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यूपी में किसी का भी पुलिस से एनकाउंटर करवाएं, रेट आठ लाख रुपये है

भारतीय जनता पार्टी ने जब 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत की थी, तो उनका एक नारा था-

न जंगलराज, न अत्याचार
अबकी बार, भाजपा सरकार

भाजपा सरकार आ गई. योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन गए. उसके बाद शुरू हुआ उत्तर प्रदेश से अपराधियों का सफाया. खुद मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधी या तो उत्तर प्रदेश छोड़कर चले जाएं, या फिर उनकी जगह जेल में है. इसके लिए योगी ने यूपी पुलिस को खुली छूट दी. ताबड़तोड़ एनकाउंटर हुए. खुद यूपी पुलिस ने आंकड़ा जारी कर बताया कि मार्च 2017 से अब तक यूपी पुलिस की ओर से 1500 एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें 60 अपराधी मारे गए हैं और 400 लोग घायल हो गए हैं. इन एनकाउंटर्स पर विपक्ष ने सवाल उठाए, लोगों ने सवाल उठाए और फिर मानवाधिकार संगठनों ने यूपी सरकार को कई नोटिस जारी किए.

यूपी में जब भी एनकाउंटर हुए, विपक्ष के साथ ही मानवाधिकार आयोग ने भी सवाल खड़े किए. हर बार सरकार आरोपों से इनकार करती रही.
यूपी में जब भी एनकाउंटर हुए, विपक्ष के साथ ही मानवाधिकार आयोग ने भी सवाल खड़े किए. हर बार सरकार आरोपों से इनकार करती रही.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार ऐसे आरोपों को खारिज किया. योगी आदित्यनाथ ने मई में इंडिया टुडे से कहा था-

‘पुलिस या प्रशासन निर्दोष व्यक्ति को नहीं मारता. वे ऐसा नहीं कर सकते. लेकिन अगर कोई पुलिस पर गोली चलाएगा तो पुलिस आत्मरक्षा में गोली चला सकती है. मैं जो कह सकता हूं वो ये है कि मेरी सरकार किसी के साथ भी जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी. हर नागरिक को सुरक्षा की गारंटी होगी और हर नागरिक को विकास के लिए अवसर प्रदान कराए जाएंगे.’

योगी के एनकाउंटर अभियान पर फिर खड़े हो गए हैं सवाल.
योगी के एनकाउंटर अभियान पर फिर खड़े हो गए हैं सवाल.

लेकिन असलियत कुछ और ही है. सरकार ने विपक्ष के दावों को खारिज़ तो कर दिया है, मानवाधिकार संगठनों के सवालों पर सफाई भी दे दी है. लेकिन अब इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की एक पड़ताल बताती है कि एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों को सिरे से खारिज़ नहीं किया जा सकता है.

पैसे और तरक्की के लिए मुठभेड़

इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम की जांच में सामने आया है कि यूपी पुलिस के कुछ अधिकारियों ने पैसे और तरक्की के लिए कुछ फर्जी मुठभेड़ भी की हैं. जब से योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बने हैं, सिर्फ आगरा ज़ोन में ही 241 मुठभेड़ें हुई हैं. इन मुठभेड़ों की हकीकत पता लगाने के लिए इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर ने खुद को एक कारोबारी बताते हुए आगरा के चित्राहाट पुलिस स्टेशन के एक सब इंस्पेक्टर सर्वेश कुमार से संपर्क किया. रिपोर्टर ने सब इंस्पेक्टर सर्वेश से कहा कि उसका एक विरोधी कारोबारी है, जिसे वो ठिकाने लगवाना चाहता है. सब इंस्पेक्टर सर्वेश कुमार ने अंडर कवर रिपोर्टर को इसका एक तरीका बताया. इंस्पेक्टर सर्वेश ने कहा-

‘कारोबारी के साथ जैसी तुम्हारी दिक्कत है, उसे हल करने का एक ही तरीका है. बाइचांस मेरे इलाके में दो-तीन बैंक आते हैं. अगर इन बैंक में कोई वारदात हो जाती है, तो मैं उस कारोबारी को इसमें शाामिल कर लूंगा. जब वो एक बार वारदात में शामिल हो जाएगा तो हम किसी भी हद तक जा सकते हैं. वो घायल भी हो सकता है, वो जान से भी हाथ धो सकता है.’

