीं करती. इनमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी और अन्य लोगों को केवल एक बच्चा पैदा करना चाहिए. विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि विधेयक से जुड़ी ये बातें इसके उद्देश्यों से मेल नहीं खातीं. इस आधार पर VHP ने ड्राफ्ट में बदलाव करने की अपील की है.

हिंदू संगठन ने सुझाव देते हुए कहा है कि यूपी सरकार इन सेक्शन्स पर फिर से विचार करे. साथ ही टोटल फर्टिलिटी रेट यानी TFR को एक निश्चित समय में 1.7 तक लाने वाली बात को भी विधेयक से हटाया जाए.

पत्र में वीएचपी ने लिखा है,

‘किसी समाज में जनसंख्या तब स्थिर होती है, जब प्रजनन काल में महिलाओं में बच्चा जनने की औसत संख्या मुश्किल से ही दो से ऊपर हो. ये (जनसंख्या नियंत्रण) तब होता है जब TFR 2.1 हो जाए. TFR के इस स्तर पर औसतन दो बच्चे पैदा होते हैं और अतिरिक्त 0.1 का मतलब इस संभावना से है कि कुछ बच्चे प्रजनन की आयु तक पहुंचने से पहले ही मर रहे हैं. लिहाजा, पॉपुलेशन स्टेबिलिटी के लिए टू-चाइल्ड पॉलिसी सही मानी जाती है. हर महिला के औसतन दो से कम बच्चे होने से जुड़ी पॉलिसी समय के साथ जनसंख्या में कमी का कारण बनती है. इसके कई नकारात्मक सामाजिक और आर्थिक परिणाम होते हैं.’

वीएचपी के कार्यवाहक अध्यक्ष ने आगे कहा है,

‘एक सिकुड़ती जनसंख्या में काम करने वालों और उन पर निर्भर रहने वाले लोगों का अनुपात प्रभावित होता है. ऐसे लोगों की संख्या बढ़ जाती है, जिनकी देखरेख केवल एक व्यक्ति के जिम्मे होती है. एक्स्ट्रीम केस में देखा गया है कि एक बच्चा पैदा करने की नीति की वजह से ऐसी भी स्थिति आती है कि एक अकेले वयस्क को अपने माता-पिता के साथ ग्रैंड पेरेंट्स की भी देखभाल करनी पड़ती है. चीन ने 1980 में वन-चाइल्ड पॉलिसी अपनाई थी. इससे उबरने के लिए उसे उन लोगों को राहत देनी पड़ी, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे. तीन दशकों बाद उसे इस पॉलिसी को पूरी तरह हटाना पड़ा.’

वहीं, उत्तर प्रदेश के संदर्भ में वन-चाइल्ड पॉलिसी को लेकर वीएचपी ने कहा कि इससे राज्य के अलग-अलग समुदायों में असंतुलन भी बढ़ेगा. उसका तर्क है कि ये समुदाय फैमिली प्लानिंग और गर्भनिरोध संबंधी प्रयासों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते हैं. वीएचपी ने दूसरे राज्यों में इस ‘जनसंख्या असंतुलन’ के होने का हवाला देते हुए कहा,

‘असम और केरल जैसे राज्यों में ये असुंतलन विशेष रूप से चिंताजनक होता जा रहा है. वहां जनसंख्या की पूरी ग्रोथ ही गिर गई है. इन दोनों राज्यों में हिंदुओं का TFR 2.1 के रिप्लेसमेंट रेट से काफी नीचे चला गया है, लेकिन मुसलमानों का TFR असम में 3.16 और केरल में 2.33 है. इन राज्यों में एक समुदाय की जनसंख्या सिकुड़ रही है, जबकि दूसरे की अब भी बढ़ रही है.’

इसके बाद वीएचपी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस स्थिति में पड़ने से बचना चाहिए. लिहाजा उसकी नई पॉलिसी में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि जनसंख्या असंतुलन का समाधान हो सके, वर्ना इसका ‘उलटा असर’ भी हो सकता है.

Population
प्रतीकात्मक तस्वीर. (पीटीआई)

क्या बोले दूसरे नेता?

उत्तर प्रदेश की चाइल्ड पॉलिसी से अन्य लोग भी इत्तफाक नहीं रखते. लेकिन उनके तर्क वीएचपी से अलग हैं. जैसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है,

‘सिर्फ कानून बनाकर जनसंख्या पर नियंत्रण करना संभव नहीं है. जब महिलाएं शिक्षित होंगी तो अपने आप प्रजनन दर घटेगी. कुछ लोग सोचते हैं कि सिर्फ कानून बनाने से कुछ हो जाएगा, सबकी अपनी-अपनी सोच है. लेकिन हम तो इसके लिए काम कर रहे हैं और इसका असर सभी कम्युनिटी पर पड़ेगा.’

वहीं, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को ‘नो चाइल्ड या मोर चाइल्ड पॉलिसी’ लानी चाहिए. इंडिया टुडे/आजतक के रिपोर्टर मुस्तफा के मुताबिक, नवाब मलिक ने तंज कसते हुए कहा,

‘योगी जी को नो चाइल्ड पॉलिसी या मोर चाइल्ड पॉलिसी लानी चाहिए. एक तरफ कई BJP नेता अविवाहित हैं और उनके बच्चे नहीं हैं. उन्हें नो चाइल्ड पॉलिसी से सपोर्ट मिलेगा. वहीं, साक्षी महाराज जैसे BJP नेता हिंदुओं को और बच्चे पैदा करने को कहते हैं. योगी जी को अपनी पार्टी के नेताओं की मांग पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए.’

इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार को ऐसी नीति लाने से पहले ये सूचना देनी चाहिए कि उसके मंत्रियों के कितने बच्चे हैं, इसके बाद ही विधेयक लागू करना चाहिए.


वीडियो- यूपी ब्लॉक प्रमुख चुनाव: बहराइच में BJP उम्मीदवार के पति पर BDC के जेठ की हत्या में FIR 

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