जब से बीजेपी सरकार बनी है, यूपी में 1500 से ज्यादा मुठभेड़ हुई हैं.

एसआई सर्वेश ने अंडर कवर रिपोर्टर को इसका प्लान बताते हुए कहा-

‘अगर किसी बैंक में डकैती हो जाती है, तो फिर पुलिस फर्जी सबूत जुटाएगी. अज्ञात संदिग्धों के नाम से एफआईआर दर्ज होगी. इसके बाद मुठभेड़ होगी और मुठभेड़ में तो कुछ भी हो सकता है. गोली लगने पर वो घायल भी हो सकता है, उसकी जान भी जा सकती है.’

सर्वेश कुमार ने अंडर कवर रिपोर्टर को बताया कि उसके पास तीन थानों की जिम्मेदारी है, जिन्हें वो सेट कर सकता है. सर्वेश के मुताबिक चित्राहाट, जैतपुर और बाह में अगर कुछ भी होता है, तो मैं उसे मैनेज कर लूंगा. अंडर कवर रिपोर्टर ने सर्वेश कुमार से और भी तफ्सील से बात की. जब रिपोर्टर ने पूछा कि अगर बैंक लूट होती है तो क्या उसमें उस लड़के को भी बैंक आना होगा, जिसको ठिकाने लगाना है. सर्वेश ने जवाब दिया कि लड़का वहां नहीं होगा, लेकिन उसे लाना तो पड़ेगा ही. उसे अज्ञात संदिग्धों में नामजद किया जाएगा. ये पुलिस का काम है. अगर उसके पास कोई आईडी होगी, तो पुलिस उसे मैनेज कर लेगी. उसकी आईडी को घटना स्थल से बरामद कर लिया जाएगा. इसके लिए कितने पैसे खर्च करने के जवाब में सर्वेश कुमार ने कहा कि अगर उसके थाने की बात होगी तो कीमत पांच-छह लाख रुपये लगेगी. अगर किसी दूसरे थाने की होगी, तो वहां पर बात करनी होगी. वहां पर दो लाख रुपये ज्यादा लग सकता है. इससे अधिक नहीं लगेगा. सर्वेश कुमार ने अंडर कवर रिपोर्टर को गारंटी देते हुए कहा कि मुठभेड़ में उसे मार दिया जाएगा.

खुले में शूटिंग होती है, बचने का कोई चांस नहीं

तीन पुलिसवालों ने माना है कि अगर उन्हें पैसे मिलें तो वो किसी का भी एनकाउंटर कर सकते हैं.

सर्वेश ने कहा कि कभी भी लिखा-पढ़ी में गिरफ्तारी नहीं होती है. गिरफ्तार तो किया ही जाता है, लेकिन उसे कागज़ में दर्ज नहीं किया जाता. जिस आदमी को निशाने पर लिया जाता है, उसके बचने का कोई चांस नहीं होता. जब शूटिंग खुले में होती है, तो कोई बच नहीं सकता, इसका चांस ही नहीं है. सर्वेश ने ये भी माना है कि जो मुठभेड़ दिखाई जाती है, वो असली नहीं होती है. जिसे मारना होता है, उसे पहले से पकड़कर रखा जाताा है. जब मारना होता है तो उसे मुठभेड़ वाली जगह पर लाया जाता है और फिर मार दिया जाता है. कई बार ऐसा भी होता है कि जिसे मारना होता है, उसे पहले से पकड़कर नहीं रखा जाता है. उसे लालच देकर तय जगह पर बुलाया जाता है, वहां पहले से आदमी तैयार होते हैं और फिर उसे मुठभेड़ दिखाकर मार दिया जाता है.

ये कहानी सिर्फ इकलौते सर्वेश सिंह की ही नहीं है. आगरा के बसई जगनेर पुलिस स्टेशन के स्टेशन ऑफिसर जगदम्बा सिंह ने भी अंडर कवर रिपोर्ट के सामने माना है कि प्रमोशन का लालच ऐसा होता है कि वो पुलिसवालों से फर्जी मुठभेड़ तक करवा देता है. स्टेशन ऑफिसर ने दावा किया-

‘थाने का चार्ज लेने के लिए कोई भी पुलिसवाला कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है. हत्या कर दे, पैसे से खऱीद ले, इसके लिए कुछ भी किया जा सकता है.’

जगदम्बा सिंह ने दावा किया-

‘यूपी की पुलिस से ज्यादा ताकतवर भारत में और कोई पुलिस नहीं है. यहां पर एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं और सत्ता का दुरुपयोग आम बात है. आज की तारीख में मीडिया इतना हावी है, तो भी एनकाउंटर हो रहे हैं.’

पुलिसवालों ने कहा है कि पैसे और प्रमोशन के लिए हत्या भी कर सकते हैं.

जगदम्बा सिंह ने कहा-

‘काबुल के घोड़ों की तरह हम सबसे बढ़िया हैं. हमारे हाथ-पैर बंधे हैं. मुंह ढका है, फिर भी हम काट लेते हैं, लात मारते हैं, मार देते हैं. जो भी चाहते हैं कर देते हैं. हम भारत की सबसे ताकतवर पुलिस हैं.’

जगदम्बा सिंह ने इन मुठभेड़ों के लिए ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियों के शामिल होने की बात भी मानी है. जगदम्बा सिंह के दावे के मुताबिक-

‘हर एनकाउंटर अचानक नहीं हो जाता है. कई बार जिले के कप्तान को संभावित एनकाउंटर के बारे में जानकारी होती है. इन एनकाउंटर में कौन शामिल होगा, कितने दरोगा, कॉन्सटेबल, इंस्पेक्टर होंगे, इन सबकी जानकारी होती है. बिना एसपी या एसएसपी की सहमति के कुछ नहीं होता.’

बसई जगनेर पुलिस स्टेशन के ही सब इंस्पेक्टर बलबीर सिंह तो अंडर कवर रिपोर्टर से आगरा सिटी में ट्रांसफर के लिए बेचैन दिखाई दिए. बलबीर ने कहा-

‘शहर में चौकी मिले तो ठीक है, वरना क्या फायदा है. मान लो थाने में पोस्टिंग हो गई. इंस्पेक्टर ने चौकी पर पटक दिया. अब चौकी इंचार्ज दूसरा है. वही सारा पैसा ले जाएगा. फैसला भी वही करेगा.’

पेशेवर शूटर से भी हत्या करवाती है पुलिस

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बसई जगनेर पुलिस स्टेशन के एसआई बलबीर सिंह अंडर कवर रिपोर्टर्स से इतना तक कहा कि अगर हत्या करवानी होती है, तो फिर भाड़े के हत्यारों से भी संपर्क किया जा सकता है. बलबीर ने कहा कि अगर हत्या करवाना चाहते हो तो पेशेवर हत्यारों से भी मिल सकते हो. ऐसे कई हत्यारे मौजूद हैं. पुलिस एनकाउंटर पर बलबीर ने कहा कि मैं शहर में आ जाउंगा तो एनकाउंटर हो जाएगा. इसके लिए जिसे मारना है, उसे शहर में ही पकड़ लिया जाएगा. पूरी योजना गोपनीय रखी जाएगी और कोई इसके बारे में जान भी नहीं पाएगा.
इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम से हुई पुलिसवालों की पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं.

इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की पड़ताल में ये तीन नाम सामने आए हैं. हालांकि इसका कतई ये मतलब नहीं है कि जितने भी एनकाउंटर हुए हैं, वो सब फर्जी हैं. लेकिन इस बात से किसी भी तरह से इन्कार नहीं किया जा सकता कि जितने एनकाउंटर हुए हैं, उनमें से कुछ फर्जी हैं. और यही वजह है कि स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की पड़ताल सामने आने के बाद डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने इन तीनों पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया है. आगरा के एसएसपी अमित पाठक ने सफाई देते हुए कहा- ‘मैं मानता हूं कि पुलिस फोर्स में कोई भी अपने स्वार्थ के लिए नियमों के खिलाफ जाता है और निर्दोष नागरिकों को फंसाता है तो उसके साथ सख्ती से पेश आना चाहिए.’ वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से भी तीनों पुलिसवालों को सस्पेंड करने की जानकारी दी गई है. ट्वीट में लिखा गया है कि पुलिस महानिदेशक ने पुलिसकर्मियों के इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान को गंभीरता से लिया है जिससे यूपी पुलिस की छवि धूमिल हुई है.

 


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